ईरान इस समय गंभीर राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है। देशभर में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तीखे बयानों ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है। तेहरान की सड़कों पर जहां प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई तेज है, वहीं वॉशिंगटन से आ रही धमकियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है।
महंगाई से शुरू हुआ विरोध, राजनीति तक पहुंचा आंदोलन
ईरान में दिसंबर के अंत से शुरू हुए प्रदर्शन पहले महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक संकट तक सीमित थे, लेकिन धीरे-धीरे ये सरकार विरोधी आंदोलन में तब्दील हो गए। कई शहरों में हिंसा की खबरें सामने आई हैं। मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में हजारों लोगों की जान गई है और बड़ी संख्या में लोग घायल व गिरफ्तार हुए हैं। हालांकि, ईरानी प्रशासन इन आंकड़ों को स्वीकार नहीं करता।
ट्रंप की कड़ी चेतावनी: ‘जनता को आज़ादी चाहिए’
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया से बातचीत में ईरान को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया। परमाणु कार्यक्रम पर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने दावा किया कि पहले भी ईरान को चेतावनी दी गई थी और उसके ठिकानों को नष्ट किया गया था। ट्रंप ने यह भी कहा कि वह ईरान में लोगों की हत्या होते नहीं देख सकते और वहां “आजादी” चाहते हैं।
सोशल मीडिया पर उन्होंने ईरानी प्रदर्शनकारियों से संस्थानों के खिलाफ डटे रहने की अपील करते हुए लिखा कि अत्याचार करने वालों को उनके कृत्यों की कीमत चुकानी होगी। ट्रंप के इन बयानों को तेहरान पर प्रत्यक्ष दबाव और संभावित सैन्य हस्तक्षेप के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
तेहरान का पलटवार: ‘तुम हत्यारे हो’
ट्रंप के बयानों के बाद ईरानी नेतृत्व और समर्थक गुटों की ओर से कड़ा जवाब सामने आया। अमेरिकी रवैये को हस्तक्षेपकारी बताते हुए उसे “हत्यारा” करार दिया गया और देश की संप्रभुता में दखल न देने की चेतावनी दी गई।
रजा पहलवी का सेना को संदेश
ईरान के पूर्व शाह के बेटे रजा पहलवी ने भी बयान जारी कर सशस्त्र बलों से जनता के साथ खड़े होने की अपील की। उन्होंने कहा कि सेना किसी राजनीतिक व्यवस्था की नहीं बल्कि देश की होती है और अब फैसला लेने का समय है। उनके इस बयान को आंदोलन को और तेज करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
अमेरिका ने बैठकें रद्द कीं, बढ़ी अनिश्चितता
ट्रंप ने ईरानी अधिकारियों के साथ प्रस्तावित सभी बैठकों को रद्द करने की घोषणा कर दी है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि ईरान में हिंसा और फांसी जैसी घटनाएं जारी रहीं तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। उनके शब्दों में, “अंत में हमारा लक्ष्य जीतना है।”
पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव
ईरान में चल रही अशांति और अमेरिका के आक्रामक तेवरों ने पूरे पश्चिम एशिया को एक बार फिर अस्थिरता की ओर धकेल दिया है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह संकट कूटनीति तक सीमित रहेगा या किसी बड़े टकराव की दिशा में बढ़ेगा।