मकर संक्रांति पर गंगासागर में उमड़ी आस्था की लहर, लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई पवित्र डुबकी

मकर संक्रांति पर गंगासागर में उमड़ी आस्था की लहर, लाखों श्रद्धालुओं ने लगाई पवित्र डुबकी
January 14, 2026 at 3:00 pm

सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ आज देशभर में मकर संक्रांति का पावन पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर पश्चिम बंगाल के गंगासागर सहित देश की पवित्र नदियों में स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लाखों भक्तों ने गंगा में डुबकी लगाकर पुण्य, शांति और मोक्ष की कामना की।

सनातन धर्म में मकर संक्रांति का विशेष धार्मिक, आध्यात्मिक और खगोलीय महत्व माना जाता है। जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तभी इस पर्व का आरंभ होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से व्यक्ति को विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है, और गंगा स्नान को सबसे श्रेष्ठ माना गया है।

शास्त्रों में उल्लेख है कि मकर संक्रांति के दिन गंगा में स्नान करने से पापों का नाश होता है और जन्म-जन्मांतर के दोष दूर होते हैं। माना जाता है कि इस दिन गंगा जल में स्नान करने से न केवल शरीर की शुद्धि होती है, बल्कि आत्मा भी पवित्र होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

गंगासागर का विशेष महत्व

मकर संक्रांति के दिन पश्चिम बंगाल स्थित गंगासागर को अत्यंत पवित्र तीर्थ माना जाता है। यह वही स्थल है जहां मां गंगा का मिलन समुद्र से होता है। हर वर्ष इस अवसर पर झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल सहित देश के विभिन्न हिस्सों से लाखों श्रद्धालु यहां आस्था की डुबकी लगाने पहुंचते हैं। धार्मिक विश्वास है कि गंगासागर में स्नान करने से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, राजा सगर के 60 हजार पुत्र कपिल मुनि के श्राप से भस्म हो गए थे। उनके उद्धार के लिए राजा भगीरथ ने कठोर तपस्या कर मां गंगा को पृथ्वी पर अवतरित किया। माना जाता है कि मकर संक्रांति के दिन ही गंगासागर में स्नान और पिंडदान से सगर पुत्रों को मोक्ष प्राप्त हुआ था। तभी से इस दिन तिलांजलि, पिंडदान और दान-पुण्य की परंपरा चली आ रही है।

दान-पुण्य की परंपरा

मकर संक्रांति के दिन तिल, गुड़, अन्न और कंबल का दान करना विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इससे पितरों को शांति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। कुल मिलाकर यह पर्व आत्मिक शुद्धि, पाप मुक्ति और मोक्ष की कामना का प्रतीक है।