दिल्ली के पॉश इलाके में ‘डिजिटल अरेस्ट’ से 14.85 करोड़ की ठगी, एन आर आई डॉक्टर दंपत्ति बने शिकार

दिल्ली के पॉश इलाके में ‘डिजिटल अरेस्ट’ से 14.85 करोड़ की ठगी, एन आर आई डॉक्टर दंपत्ति बने शिकार
January 15, 2026 at 3:11 pm

दिल्ली के सबसे पॉश इलाकों में गिने जाने वाले ग्रेटर कैलाश-II से साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां रहने वाले बुजुर्ग एनआरआई डॉक्टर दंपत्ति को ठगों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के जाल में फंसाकर दिनदहाड़े करीब 14.85 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। यह मामला न केवल साइबर सुरक्षा, बल्कि बैंकिंग सिस्टम की खामियों पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

पीड़ितों की पहचान 77 वर्षीय डॉक्टर इंदिरा तनेजा और उनके 81 वर्षीय पति डॉक्टर ओम तनेजा के रूप में हुई है, जो चार दशक अमेरिका में बिताने के बाद हाल ही में भारत लौटे थे। ठगों ने उनकी कानून के प्रति संवेदनशीलता और भरोसे का फायदा उठाकर उन्हें मानसिक रूप से बंधक बना लिया।

कैसे शुरू हुआ ‘डिजिटल अरेस्ट’ का खेल?

24 दिसंबर 2025 को डॉक्टर दंपत्ति को एक फोन कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को ट्राई (TRAI) का अधिकारी बताया और कहा कि उनके नाम पर जारी सिम कार्ड से अश्लील वीडियो प्रसारित हो रहे हैं। साथ ही, उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी दी गई।

ठगों ने दावा किया कि उनके खिलाफ कई शिकायतें दर्ज हैं और गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है। डर का माहौल बनाते हुए उन्हें किसी से बात न करने और लगातार कैमरा ऑन रखने को कहा गया। इसी मानसिक दबाव और निगरानी को साइबर अपराध की भाषा में ‘डिजिटल अरेस्ट’ कहा जाता है।

17 दिन तक घर बना ‘जेल’

ठगों ने दंपत्ति को 9 जनवरी 2026 तक अपने ही घर में सीमित कर रखा। इस दौरान उनसे अलग-अलग बहानों से बैंक ट्रांसफर करवाए गए। धीरे-धीरे उनकी जीवनभर की जमा पूंजी ठगों के खातों में चली गई।

7 राज्यों में फैला ठगी का नेटवर्क

दिल्ली पुलिस की जांच में सामने आया कि ठगी की रकम एक जगह नहीं, बल्कि देश के कई राज्यों में भेजी गई:

  • गुजरात (वडोदरा) – 4 करोड़ रुपये
  • असम (गुवाहाटी) – 1.99 करोड़ रुपये
  • दिल्ली (मयूर विहार फेज-3) – 2 करोड़ रुपये
  • महाराष्ट्र (मुंबई) – 2.05 करोड़ रुपये
  • उत्तर प्रदेश (वाजिदपुर) – 2.1 करोड़ रुपये
  • पश्चिम बंगाल (कोलकाता) – 2.2 करोड़ रुपये
  • उत्तराखंड (बेलड़ा) – 50 लाख रुपये


500 से ज्यादा ‘म्यूल अकाउंट्स’ का जाल

जांच में यह भी सामने आया कि इन मुख्य खातों से पैसे को तुरंत 500 से अधिक म्यूल अकाउंट्स और डिजिटल वॉलेट्स में छोटे-छोटे ट्रांजेक्शन (10 से 500 रुपये) के जरिए बांट दिया गया, ताकि मनी ट्रेल को ट्रैक करना मुश्किल हो जाए।
अब तक पुलिस 1.41 करोड़ रुपये फ्रीज करा चुकी है, लेकिन बड़ी राशि अब भी ठगों के पास है।

प्रतिष्ठित करियर, फिर भी बने शिकार

डॉ. इंदिरा तनेजा न्यू जर्सी की यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिसिन एंड डेंटिस्ट्री में प्रोफेसर रह चुकी हैं, जबकि उनके पति डॉ. ओम तनेजा ने अमेरिकी संघीय सरकार और संयुक्त राष्ट्र (UN) के साथ काम किया है। बावजूद इसके, वे इस संगठित साइबर ठगी का शिकार हो गए।

सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव

यह मामला साफ चेतावनी देता है कि कोई भी सरकारी एजेंसी—पुलिस, सीबीआई, ईडी या ट्राई—फोन या वीडियो कॉल पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती और नही पैसे की मांग करतीहै।
अगर ऐसा कोई कॉल आए, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन से संपर्क करें।