छतरपुर में दो युवतियों के समलैंगिक विवाह का दावा, बागेश्वरधाम से थाने तक पहुंचा मामला

छतरपुर में दो युवतियों के समलैंगिक विवाह का दावा, बागेश्वरधाम से थाने तक पहुंचा मामला
January 15, 2026 at 3:11 pm

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले से एक संवेदनशील और चर्चा में रहने वाला मामला सामने आया है, जहां दो युवतियों ने आपसी सहमति से समलैंगिक विवाह करने का दावा किया है। दोनों के बागेश्वर धाम से लौटने के बाद सिविल लाइन थाने में हंगामे की स्थिति बन गई, जिससे मामला और ज्यादा तूल पकड़ गया।

5 साल से चल रहा था प्रेम संबंध

जानकारी के अनुसार, दोनों युवतियां सिविल लाइन थाना क्षेत्र की रहने वाली हैं। एक की पहचान अंजली रैकवार (23 वर्ष), निवासी बजरंग नगर और दूसरी की पहचान मोहिनी कुशवाहा (21 वर्ष), निवासी दुर्गा कॉलोनी के रूप में हुई है। अंजली का कहना है कि दोनों के बीच पिछले पांच वर्षों से प्रेम संबंध था और वे एक-दूसरे के साथ जीवन बिताना चाहती थीं, लेकिन परिजन इस रिश्ते के खिलाफ थे।

बागेश्वरधाम जा कर शादी का दावा

अंजली के मुताबिक, 12 तारीख को दोनों घर से निकलकर बागेश्वर धाम पहुंचीं, जहां उन्होंने आपसी सहमति से विवाह किया। दोनों का कहना है कि उन्होंने यह फैसला अपनी मर्जी से और पूरी समझ के साथ लिया। हालांकि, जैसे ही मोहिनी के परिजनों को इसकी जानकारी मिली, वे नाराज हो गए और मामला थाने तक पहुंच गया।

थाने में हंगामा, जबरन ले जाने का आरोप

थाने में उस वक्त तनाव की स्थिति बन गई जब मोहिनी के परिजनों ने उसे जबरन घर ले जाने की कोशिश की। अंजली ने आरोप लगाया कि मोहिनी को उसकी इच्छा के खिलाफ ले जाया जा रहा है। इसी बात को लेकर सिविल लाइन थाने में दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई और माहौल काफी गर्म हो गया।

पुलिस ने संभाला मामला

स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने दोनों युवतियों को फिलहाल थाने में सुरक्षित रखा है। अधिकारियों का कहना है कि मामला बेहद संवेदनशील है, इसलिए दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। यह भी जांच की जा रही है कि किसी तरह का दबाव या जबरदस्ती तो नहीं की जा रही।

गुमशुदगी से शुरू हुआ था मामला

बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले दोनों युवतियों की गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई थी। बाद में पता चला कि वे बागेश्वर धाम गई थीं। अब वापस लौटने के बाद जब उन्होंने विवाह का दावा किया, तो विवाद और गहरा गया।

आगे क्या होगा?

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और परिजनों को समझाइश दी जा रही है। अब यह देखना अहम होगा कि युवतियों की सहमति को कानूनी रूप से कैसे देखा जाता है और परिवार या समाज का दबाव किस हद तक प्रभाव डालता है। यह मामला केवल कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी कई अहम सवाल खड़े करता है।