माघ मेला 2026 के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच चल रहा विवाद अब और गहरा गया है। माघ मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर उनके द्वारा ‘शंकराचार्य’ उपाधि के उपयोग पर आपत्ति जताई है और 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है।
प्राधिकरण की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि सुप्रीमकोर्ट में ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य पद को लेकर मामला विचाराधीन है, ऐसे में कोई भी व्यक्ति स्वयं को शंकराचार्य घोषित नहीं कर सकता। इसके बावजूद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा अपने शिविर के बोर्ड पर ‘शंकराचार्य’ लिखा गया है, जो नियमों के विरुद्ध है।
24 घंटे में जवाब देने का निर्देश
मेला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि स्वामी को 24 घंटे के भीतर इस त्रुटि को सुधारना होगा और यह भी बताना होगा कि उन्होंने किस आधार पर यह उपाधि प्रयोग की है। यदि तय समय में जवाब नहीं दिया गया, तो आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
मौनी अमावस्या से शुरू हुआ विवाद
यह विवाद मौनी अमावस्या के दिन और गहरा गया, जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपनी शोभायात्रा के साथ संगम स्नान के लिए जा रहे थे। पुलिस ने उनकी पहिया लगी पालकी को संगम नोज की ओर जाने से रोक दिया।
इस पर स्वामी और उनके समर्थकों ने विरोध जताया। मामला इतना बढ़ा कि कुछ शिष्यों की पुलिस से झड़प हो गई और कई को हिरासत में भी लिया गया।
प्रशासन का पक्ष
मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि:
उन्होंने कहा कि यदि उस समय पालकी को संगम तक जाने दिया जाता, तो भगदड़ जैसी स्थिति बन सकती थी।
धरने पर बैठे स्वामी
घटना से आहत होकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद त्रिवेणी मार्ग स्थित अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए। उन्होंने पुलिस पर दुर्व्यवहार और शिष्यों के साथ मारपीट का आरोप लगाया है।
वहीं पुलिस का कहना है कि शिष्यों ने बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश की थी, जिसके चलते कार्रवाई करनी पड़ी।
क्या है पूरा मामला?