दुनिया की राजनीति एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आक्रामक बयानों और ‘कब्जे की नीति’ के बाद अब रूस को लेकर भी बड़ी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। इस बार वजह बने हैं रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के करीबी विचारक अलेक्जेंडर डुगिन, जिन्होंने खुले तौर पर कुछ देशों पर रूस के प्रभाव या कब्जे की बात कही है।
ट्रंप की रणनीति से क्यों जोड़ा जा रहा है रूस?
ट्रंप पहले ही वेनेजुएला और ग्रीनलैंड को लेकर अपने बयानों से वैश्विक हलचल मचा चुके हैं। ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने की जिद और यूरोपीय देशों पर दबाव बनाने की नीति को कई विश्लेषक “कब्जा राजनीति” बता रहे हैं।
अब इसी पैटर्न को लेकर रूस का नाम सामने आ रहा है।
पुतिन के गुरु दुगिन ने क्या कहा?
रूस के जाने-माने विचारक और पुतिन के वैचारिक मार्गदर्शक माने जाने वाले अलेक्जेंडर डुगिन ने दावा किया है कि अगर वैश्विक हालात ऐसे ही रहे, तो रूस भविष्य में उन देशों पर अपना प्रभाव बढ़ा सकता है जो कभी सोवियत संघ का हिस्सा थे।
ये हैं वो 7 देश जिनका नाम लिया गया:
इन सभी देशों पर कभी सोवियत संघ का प्रभाव रहा है और आज भी ये रणनीतिक रूप से रूस के लिए अहम माने जाते हैं।
पुतिन का क्या है आधिकारिक रुख?
हालांकि, क्रेमलिन पहले ही साफ कर चुका है कि पुतिन सोवियत संघ को दोबारा खड़ा करने के पक्ष में नहीं हैं।
रूस के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा था कि:
“सोवियत संघ को फिर से बनाना न संभव है और न ही रूस का लक्ष्य।”
हालांकि, मीडिया रिपोर्ट्स का दावा है कि रूस इन देशों को सीधे कब्जे में लेने के बजाय ‘यूरेशियन यूनियन’ जैसे ढांचे के तहत अपने प्रभाव में रखना चाहता है।
यूक्रेन युद्ध में रूस की स्थिति
यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए है। रिपोर्ट्स के मुताबिक:
हालांकि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की इन शर्तों को मानने से इनकार कर चुके हैं।
क्या दुनिया एक नई जंग की ओर बढ़ रही है?
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की आक्रामक नीति और रूस की रणनीतिक सोच मिलकर आने वाले समय में वैश्विक संतुलन बिगाड़ सकती है।
अगर बड़े देश ‘कब्जे की सोच’ पर आगे बढ़े, तो यह दुनिया के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।