बिहार की राजनीति में एक अहम मोड़ आया है। अब विधान परिषद (MLC) के स्थानीय निकाय कोटे से होने वाले चुनावों में पंच और सरपंच भी मतदान कर सकेंगे। केंद्र सरकार के इस फैसले से पंचायत स्तर की राजनीति को नई ताकत मिलने जा रही है और एमएलसी चुनावों के समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।
क्या है फैसला?
केंद्र सरकार के पंचायती राज मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि संविधान के अनुच्छेद 171(3)(a) और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत ग्राम पंचायतें स्थानीय निकाय की श्रेणी में आती हैं।
इसी आधार पर अब ग्राम कचहरी से जुड़े पंच और सरपंच भी MLC चुनाव में मतदाता माने जाएंगे।
पहले क्या स्थिति थी?
अब तक विधान परिषद के स्थानीय प्राधिकारी निर्वाचन क्षेत्र में केवल:
ही वोट डाल सकते थे।
ग्राम कचहरी के प्रतिनिधि यानी पंच और सरपंच इस प्रक्रिया से बाहर थे, जबकि वे भी निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं।
क्यों अहम है यह फैसला?
ग्रामीण राजनीति को मिलेगा बल
इस फैसले से पंचायत स्तर पर लोकतंत्र और मजबूत होगा। पंच और सरपंच लंबे समय से इस अधिकार की मांग कर रहे थे। अब उन्हें भी विधान परिषद जैसे महत्वपूर्ण चुनाव में भागीदारी मिलेगी, जिससे ग्रामीण प्रतिनिधित्व और प्रभाव दोनों बढ़ेंगे।
सियासी असर
राजनीतिक दलों के लिए यह फैसला बेहद अहम माना जा रहा है।
अब एमएलसी चुनाव सिर्फ शहरी या बड़े पंचायत प्रतिनिधियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गांवों की भूमिका भी निर्णायक होगी।