लखनऊ और कानपुर के बीच रोजाना सफर करने वाले लाखों लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है. लंबे इंतजार के बाद लखनऊ–कानपुर एक्सप्रेस-वे अब लगभग तैयार हो चुका है और मार्च महीने से इस पर वाहनों का संचालन शुरू होने की संभावना है. इसके चालू होते ही दोनों शहरों के बीच की दूरी तय करने में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा.
फिलहाल लखनऊ से कानपुर जाने में यात्रियों को 2 से 3 घंटे तक का समय लग जाता है, लेकिन एक्सप्रेस-वे शुरू होने के बाद यह सफर महज 30 से 40 मिनट में पूरा किया जा सकेगा.
मार्च से शुरू होगा संचालन
कानपुर मंडल के कमिश्नर के. विजयेंद्र पांडियन के अनुसार, पहले एक्सप्रेस-वे को 25 दिसंबर से शुरू करने की योजना थी, लेकिन कुछ हिस्सों में निर्माण कार्य अधूरा रहने के कारण तारीख आगे बढ़ानी पड़ी. अब फरवरी तक लगभग पूरा काम खत्म हो चुका है और मार्च से ट्रैफिक संचालन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं.
जाम से मिलेगी स्थायी राहत
वर्तमान में कानपुर से लखनऊ जाने के लिए मुख्य रूप से जाजमऊ गंगा पुल का ही सहारा है, जहां दिनभर भारी ट्रैफिक रहता है. सुबह और शाम के समय हालात और भी खराब हो जाते हैं. इसके अलावा गंगा बैराज की ओर सरैंया क्रॉसिंग पर रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण भी जारी है, जिससे यात्रियों की परेशानी बढ़ी हुई है. ऐसे में एक्सप्रेस-वे का शुरू होना जाम से राहत दिलाने वाला साबित होगा.
एलिवेटेड और ग्रीन फील्ड रूट
इस एक्सप्रेस-वे की खास बात इसका आधुनिक डिजाइन है. करीब 18 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड बनाया गया है, जबकि लगभग 45 किलोमीटर का रूट ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के रूप में विकसित किया गया है. इससे बिना रुकावट तेज और आरामदायक सफर संभव होगा.
कानपुर की ओर जाजमऊ गंगा पुल से आगे एक्सप्रेस-वे की एंट्री मिलेगी, जबकि लखनऊ की तरफ यह पिपरसंड इलाके में बाहर निकलेगा. रास्ते में नवाबगंज, बंथरा, बनी, दतौली कांठा और तौरा जैसे इलाकों को जोड़ते हुए यह उन्नाव के आज़ाद चौक तक पहुंचेगा.
4700 करोड़ की लागत, सुरक्षा पर पूरा फोकस
करीब 4700 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेस-वे पर यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है. पूरे रूट पर 3 बड़े पुल, 28 छोटे पुल, 38 अंडरपास, 6 फ्लाईओवर और 4 इंटरचेंज बनाए गए हैं, ताकि ट्रैफिक सुचारू रूप से चलता रहे.
साल 2023 में शुरू हुई यह परियोजना अब अपने अंतिम चरण में है. मार्च से संचालन शुरू होते ही यह एक्सप्रेस-वे न सिर्फ सफर का समय घटाएगा, बल्कि लखनऊ–कानपुर क्षेत्र की कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को भी नई रफ्तार देगा.