भारत की ओर झुका अफगानिस्तान, पाकिस्तान को बड़ा झटका: तालिबान ने दवाओं के आयात पर लगाई रोक

भारत की ओर झुका अफगानिस्तान, पाकिस्तान को बड़ा झटका: तालिबान ने दवाओं के आयात पर लगाई रोक
February 10, 2026 at 3:24 pm

अफगानिस्तान में सत्ता पर काबिज तालिबान ने पाकिस्तान को आर्थिक और रणनीतिक स्तर पर करारा झटका दिया है। तालिबान प्रशासन ने पाकिस्तान से आने वाली सभी दवाओं के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया है। इसके साथ ही अफगान व्यापारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पाकिस्तान के बजाय वैकल्पिक देशों और मार्गों से व्यापार की व्यवस्था करें। इस फैसले के बाद अफगानिस्तान की नजर अब भारत पर टिक गई है।

अफगान वित्त मंत्रालय के मुताबिक यह प्रतिबंध सोमवार से प्रभावी हो चुका है। रिपोर्ट के अनुसार, अवैध रास्तों से आने वाली दवाओं और मेडिकल सामान पर भी सख्त कार्रवाई होगी। स्मगलिंग में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कदम उठाए जाएंगे और जब्त किए गए उत्पाद नष्ट कर दिए जाएंगे। इससे पहले सरकार ने व्यापारियों को पाकिस्तान से जुड़े लेन-देन और दस्तावेज समाप्त करने के लिए सीमित समय भी दिया था। यह जानकारी स्थानीय मीडिया टोलो न्यूज़ में सामने आई है।

पाकिस्तान से क्यों बिगड़े रिश्ते?

बीते कुछ महीनों से अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच संबंध लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। सीमा विवाद, सुरक्षा बलों की झड़पें और प्रमुख ट्रांजिट रूट्स का बंद रहना व्यापार पर भारी पड़ा है। इसी पृष्ठभूमि में तालिबान नेतृत्व पहले ही व्यापारियों से पाकिस्तान पर निर्भरता कम करने और नए व्यापारिक गलियारों की पहचान करने को कह चुका था।

दवाओं की कमी और भारत की भूमिका

अफगानिस्तान में पहले 70 प्रतिशत से ज्यादा दवाइयां पाकिस्तान से आती थीं। प्रतिबंध के बाद काबुल, हेरात सहित कई शहरों में दवाओं की कमी और कीमतों में तेज़ उछाल देखा जा रहा है। इस संकट से निपटने के लिए तालिबान के प्रतिनिधियों ने हाल के महीनों में भारत, ईरान और तुर्की जैसे देशों से संपर्क बढ़ाया है। भारत पहले ही मानवीय आधार पर मदद का भरोसा दे चुका है और अब फार्मास्यूटिकल सप्लाई के नए रास्ते खुलने की संभावना है।

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर असर

अफगान बाजार पाकिस्तान की फार्मा इंडस्ट्री के लिए अहम माना जाता रहा है। दवाओं पर लगे इस बैन से पाकिस्तान को करोड़ों रुपये के नुकसान का अनुमान है। साथ ही क्षेत्रीय कूटनीति में उसकी पकड़ भी कमजोर पड़ सकती है। वहीं भारत के लिए यह कदम अफगानिस्तान के साथ मानवीय सहयोग और व्यापारिक रिश्तों को और मजबूत करने का अवसर बनकर उभरा है।