1200 KM दूर बैठकर हुई सर्जरी! दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल ने रचा मेडिकल इतिहास, क्या खत्म होगी ओपन सर्जरी?

1200 KM दूर बैठकर हुई सर्जरी! दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल ने रचा मेडिकल इतिहास, क्या खत्म होगी ओपन सर्जरी?
February 12, 2026 at 1:58 pm

मेडिकल साइंस ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। देश की राजधानी दिल्ली स्थित Sir Ganga Ram Hospital में 1200 किलोमीटर दूर बैठे डॉक्टर की मदद से टेलीसर्जरी कर चार मरीजों का सफल ऑपरेशन किया गया। इस उपलब्धि के साथ भारत ने मेडिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक नई ऊंचाई छू ली है।

अब वह दौर आ गया है जब डॉक्टर और मरीज के बीच सैकड़ों किलोमीटर की दूरी इलाज में बाधा नहीं बनेगी। टेलीसर्जरी के जरिए यह संभव हो पाया है कि डॉक्टर दूर बैठकर भी जटिल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दे सकें।

भारत ने बनाया रिकॉर्ड, चीन के बाद दूसरा स्थान

इससे पहले चीन ने लगभग 8000 किलोमीटर दूर से टेलीसर्जरी कर मेडिकल जगत में क्रांति ला दी थी। अब भारत ने भी इस दिशा में बड़ा कदम बढ़ाते हुए 1200 किलोमीटर की दूरी से सफल सर्जरी कर दुनिया को अपनी तकनीकी क्षमता का परिचय दिया है।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने किया कमाल

इस ऐतिहासिक टेलीसर्जरी में अहम भूमिका निभाई देश के जाने-माने यूरोलॉजिस्ट और रोबोटिक कोऑर्डिनेटर Dr Ajay Sharma और उनकी टीम ने। दिल्ली और गुजरात के वापी स्थित अस्पताल के डॉक्टरों ने मिलकर एक ही दिन में चार अलग-अलग सर्जरी को सफल बनाया।

कौन-कौन सी सर्जरी हुईं?

टेलीसर्जरी के जरिए जिन चार मरीजों का ऑपरेशन किया गया, उनमें शामिल हैं—

  • किडनी की जन्मजात बीमारी (पेशाब में रुकावट की समस्या)
  • अपेंडिक्स
  • गॉलब्लैडर
  • हर्निया

चारों ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहे और सभी मरीज स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुके हैं।

क्या आने वाले समय में रोबोट करेंगे सर्जरी?

डॉ. अजय शर्मा के मुताबिक, मेडिकल की दुनिया तेजी से बदल रही है। आने वाले समय में रोबोटिक और टेलीसर्जरी और अधिक एडवांस हो जाएगी। भविष्य में डॉक्टर केवल मरीज की जानकारी सिस्टम में फीड करेंगे और रोबोट खुद ही सर्जरी को अंजाम देंगे। इससे ओपन सर्जरी की जरूरत लगभग खत्म हो सकती है।

क्यों खास है टेलीसर्जरी?

ओपन सर्जरी में जहां बड़ा चीरा लगाना पड़ता है और मरीज को ठीक होने में ज्यादा समय लगता है, वहीं रोबोटिक और टेलीसर्जरी में छोटे चीरे से ऑपरेशन होता है। इससे दर्द कम होता है, रिकवरी तेज होती है और मरीज जल्दी सामान्य जीवन में लौट सकता है।