अमेरिका और इजरायल के रिश्तों में एक बार फिर रणनीतिक गर्माहट दिख रही है। जानकारी के मुताबिक, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हुई एक निजी बातचीत ने पश्चिम एशिया की राजनीति को नए मोड़ पर ला खड़ा किया है।
सूत्रों का दावा है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौता विफल होता है, तो ट्रंप ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल ठिकानों पर इजरायली कार्रवाई के समर्थन को तैयार हैं। इस संभावित परिदृश्य को देखते हुए अमेरिका इजरायल को अतिरिक्त सैन्य सहयोग देने के विकल्पों पर विचार कर रहा है।
अमेरिका की संभावित भूमिका क्या होगी?
अमेरिकी रक्षा और खुफिया एजेंसियों के भीतर इस बात पर मंथन शुरू हो गया है कि किसी भी इजरायली कार्रवाई में अमेरिका किस स्तर तक मदद कर सकता है। चर्चा सीधे हमले से ज्यादा, सहयोगात्मक समर्थन पर केंद्रित है—जैसे:
हालांकि, एक बड़ी चुनौती यह भी है कि किन देशों का हवाई क्षेत्र इस्तेमाल किया जा सकेगा। जॉर्डन, सऊदी अरब और यूएई पहले ही साफ कर चुके हैं कि वे अपने एयरस्पेस से ईरान पर हमले की अनुमति नहीं देंगे।
पश्चिम एशिया में बढ़ी अमेरिकी सैन्य मौजूदगी
तनाव के बीच अमेरिका ने क्षेत्र में अपनी सैन्य तैनाती और मजबूत कर दी है। खबरों के अनुसार, दूसरा अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड भी पश्चिम एशिया की ओर भेजा जा रहा है। ट्रंप ने इसे “सावधानी के तौर पर उठाया गया कदम” बताया है, ताकि बातचीत असफल होने की स्थिति में अमेरिका पूरी तरह तैयार रहे।
नेतन्याहू की सख्त लाइन
नेतन्याहू पहले से ही ईरान के साथ किसी भी समझौते को लेकर कठोर रुख अपनाए हुए हैं। उनका कहना है कि समझौता केवल परमाणु कार्यक्रम तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि:
ईरान का रुख
वहीं ईरान ने संकेत दिए हैं कि वह यूरेनियम संवर्धन के स्तर में कुछ कटौती पर विचार कर सकता है, लेकिन शर्त यह है कि उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएं। फिलहाल किसी ठोस या लिखित समझौते पर सहमति नहीं बन सकी है।
जेनेवा वार्ता पर टिकी निगाहें
अब सबकी नजरें जिनेवा में होने वाली अमेरिका–ईरान बातचीत पर हैं। दूसरे दौर की इस वार्ता में ओमान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर शामिल होंगे। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि प्राथमिकता कूटनीति है, लेकिन सभी विकल्प खुले रखे गए हैं।
ट्रंप–नेतन्याहू की गुप्त बातचीत से मचा भूचाल, ईरान पर सैन्य कार्रवाई के संकेत