उत्तर प्रदेश में संपत्ति खरीद-फरोख्त के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। ताज़ा मामला सुल्तानपुर के पूर्व विधायक और समाजवादी पार्टी से जुड़े नेता अनिल कुमार पांडेय से जुड़ा है, जिनसे लखनऊ में मकान दिलाने के नाम पर 57 लाख रुपये की ठगी कर ली गई। आरोपी ने खुद को प्रॉपर्टी डीलर बताकर मकान दिखाया, एडवांस रकम ले ली और बाद में रजिस्ट्री करने से बचता रहा। जब सच्चाई सामने आई तो मामला पुलिस तक पहुंचा और अब जांच शुरू हो चुकी है।
मिली जानकारी के अनुसार सुल्तानपुर निवासी पूर्व विधायक अनिल कुमार पांडेय पिछले कुछ समय से लखनऊ में रहने के लिए एक मकान खरीदना चाहते थे। इसी दौरान उनके परिचित वरुण कुमार मिश्र ने उनकी मुलाकात अरविंद कुमार मिश्र नाम के व्यक्ति से कराई, जिसने खुद को प्रॉपर्टी का काम करने वाला बताया। आरोपी ने दावा किया कि वह लखनऊ के सीतापुर रोड क्षेत्र में स्थित त्रिवेणी नगर-2 (आलोक नगर) में एक मकान बिक्री के लिए दिला सकता है।
बताया गया कि आरोपी ने पूर्व विधायक को जो मकान दिखाया वह उन्हें पसंद आ गया और दोनों के बीच करीब 60 लाख रुपये में सौदा तय हुआ। शर्त यह रखी गई कि 57 लाख रुपये एडवांस के तौर पर दिए जाएंगे और बाकी 3 लाख रुपये रजिस्ट्री के समय दिए जाएंगे। आरोपी की बातों पर भरोसा करते हुए पूर्व विधायक ने सितंबर 2022 से मार्च 2023 के बीच अलग-अलग किश्तों में कुल 57 लाख रुपये अरविंद कुमार मिश्र और उसकी कथित कंपनी के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए।
रकम मिलने के बाद आरोपी का रवैया बदलने लगा। जब भी रजिस्ट्री की बात की जाती, वह कभी कागज तैयार न होने का बहाना बनाता तो कभी मालिक के बाहर होने की बात कहकर टाल देता। कई महीनों तक इंतजार करने के बाद पूर्व विधायक को शक हुआ और उन्होंने खुद जाकर मकान की जानकारी लेने का फैसला किया।
जब वह मकान पर पहुंचे तो वहां रहने वाले व्यक्ति ने बताया कि यह मकान उसी का है और उसने इसे बेचने के लिए किसी को अधिकृत नहीं किया है। यह सुनकर पूर्व विधायक को धोखाधड़ी का एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने आरोपी से संपर्क किया और पैसे वापस करने का दबाव बनाया।
सूत्रों के अनुसार आरोपी ने शुरुआत में मामला शांत कराने के लिए करीब 27 लाख रुपये वापस कर दिए, लेकिन बाकी की रकम लौटाने से इनकार कर दिया। इतना ही नहीं, बाद में उसने पूर्व विधायक का फोन नंबर भी ब्लॉक कर दिया। इसके बाद मजबूर होकर पूर्व विधायक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तहरीर के आधार पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और बैंक ट्रांजेक्शन, दस्तावेज और आरोपी की गतिविधियों की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने पहले भी किसी और के साथ इस तरह की ठगी की है या नहीं।
उत्तर प्रदेश सहित देश के कई बड़े शहरों में प्रॉपर्टी के नाम पर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अक्सर जालसाज खुद को प्रॉपर्टी डीलर, बिल्डर या मालिक बताकर लोगों को सस्ते या अच्छे मकान का लालच देते हैं और एडवांस रकम लेकर गायब हो जाते हैं। कई मामलों में फर्जी कागजात दिखाकर भी लोगों को ठगा जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि रजिस्ट्री से पहले बड़ी रकम देना सबसे बड़ी गलती होती है। कई लोग बिना पूरी जांच-पड़ताल के पैसे दे देते हैं, जिसका फायदा जालसाज उठाते हैं। यही कारण है कि पुलिस और प्रशासन बार-बार लोगों से सावधानी बरतने की अपील करता रहता है।
इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब एक पूर्व विधायक जैसे अनुभवी व्यक्ति भी ठगी का शिकार हो सकते हैं, तो आम लोगों की सुरक्षा कितनी चुनौतीपूर्ण है। संपत्ति से जुड़े मामलों में धोखाधड़ी का बढ़ना लोगों के भरोसे को कमजोर करता है और रियल एस्टेट बाजार की विश्वसनीयता पर भी असर डालता है।
ऐसे मामलों का असर सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समाज में अविश्वास बढ़ता है। कई लोग घर खरीदने से डरने लगते हैं और वैध कारोबार करने वाले प्रॉपर्टी डीलरों की छवि भी खराब होती है।
पुलिस के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। जांच अधिकारी ने बताया कि बैंक खातों की जानकारी, ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है। यदि आरोपी की भूमिका स्पष्ट होती है तो जल्द ही गिरफ्तारी की जाएगी।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी प्रॉपर्टी का सौदा करने से पहले उसके असली मालिक, कागजात और रजिस्ट्री की स्थिति की पूरी तरह जांच कर लें।
यह मामला सिर्फ एक धोखाधड़ी की घटना नहीं है, बल्कि यह रियल एस्टेट सेक्टर में मौजूद कमजोरियों को भी उजागर करता है। कई बार लोग जल्दबाजी या भरोसे में आकर बिना कानूनी सलाह के पैसे दे देते हैं। दूसरी ओर, फर्जी प्रॉपर्टी डीलरों पर निगरानी की कमी भी ऐसे अपराधों को बढ़ावा देती है।
जरूरी है कि संपत्ति खरीदने से पहले सरकारी रिकॉर्ड, नगर निगम के दस्तावेज, रजिस्ट्री ऑफिस की जानकारी और कानूनी सलाह जरूर ली जाए। डिजिटल भुगतान के दौर में बैंक ट्रांजेक्शन का रिकॉर्ड मददगार होता है, लेकिन उससे पहले सावधानी ज्यादा जरूरी है।
लखनऊ में पूर्व विधायक से हुई 57 लाख रुपये की ठगी का मामला एक गंभीर चेतावनी है। यह घटना बताती है कि संपत्ति खरीदते समय छोटी सी लापरवाही भी बड़ा नुकसान कर सकती है। पुलिस जांच जारी है और उम्मीद की जा रही है कि आरोपी को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। साथ ही यह मामला लोगों को सतर्क रहने और कानूनी प्रक्रिया का पालन करने का संदेश देता है।
1. पूर्व विधायक से कितने रुपये की ठगी हुई?
कुल 57 लाख रुपये की ठगी की गई थी, जिसमें से 27 लाख वापस मिले हैं।
2. ठगी किस बहाने से की गई?
मकान दिलाने और रजिस्ट्री कराने के नाम पर पैसे लिए गए।
3. मामला कहां का है?
यह मामला लखनऊ में मकान खरीद से जुड़ा है, जबकि पीड़ित सुल्तानपुर के हैं।
4. पुलिस ने क्या कार्रवाई की है?
पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर बैंक ट्रांजेक्शन और दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है।
5. ऐसे मामलों से बचने के लिए क्या करें?
कागजात की जांच करें, रजिस्ट्री से पहले पूरी रकम न दें और कानूनी सलाह जरूर लें।
लखनऊ में मकान दिलाने के नाम पर पूर्व विधायक से 57 लाख की ठगी, आरोपी पर केस दर्ज, जांच तेज