एलपीजी सप्लाई दबाव के बीच बड़ा फैसला: 5 लाख इंडक्शन चूल्हों की खरीद की तैयारी, इलेक्ट्रिक कुकिंग को मिलेगा बढ़ावा

एलपीजी सप्लाई दबाव के बीच बड़ा फैसला: 5 लाख इंडक्शन चूल्हों की खरीद की तैयारी, इलेक्ट्रिक कुकिंग को मिलेगा बढ़ावा
March 27, 2026 at 11:54 am

देश में एलपीजी गैस सप्लाई पर बढ़ते दबाव और अंतरराष्ट्रीय हालात के असर के बीच अब खाना पकाने के तरीकों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सार्वजनिक क्षेत्र की ऊर्जा दक्षता सेवाएं लिमिटेड (EESL) ने इलेक्ट्रिक कुकिंग को बढ़ावा देने के लिए 5 लाख इंडक्शन चूल्हों की खरीद की योजना बनाई है। इस कदम का मकसद गैस पर निर्भरता कम करना, कीमतों को नियंत्रित रखना और वैकल्पिक ऊर्जा आधारित कुकिंग सिस्टम को बढ़ावा देना है। सरकार की “गो-इलेक्ट्रिक” नीति के तहत यह फैसला आने वाले समय में बड़े बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (EESL) जल्द ही दो चरणों में करीब पांच लाख इंडक्शन चूल्हों की खरीद के लिए नई निविदा जारी करने की तैयारी कर रही है। इससे पहले कंपनी एक लाख इंडक्शन चूल्हों की खरीद के लिए टेंडर जारी कर चुकी है और शुरुआती मांग उम्मीद से ज्यादा मिलने के बाद अब ऑर्डर बढ़ाने की योजना बनाई गई है।

बताया जा रहा है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री मार्गों में बाधा की वजह से एलपीजी की सप्लाई पर दबाव बढ़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के कारण सरकार वैकल्पिक कुकिंग व्यवस्था पर तेजी से काम कर रही है।

इंडक्शन चूल्हों की मांग बढ़ने के साथ-साथ उनके लिए इस्तेमाल होने वाले विशेष बर्तनों की मांग भी बढ़ गई है। इसी वजह से ईईएसएल ने इंडक्शन के साथ-साथ कुकवेयर खरीदने के लिए भी अलग निविदा जारी करने का फैसला किया है।

कंपनी का कहना है कि बाजार में बढ़ती मांग के कारण कीमतों में तेजी आ सकती है, इसलिए बड़े पैमाने पर खरीद करके कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश की जा रही है।

भारत सरकार ने नवंबर 2023 में राष्ट्रीय इलेक्ट्रिक कुकिंग कार्यक्रम (National Electric Cooking Program – NECP) शुरू किया था। इस कार्यक्रम का उद्देश्य घरों में एलपीजी, कोयला और लकड़ी जैसे पारंपरिक ईंधन की जगह बिजली आधारित खाना पकाने की तकनीक को बढ़ावा देना है।

यह कार्यक्रम “गो-इलेक्ट्रिक” अभियान का हिस्सा है, जिसका मकसद ऊर्जा की बचत, प्रदूषण में कमी और आयातित ईंधन पर निर्भरता घटाना है।

भारत दुनिया के सबसे बड़े एलपीजी आयात करने वाले देशों में से एक है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत बढ़ने या सप्लाई प्रभावित होने का सीधा असर देश के उपभोक्ताओं पर पड़ता है। इसी वजह से सरकार लंबे समय से वैकल्पिक कुकिंग सिस्टम को बढ़ावा देने की योजना बना रही है।

EESL इससे पहले उजाला योजना के तहत एलईडी बल्ब और ग्राम उजाला कार्यक्रम के तहत ऊर्जा बचत उपकरणों की सफल आपूर्ति कर चुकी है। अब उसी मॉडल को कुकिंग सेक्टर में लागू किया जा रहा है।

इंडक्शन चूल्हों की बड़े स्तर पर खरीद का असर कई क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है।

सबसे बड़ा असर आम लोगों पर पड़ेगा, क्योंकि गैस सिलेंडर की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ता है। अगर इलेक्ट्रिक कुकिंग सस्ती और आसान होती है तो लोगों को राहत मिल सकती है।

दूसरा असर बाजार पर पड़ेगा। इंडक्शन चूल्हों और उससे जुड़े बर्तनों की मांग बढ़ने से घरेलू उपकरण उद्योग को बड़ा फायदा हो सकता है। इससे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।

तीसरा असर पर्यावरण पर होगा। इलेक्ट्रिक कुकिंग से धुआं और कार्बन उत्सर्जन कम होता है, जिससे प्रदूषण घटाने में मदद मिल सकती है।

चौथा असर बिजली की मांग पर पड़ेगा। अगर बड़ी संख्या में लोग इंडक्शन चूल्हे अपनाते हैं तो बिजली की खपत बढ़ेगी, जिसके लिए बिजली उत्पादन और वितरण व्यवस्था को मजबूत करना होगा।

ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि सरकार का लक्ष्य देश में स्वच्छ और किफायती कुकिंग सिस्टम को बढ़ावा देना है।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बढ़ती मांग को देखते हुए बड़े पैमाने पर इंडक्शन चूल्हों की खरीद जरूरी हो गई है। इससे न सिर्फ कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिलेगी बल्कि लोगों को गैस के विकल्प भी मिलेंगे।

अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रीय इलेक्ट्रिक कुकिंग कार्यक्रम को राज्यों से भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है और कई राज्य सरकारें इसे अपने स्तर पर लागू करने में रुचि दिखा रही हैं।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला सिर्फ एलपीजी की कमी से निपटने के लिए नहीं बल्कि लंबे समय की ऊर्जा नीति का हिस्सा है।

भारत हर साल बड़ी मात्रा में गैस और तेल आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा पर दबाव पड़ता है। अगर कुकिंग में बिजली का इस्तेमाल बढ़ता है तो आयात पर निर्भरता कम हो सकती है।

हालांकि इसके सामने कुछ चुनौतियां भी हैं।
ग्रामीण इलाकों में बिजली की उपलब्धता अभी भी समान नहीं है।
इंडक्शन चूल्हे के लिए खास बर्तन चाहिए होते हैं, जिससे शुरुआती खर्च बढ़ जाता है।
बिजली महंगी होने पर फायदा कम हो सकता है।

फिर भी विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर सरकार सब्सिडी और योजनाओं के जरिए इसे बढ़ावा देती है तो आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक कुकिंग आम हो सकती है।

एलपीजी सप्लाई पर बढ़ते दबाव के बीच 5 लाख इंडक्शन चूल्हों की खरीद का फैसला भारत की ऊर्जा नीति में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। इससे न सिर्फ गैस पर निर्भरता कम होगी बल्कि स्वच्छ और आधुनिक कुकिंग सिस्टम को बढ़ावा मिलेगा।

अगर सरकार और राज्य मिलकर इस योजना को सही तरीके से लागू करते हैं तो आने वाले समय में देश में कुकिंग का तरीका बदल सकता है और लोगों को सस्ती व सुरक्षित सुविधा मिल सकती है।

1. सरकार 5 लाख इंडक्शन चूल्हे क्यों खरीद रही है?
एलपीजी सप्लाई पर दबाव और बढ़ती कीमतों को देखते हुए इलेक्ट्रिक कुकिंग को बढ़ावा देने के लिए।

2. इंडक्शन चूल्हे किस योजना के तहत खरीदे जा रहे हैं?
राष्ट्रीय इलेक्ट्रिक कुकिंग कार्यक्रम (NECP) और गो-इलेक्ट्रिक अभियान के तहत।

3. क्या इससे गैस सिलेंडर की जरूरत खत्म हो जाएगी?
नहीं, लेकिन गैस पर निर्भरता कम हो सकती है।

4. क्या आम लोगों को सस्ते में इंडक्शन मिलेंगे?
सरकारी खरीद के बाद सब्सिडी या कम कीमत पर उपलब्ध कराने की संभावना रहती है।

5. क्या इंडक्शन चूल्हे पर्यावरण के लिए बेहतर हैं?
हाँ, क्योंकि इससे धुआं और कार्बन उत्सर्जन कम होता है।