23 साल की देरी के बाद तैयार हुआ जेवर एयरपोर्ट, पीएम मोदी ने बताई पूरी कहानी

23 साल की देरी के बाद तैयार हुआ जेवर एयरपोर्ट, पीएम मोदी ने बताई पूरी कहानी
March 28, 2026 at 6:17 pm

उत्तर प्रदेश के जेवर में बने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन शनिवार को प्रधानमंत्री Narendra Modi ने किया। इस मौके पर उन्होंने न केवल इस महत्वाकांक्षी परियोजना की अहमियत बताई, बल्कि इसके 23 साल तक अटके रहने के पीछे की राजनीतिक और प्रशासनिक वजहों पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने अपने संबोधन में अंधविश्वास, राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी और नीतिगत देरी को इसका मुख्य कारण बताया।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में कहा कि जेवर एयरपोर्ट का विचार पहली बार वर्ष 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के दौरान सामने आया था। उस समय इस परियोजना को मंजूरी भी मिल गई थी, लेकिन इसके बाद यह योजना लंबे समय तक फाइलों में ही सीमित रह गई।

उन्होंने आरोप लगाया कि 2004 से 2014 के बीच केंद्र में रही कांग्रेस सरकार के दौरान इस प्रोजेक्ट पर कोई ठोस काम नहीं हुआ। वहीं राज्य स्तर पर भी शुरुआती वर्षों में समाजवादी पार्टी की सरकार ने इसे प्राथमिकता नहीं दी। पीएम मोदी के अनुसार, राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी और समन्वय के अभाव ने इस परियोजना को वर्षों तक रोक कर रखा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर एनडीए सरकार आई, तब जाकर इस परियोजना को गति मिली। भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंजूरी और वित्तीय व्यवस्था जैसे जटिल मुद्दों को तेजी से सुलझाया गया, जिससे निर्माण कार्य समय पर पूरा हो सका।

उन्होंने यह भी बताया कि यह एयरपोर्ट केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विकास का नया केंद्र बनेगा। इससे आगरा, मथुरा, अलीगढ़, मेरठ, गाजियाबाद, बुलंदशहर और फरीदाबाद जैसे शहरों को सीधा लाभ मिलेगा।

जेवर एयरपोर्ट परियोजना देश के सबसे बड़े एविएशन प्रोजेक्ट्स में से एक मानी जा रही है। इसे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नाम से विकसित किया गया है और यह दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के बढ़ते हवाई यातायात को संभालने के लिए तैयार किया गया है।

पिछले दो दशकों में दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा अपनी क्षमता के करीब पहुंच चुका था। ऐसे में एक वैकल्पिक और आधुनिक एयरपोर्ट की जरूरत महसूस की जा रही थी। जेवर का स्थान रणनीतिक रूप से इसलिए चुना गया क्योंकि यह दिल्ली, यूपी और हरियाणा के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाता है।

हालांकि, इस परियोजना को जमीन पर उतरने में कई बाधाओं का सामना करना पड़ा, जिनमें भूमि अधिग्रहण विवाद, पर्यावरणीय मंजूरी और राजनीतिक असहमति प्रमुख थे।

जेवर एयरपोर्ट का प्रभाव केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर डालेगा।

सबसे पहले, यह एयरपोर्ट क्षेत्र में रोजगार के बड़े अवसर पैदा करेगा। निर्माण और संचालन के दौरान लाखों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। इसके अलावा, आसपास के क्षेत्रों में रियल एस्टेट, होटल, लॉजिस्टिक्स और इंडस्ट्रीज का तेजी से विकास होगा।

दूसरा बड़ा प्रभाव कनेक्टिविटी पर पड़ेगा। इससे दिल्ली-एनसीआर का ट्रैफिक दबाव कम होगा और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए अतिरिक्त सुविधा मिलेगी।

तीसरा, यह परियोजना भारत की वैश्विक छवि को मजबूत करेगी। एक आधुनिक और अत्याधुनिक एयरपोर्ट के रूप में यह विदेशी निवेशकों को आकर्षित करेगा और भारत को एक लॉजिस्टिक्स हब बनाने में मदद करेगा।

प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अपने संबोधन में कहा,
“यह एयरपोर्ट केवल ईंट और सीमेंट का ढांचा नहीं है, बल्कि यह नए भारत की आकांक्षाओं का प्रतीक है। जिन किसानों ने अपनी जमीन दी, उनके सहयोग से ही यह सपना साकार हो पाया है।”

उन्होंने आगे कहा कि अब वही क्षेत्र, जिसे कभी नजरअंदाज किया गया, आज वैश्विक स्तर पर भारत की पहचान बनाने के लिए तैयार है।

यदि इस परियोजना के इतिहास को देखा जाए, तो यह स्पष्ट होता है कि भारत में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स अक्सर राजनीतिक बदलावों और नीतिगत देरी के कारण प्रभावित होते हैं।

जेवर एयरपोर्ट इसका एक प्रमुख उदाहरण है, जहां एक मंजूर परियोजना को जमीन पर उतरने में दो दशक से अधिक का समय लग गया। यह स्थिति बताती है कि केवल योजना बनाना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उसे लागू करने के लिए निरंतर राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रशासनिक दक्षता भी जरूरी होती है।

वर्तमान सरकार ने इस परियोजना को प्राथमिकता देकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि बड़े प्रोजेक्ट्स को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सकता है।

हालांकि, आलोचकों का मानना है कि इस तरह की परियोजनाओं में देरी के पीछे केवल एक पक्ष जिम्मेदार नहीं होता, बल्कि कई स्तरों पर जटिलताएं होती हैं।

जेवर एयरपोर्ट का निर्माण भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। 23 साल की लंबी प्रतीक्षा के बाद यह परियोजना अब वास्तविकता बन चुकी है।

यह केवल एक एयरपोर्ट नहीं, बल्कि क्षेत्रीय विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक प्रगति का एक नया केंद्र बनने जा रहा है। आने वाले वर्षों में इसका प्रभाव और अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देगा, जब यह पूरी क्षमता से संचालन शुरू करेगा।

1. जेवर एयरपोर्ट को बनने में 23 साल क्यों लगे?
राजनीतिक बदलाव, नीतिगत देरी, भूमि अधिग्रहण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण यह परियोजना लंबे समय तक अटकी रही।

2. जेवर एयरपोर्ट का सबसे बड़ा फायदा क्या होगा?
यह दिल्ली-एनसीआर के एयर ट्रैफिक को कम करेगा और क्षेत्र में रोजगार व विकास को बढ़ावा देगा।

3. इस एयरपोर्ट से किन शहरों को लाभ मिलेगा?
आगरा, मेरठ, अलीगढ़, गाजियाबाद, बुलंदशहर और फरीदाबाद सहित पूरे पश्चिमी यूपी को फायदा होगा।

4. क्या यह एयरपोर्ट अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए तैयार है?
हाँ, इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानकों के अनुसार विकसित किया गया है।

5. किसानों की क्या भूमिका रही?
किसानों ने अपनी जमीन देकर इस परियोजना को संभव बनाया, जिसके लिए सरकार ने उनका आभार जताया है।