चीन में ‘बोन ऐश अपार्टमेंट’ पर रोक: महंगे अंतिम संस्कार ने बदली परंपराएं, सरकार सख्त

चीन में ‘बोन ऐश अपार्टमेंट’ पर रोक: महंगे अंतिम संस्कार ने बदली परंपराएं, सरकार सख्त
April 1, 2026 at 11:41 am

चीन में बढ़ती महंगाई और अंतिम संस्कार की आसमान छूती लागत ने एक अजीब और चिंताजनक ट्रेंड को जन्म दिया है। लोग पारंपरिक कब्रिस्तानों की जगह खाली पड़े फ्लैट्स में अपने प्रियजनों की राख और अवशेष रखने लगे थे। इन फ्लैट्स को ‘बोन ऐश अपार्टमेंट’ कहा जाने लगा। अब इस चलन पर सरकार ने सख्ती दिखाते हुए रिहायशी इलाकों में मानव अवशेष रखने पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह फैसला न सिर्फ सामाजिक बल्कि आर्थिक और मनोवैज्ञानिक बहस का विषय बन गया है।

चीन के कई शहरों और कस्बों में पिछले कुछ वर्षों से एक असामान्य प्रथा सामने आई है, जहां लोग अपने मृत परिजनों की राख को घरों में रखने के बजाय खाली फ्लैट्स में सुरक्षित रखने लगे। यह फ्लैट्स आमतौर पर शहरों से दूर या कम कीमत वाले क्षेत्रों में स्थित होते हैं।

इन अपार्टमेंट्स के बारे में बताया जाता है कि इनमें खिड़कियां हमेशा बंद रहती हैं, पर्दे नहीं हटते और अंदर अक्सर मोमबत्तियां जलाई जाती हैं। कई जगहों पर दीवारों पर मृतकों की तस्वीरें लगी होती हैं और उनके सामने राख के कलश रखे जाते हैं। पड़ोसियों के लिए यह दृश्य डरावना और असहज करने वाला साबित हुआ है।

इस बढ़ते चलन को देखते हुए चीन सरकार ने सोमवार से नए नियम लागू कर दिए हैं, जिनके तहत अब किसी भी रिहायशी इलाके में मानव अवशेष रखना गैरकानूनी होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अंतिम संस्कार और राख को रखने के लिए केवल निर्धारित कब्रिस्तानों या अधिकृत स्थानों का ही उपयोग किया जा सकता है।

चीन में अंतिम संस्कार का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। एक अनुमान के अनुसार, वर्ष 2020 में अंतिम संस्कार की औसत लागत वहां के लोगों की वार्षिक आय का लगभग आधा हिस्सा थी। इसमें कब्र की जगह, अंतिम संस्कार की रस्में और अन्य सेवाएं शामिल होती हैं।

दूसरी ओर, चीन का रियल एस्टेट सेक्टर पिछले कुछ वर्षों में गंभीर संकट से गुजर रहा है। कई बड़ी कंपनियां कर्ज में डूबी हैं और हजारों फ्लैट्स खाली पड़े हैं। इन फ्लैट्स की कीमतों में भारी गिरावट आई है, जिससे वे आम लोगों के लिए सस्ते विकल्प बन गए।

लोगों ने इस स्थिति का फायदा उठाते हुए सोचा कि महंगे कब्रिस्तान में जगह लेने के बजाय सस्ता फ्लैट खरीदकर उसमें राख रखना ज्यादा व्यावहारिक है। इस तरह ‘मौत के अपार्टमेंट’ का ट्रेंड तेजी से फैलने लगा।

इस प्रथा का समाज पर कई तरह का प्रभाव पड़ा है। सबसे पहले, यह पड़ोसियों के लिए मानसिक तनाव का कारण बन गया। कई लोगों ने शिकायत की कि ऐसे फ्लैट्स के पास रहना उन्हें असहज और भयभीत करता है।

दूसरा, इससे हाउसिंग मार्केट में भी असंतुलन पैदा हुआ। जिन फ्लैट्स का उपयोग रहने के लिए होना चाहिए था, वे ‘अस्थायी कब्रिस्तान’ बन गए। इससे स्थानीय प्रशासन और रियल एस्टेट सेक्टर दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

भारत के संदर्भ में देखें तो यहां भी बड़े शहरों में अंतिम संस्कार की लागत बढ़ रही है, लेकिन सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराएं अभी भी लोगों को ऐसे विकल्प अपनाने से रोकती हैं। हालांकि, भविष्य में आर्थिक दबाव बढ़ने पर इस तरह की प्रवृत्तियों पर चर्चा हो सकती है।

चीन की सरकार ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि “रिहायशी परिसरों का उपयोग मानव अवशेष रखने के लिए नहीं किया जा सकता। यह सार्वजनिक व्यवस्था और सामाजिक संतुलन के खिलाफ है।”

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी नागरिकों को निर्धारित कब्रिस्तानों और अधिकृत स्थानों का ही उपयोग करना होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

यह मामला केवल एक अजीब ट्रेंड नहीं बल्कि चीन की आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का संकेत है। एक ओर महंगाई और आय में असमानता है, तो दूसरी ओर रियल एस्टेट संकट ने लोगों को नए विकल्प तलाशने पर मजबूर कर दिया है।

यह घटना यह भी दिखाती है कि जब बुनियादी सेवाएं जैसे अंतिम संस्कार भी महंगे हो जाते हैं, तो लोग पारंपरिक व्यवस्था से हटकर वैकल्पिक रास्ते अपनाने लगते हैं।

सरकार का प्रतिबंध सामाजिक दृष्टि से जरूरी हो सकता है, लेकिन इससे उन परिवारों की समस्या भी बढ़ सकती है जो आर्थिक कारणों से ऐसा कर रहे थे। इसलिए केवल प्रतिबंध लगाने के बजाय सस्ती और पारदर्शी अंतिम संस्कार सेवाएं उपलब्ध कराना अधिक प्रभावी समाधान हो सकता है।

चीन में ‘बोन ऐश अपार्टमेंट’ का चलन एक असामान्य लेकिन गंभीर सामाजिक-आर्थिक समस्या को उजागर करता है। सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंध से इस प्रथा पर रोक लग सकती है, लेकिन असली चुनौती लोगों को सस्ती और सम्मानजनक अंतिम संस्कार सुविधाएं उपलब्ध कराने की है।

यह घटना अन्य देशों के लिए भी एक चेतावनी है कि यदि बुनियादी सेवाएं महंगी होती गईं, तो समाज में इस तरह के अप्रत्याशित बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

1. बोन ऐश अपार्टमेंट क्या होते हैं?
ये ऐसे फ्लैट्स होते हैं जहां लोग अपने मृत परिजनों की राख और अवशेष रखते हैं।

2. चीन में यह ट्रेंड क्यों बढ़ा?
मुख्य कारण अंतिम संस्कार की बढ़ती लागत और सस्ते फ्लैट्स की उपलब्धता है।

3. सरकार ने इस पर प्रतिबंध क्यों लगाया?
सार्वजनिक व्यवस्था और सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया।

4. क्या भारत में भी ऐसा हो सकता है?
फिलहाल भारत में सांस्कृतिक परंपराएं इसे रोकती हैं, लेकिन आर्थिक दबाव बढ़ने पर चर्चा हो सकती है।

5. इस समस्या का समाधान क्या है?
सस्ती और पारदर्शी अंतिम संस्कार सेवाएं उपलब्ध कराना सबसे बेहतर समाधान है।