3 मार्च को दिखेगा साल का पहला चंद्र ग्रहण, पटना-गया-भागलपुर में दिखेगा अम्ब्रल फेज का अंत, जानें कब शुरू होगा सूतक काल

3 मार्च को दिखेगा साल का पहला चंद्र ग्रहण, पटना-गया-भागलपुर में दिखेगा अम्ब्रल फेज का अंत, जानें कब शुरू होगा सूतक काल
March 1, 2026 at 1:00 pm

साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च (मंगलवार) को लगने जा रहा है। होली से ठीक पहले होने वाला यह खगोलीय घटनाक्रम भारत समेत दुनिया के कई हिस्सों में दिखाई देगा। भारत के अधिकांश क्षेत्रों में लोग इसे देख सकेंगे, हालांकि पश्चिमी भारत के कुछ हिस्सों में दृश्यता कम रह सकती है।

यह चंद्र ग्रहण पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर क्षेत्र और अमेरिका के कई इलाकों में भी नजर आएगा।

क्या रहेगी ग्रहण की टाइमिंग?

भारतीय समयानुसार चंद्र ग्रहण की शुरुआत दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर होगी और इसका समापन शाम 6 बजकर 48 मिनट पर होगा।

ग्रहण का पूर्ण चरण शाम 4 बजकर 34 मिनट से 5 बजकर 33 मिनट तक रहेगा।

भारत के ज्यादातर हिस्सों में चंद्रमा के उदय के समय ग्रहण का अंतिम भाग देखा जा सकेगा। वहीं उत्तर-पूर्वी राज्यों और अंडमान-निकोबार के कुछ क्षेत्रों में पूर्ण चरण का समापन भी दिखाई दे सकता है।

चंद्रग्रहण का सूतक काल

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण से 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है।

इस बार सूतक सुबह 6 बजकर 20 मिनट से प्रभावी हो जाएगा। सूतक काल के दौरान पूजा-पाठ, मंदिर प्रवेश और शुभ कार्यों से परहेज करने की परंपरा मानी जाती है। हालांकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सूतक का कोई खगोलीय प्रभाव नहीं माना जाता, यह पूरी तरह धार्मिक आस्था से जुड़ा विषय है।

बिहार में कहां और कितना दिखेगा ग्रहण?

बिहार में यह चंद्र ग्रहण पूरी तरह से दिखाई नहीं देगा, बल्कि आंशिक रूप से नजर आएगा।

पटना स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार राज्य के अधिकांश जिलों में ग्रहण का केवल अंतिम हिस्सा दिखाई देगा।

  • पटना में अम्ब्रल फेज का अंत लगभग 57 मिनट तक दिखेगा।
  • भागलपुर में यह अवधि करीब 1 घंटा 4 मिनट रहेगी।
  • गया में अम्ब्रल फेज का अंत लगभग 56 मिनट तक नजर आएगा।

मौसम विज्ञान केंद्र, पटना के निदेशक आशीष कुमार ने जानकारी दी है कि इन शहरों में चंद्रमा पृथ्वी की गहरी छाया से बाहर निकलता हुआ दिखाई देगा।

क्या होता है अम्ब्रलफेज का अंत?

चंद्र ग्रहण के दौरान पृथ्वी की दो तरह की छाया बनती है — उपछाया (पेनुम्ब्रा) और गहरी छाया (अम्ब्रा)।

अम्ब्रल फेज वह चरण होता है जब चंद्रमा पृथ्वी की गहरी छाया में प्रवेश करता है और सबसे स्पष्ट रूप से ग्रहण दिखाई देता है।

अम्ब्रलफेज का अंत वह समय होता है जब चंद्रमा पृथ्वी की गहरी छाया से पूरी तरह बाहर निकल जाता है और उसकी सामान्य चमक धीरे-धीरे लौटने लगती है।

बिहार के पटना, भागलपुर और गया में यही अंतिम चरण देखा जा सकेगा।

क्या होता है चंद्र ग्रहण?

चंद्र ग्रहण हमेशा पूर्णिमा के दिन होता है। इस दौरान पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा एक सीधी रेखा में आ जाते हैं और पृथ्वी सूर्य की रोशनी को चंद्रमा तक पहुंचने से रोक देती है।

  • पूर्ण चंद्र ग्रहण तब होता है जब पूरा चंद्रमा पृथ्वी की छाया से ढक जाता है।
  • आंशिक चंद्र ग्रहण में चंद्रमा का केवल एक हिस्सा ही छाया में आता है।

अगला चंद्रग्रहण कब?

भारत में दिखाई देने वाला अगला चंद्र ग्रहण 6 जुलाई 2028 को होगा, जो आंशिक चंद्र ग्रहण होगा।

वहीं इससे पहले भारत में 7-8 सितंबर 2025 को पूर्ण चंद्र ग्रहण देखा गया था।