मकर संक्रांति पर सूर्य देव की पूजा कैसे करें? जानिए पूजा सामग्री, विधि और शुभ मंत्र

मकर संक्रांति पर सूर्य देव की पूजा कैसे करें? जानिए पूजा सामग्री, विधि और शुभ मंत्र
January 13, 2026 at 4:16 pm

मकर संक्रांति का पर्व इस वर्ष 15 जनवरी को मनाया जाएगा। इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन स्नान और सूर्योपासना करने से न केवल पापों का नाश होता है, बल्कि जीवन में सुख, स्वास्थ्य और सफलता भी प्राप्त होती है।

ज्योतिषाचार्य के अनुसार, मकर संक्रांति पर विशेष योग बन रहा है। इस दिन माघ मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि, वृद्धि योग और ज्येष्ठा नक्षत्र रहेगा। साथ ही सूर्य मकर राशि में और चंद्रमा वृश्चिक राशि में स्थित रहेंगे। पुण्यकाल सूर्योदय से प्रारंभ होगा, इसलिए प्रातः स्नान और पूजा करना विशेष फलदायी माना गया है।

दिल्ली में इस दिन सूर्योदय का समय सुबह 7 बजकर 15 मिनट बताया गया है। इस समय से सूर्य देव को अर्घ्य देकर पूजा प्रारंभ की जा सकती है।

सूर्य देव की पूजा सामग्री

सूर्य पूजा के लिए निम्न वस्तुओं की आवश्यकता होती है—

  • काला तिल तिल के लड्डू: सूर्य और शनि दोनों को प्रिय माने जाते हैं।
  • गुड़: सूर्य को मजबूत करने के लिए गुड़ का दान श्रेष्ठ माना गया है।
  • गाय का घी: दीपक जलाने हेतु उपयोग किया जाता है।
  • सप्तधान्य: तिल, जौ, गेहूं, चना, मूंग, चावल और ज्वार/बाजरा।
  • तांबे का लोटा: अर्घ्य देने के लिए आवश्यक।
  • लाल फूल और लाल चंदन: सूर्य देव को अर्पण के लिए।
  • दीपक, धूप, कपूर और गंध।
  • सूर्य चालीसा एवं आदित्य हृदय स्तोत्र की पुस्तक।


मकर संक्रांति के विशेष मंत्र

अर्घ्य मंत्र:
“ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते।
अनुकम्पय मां भक्त्या गृहाणार्घ्य दिवाकरः॥”


बीज मंत्र:
“ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः”


सूर्य देव की पूजा विधि

  1. मकर संक्रांति के दिन ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के समय स्नान करें। नदी में संभव न हो तो घर पर ही पवित्र जल से स्नान करें।
  2. स्वच्छ वस्त्र धारण कर तांबे के लोटे में जल भरें और उसमें लाल चंदन, गुड़ व लाल पुष्प डालें।
  3. पूर्व दिशा की ओर मुख करके सूर्य मंत्र का जाप करते हुए सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें।
  4. इसके बाद गायत्री मंत्र का जाप करें।
  5. आसन पर बैठकर सूर्य चालीसा और संभव हो तो आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें।
  6. अंत में सूर्य देव की आरती करें और क्षमा प्रार्थना करते हुए मनोकामना पूर्ण होने की कामना करें।


पूजा का फल

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति पर सूर्य देव की पूजा करने से कुंडली में सूर्य दोष शांत होता है, स्वास्थ्य बेहतर रहता है, धन-धान्य में वृद्धि होती है और करियर में उन्नति के योग बनते हैं।