एम्स दिल्ली का नया रिकॉर्ड: एक साल में 10,000+ बड़ी सर्जरी, रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट से रचा इतिहास

एम्स दिल्ली का नया रिकॉर्ड: एक साल में 10,000+ बड़ी सर्जरी, रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट से रचा इतिहास
February 11, 2026 at 2:23 pm

देश के प्रमुख सरकारी अस्पताल अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) नई दिल्ली ने एक बार फिर अपनी क्षमता साबित की है। संस्थान के सर्जरी विभाग ने साल 2025 में 10,000 से अधिक बड़ी सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी कर नया रिकॉर्ड बनाया है। यह उपलब्धि न सिर्फ संख्या के लिहाज से अहम है, बल्कि इसलिए भी खास है क्योंकि ये सर्जरी अत्याधुनिक तकनीक, उच्च सुरक्षा मानकों और किफायती सरकारी व्यवस्था के तहत की गईं।

एम्स दिल्ली दुनियाभर के टॉप 10 अस्पतालों में छठे स्थान पर पहले ही जगह बना चुका है, और अब यह उपलब्धि उसे वैश्विक स्तर पर और मजबूत बनाती है।

सर्जरी ब्लॉक का विस्तार और आधुनिक ढांचा

एम्स का सर्जरी ब्लॉक 2021 में शुरू हुआ था। शुरुआत में यहां सिर्फ 5 ऑपरेशन थिएटर थे, जो अब बढ़कर 8 पूरी तरह कार्यरत ओटी हो चुके हैं।

इनमें शामिल हैं:

  • एक अत्याधुनिक रोबोटिक सर्जरी यूनिट
  • एक अलग इमरजेंसी ऑपरेशन थिएटर

इस मजबूत ढांचे की वजह से बड़ी संख्या में मरीजों का इलाज सुरक्षित तरीके से और बेहतर नतीजों के साथ संभव हो पाया है।

एक ही विभाग में इतनी तरह की सर्जरी

एम्स दिल्ली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां एक ही सर्जरी ब्लॉक में कई तरह की जटिल सर्जरी की जाती हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • जनरल सर्जरी
  • पेट और आंतों की सर्जरी
  • हार्मोन (एंडोक्राइन) सर्जरी
  • छाती (थोरेसिक) सर्जरी
  • कोलोन और रेक्टम सर्जरी
  • मोटापा कम करने की सर्जरी
  • नसों से जुड़ी सर्जरी
  • स्तन सर्जरी
  • जटिल अंग प्रत्यारोपण (ट्रांसप्लांट)

इन सभी सर्जरी को ओपन सर्जरी, लैप्रोस्कोपिक, मिनिमली इनवेसिव और रोबोटिक तकनीक से किया जाता है।

भारत में पहली बार: रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट

साल 2025 की सबसे बड़ी उपलब्धि रही रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी की शुरुआत। इसके साथ ही एम्स दिल्ली देश का पहला सरकारी अस्पताल बन गया, जहां यह अत्याधुनिक सुविधा उपलब्ध है।
इससे यह साफ हुआ है कि अब उन्नत और महंगा माना जाने वाला इलाज भी सरकारी अस्पतालों में आम लोगों तक पहुंच रहा है।

ट्रांसप्लांट सर्जरी में एम्स की ऐतिहासिक भूमिका

एम्स को भारत में ट्रांसप्लांट सर्जरी की नींव रखने वाला संस्थान माना जाता है। पिछले कई दशकों से यहां के डॉक्टरों ने देशभर के सरकारी अस्पतालों में ट्रांसप्लांट कार्यक्रम शुरू कराने में अहम भूमिका निभाई है।
आज भी एम्स का ट्रांसप्लांट प्रोग्राम देश के सबसे सक्रिय और प्रभावशाली कार्यक्रमों में गिना जाता है।

इलाज के साथ मेडिकल शिक्षा का केंद्र

एम्स का सर्जरी विभाग केवल इलाज तक सीमित नहीं है। यह संस्थान का सबसे बड़ा सर्जिकल शिक्षण विभाग भी है, जहां हर साल:

  • एमबीबीएस
  • पोस्टग्रेजुएट
  • सुपर-स्पेशियलिटी डॉक्टरों

को उन्नत सर्जिकल ट्रेनिंग दी जाती है। यहां विकसित किया गया ज्ञान पूरे संस्थान में साझा होता है, जिससे इलाज की गुणवत्ता लगातार बेहतर होती रहती है।

मृत्यु दर में यूरोप-अमेरिका के बराबर आंकड़े

सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर सुनील चंबर के अनुसार:

  • नियोजित (प्लांड) बड़ी सर्जरी में मृत्यु दर सिर्फ 0.3% रही
  • आपातकालीन सर्जरी में यह दर 7.89% दर्ज की गई

ये आंकड़े यूरोप और उत्तर अमेरिका के बड़े अस्पतालों के स्तर के माने जाते हैं, जो यह साबित करते हैं कि भारत की सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं भी अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतर सकती हैं।

निष्कर्ष

एक साल में 10,000 से ज्यादा बड़ी सर्जरी केवल एक रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि यह उदाहरण है कि सही नीति, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और कुशल डॉक्टर मिलकर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था को कितनी प्रभावशाली बना सकते हैं।