भारत को मिलेगा ‘लौह कवच’: इजरायल के आयरन डोम और लेजर तकनीक से मजबूत होगा सुदर्शन चक्र रक्षा कवच

भारत को मिलेगा ‘लौह कवच’: इजरायल के आयरन डोम और लेजर तकनीक से मजबूत होगा सुदर्शन चक्र रक्षा कवच
February 26, 2026 at 2:45 pm

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल दौरे के दौरान भारत और इजरायल के बीच एक अहम रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। यह डील सिर्फ हथियार खरीद तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अत्याधुनिक रक्षा तकनीक के ट्रांसफर पर केंद्रित होगी। भारत का लक्ष्य है कि वह इजरायल की उन्नत प्रणालियों को देश में ही तैयार कर ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को गति दे।

तेल अवीव पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने इजरायली संसद को संबोधित करते हुए भरोसेमंद साझेदारों के बीच मजबूत रक्षा सहयोग की जरूरत पर जोर दिया। वैश्विक अस्थिरता के माहौल में भारत अपनी सुरक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाइयों पर ले जाना चाहता है।

दो हिस्सों में हो सकता है समझौता

सूत्रों के मुताबिक संभावित रक्षा समझौता दो प्रमुख हिस्सों में बंटा हो सकता है—

  1. रक्षा प्रणालियों में तकनीकी सहयोग
  2. आक्रामक हथियार प्रणालियों के संयुक्त विकास में साझेदारी

भारत की नजर इजरायल की मल्टी-लेयर एयर डिफेंस तकनीक पर है, जिसे भविष्य में प्रस्तावित ‘सुदर्शन चक्र’ रक्षा कवच में शामिल किया जा सकता है।

किन प्रणालियों पर हो सकती है चर्चा?

रक्षा क्षेत्र की प्रमुख इजरायली कंपनियों की उन्नत प्रणालियों पर विचार हो सकता है, जिनमें शामिल हैं—

  • आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम
  • डेविड्स स्लिंग मिसाइल सिस्टम
  • एरो मिसाइल डिफेंस सिस्टम
  • आयरन बीम लेजर सिस्टम
  • SPICE-1000 गाइडेंस किट
  • रैम्पेज एयर-टू-ग्राउंड मिसाइल
  • LORA सुपरसोनिक मिसाइल
  • आइस ब्रेकर नौसैनिक क्रूज मिसाइल

विशेष रूप से आयरन बीम लेजर सिस्टम पर ध्यान है, जो लगभग 10 किलोमीटर तक ड्रोन और मिसाइलों को लेजर से नष्ट कर सकता है। यह पारंपरिक मिसाइल इंटरसेप्टर की तुलना में कम लागत वाला और तेज़ प्रतिक्रिया वाला सिस्टम माना जाता है।

क्यों बढ़ रही है जरूरत?

पिछले वर्षों में सीमा पार तनाव और ड्रोन व लंबी दूरी की मिसाइलों के बढ़ते खतरे ने भारत को अपनी हवाई सुरक्षा और मजबूत करने के लिए प्रेरित किया है। भारत के पास पहले से S-400, बराक और स्वदेशी आकाश मिसाइल सिस्टम मौजूद हैं, लेकिन अब लक्ष्य एक समग्र मल्टी-लेयर डिफेंस शील्ड तैयार करना है।

करीब 15,000 किलोमीटर लंबी जमीनी सीमा और 7,500 किलोमीटर से अधिक समुद्री तट की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नई तकनीकों का समावेश रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

2035 तक ‘सुदर्शन चक्र’ का लक्ष्य

भारत 2035 तक एक व्यापक ‘सुदर्शन चक्र’ मल्टी-लेयर सुरक्षा कवच विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। इसके तहत विदेशी तकनीक का ट्रांसफर लेकर देश में उत्पादन किया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार ‘गोल्डन होराइजन’ नामक एक लंबी दूरी की एयर-लॉन्च मिसाइल पर भी चर्चा हो सकती है, जिसे सुखोई-30 एमकेआई से जोड़ा जा सकता है। इसकी मारक क्षमता 1000 से 2000 किलोमीटर तक और गति मैक-5 तक बताई जा रही है।

भारत-इजरायल रक्षा संबंध और मजबूत होंगे

रूस और फ्रांस के बाद इजरायल भारत का प्रमुख रक्षा साझेदार बन चुका है। इस संभावित समझौते से दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग और गहरा होने की उम्मीद है।

अगर तकनीक हस्तांतरण पर सहमति बनती है, तो यह भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति के लिए बड़ा कदम साबित हो सकता है।