मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरे के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसा भारतीय एलपीजी टैंकर सुरक्षित रूप से बाहर निकल गया है और अब भारत की ओर बढ़ रहा है। इस जहाज में 40 हजार मीट्रिक टन से अधिक एलपीजी लदी हुई है, जो देश में गैस आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस पूरे ऑपरेशन को भारतीय नौसेना की निगरानी में अंजाम दिया गया, जिसे भारत की कूटनीतिक और सैन्य दोनों स्तर पर बड़ी सफलता माना जा रहा है।
मिडिल ईस्ट में जारी सैन्य तनाव और समुद्री सुरक्षा संकट के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे भारतीय जहाजों को निकालने का अभियान तेज कर दिया गया था। इसी अभियान के तहत विशाल गैस टैंकर “VLGC शिवालिक” को सुरक्षित तरीके से खाड़ी क्षेत्र से बाहर निकाल लिया गया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार इस जहाज में 40,000 मीट्रिक टन से ज्यादा लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) लदी हुई है, जो भारत के घरेलू उपयोग के लिए लाई जा रही है। यह गैस आपूर्ति खासतौर पर बड़े शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है।
सूत्रों का कहना है कि भारतीय नौसेना के युद्धपोतों ने इस टैंकर को एस्कॉर्ट करते हुए खतरनाक समुद्री क्षेत्र से बाहर निकाला। इस दौरान ड्रोन हमले, समुद्री माइन्स और संभावित मिसाइल खतरे को देखते हुए विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई थी।
बताया जा रहा है कि इस क्षेत्र में कुल मिलाकर भारत के लगभग 35 से 40 जहाज फंसे हुए थे। शिवालिक के सुरक्षित निकलने के बाद अब दूसरे जहाजों को भी चरणबद्ध तरीके से बाहर लाया जा रहा है।
सरकारी स्तर पर ईरान और क्षेत्र के अन्य देशों से लगातार बातचीत चल रही थी, जिसके बाद जहाजों की आवाजाही को लेकर सहमति बनी।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। इस रास्ते से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस की सप्लाई गुजरती है।
हाल ही में मध्य पूर्व में बढ़े सैन्य तनाव के कारण इस इलाके में जहाजों की आवाजाही पर खतरा बढ़ गया था। कई देशों ने अपने जहाजों को रोक दिया था, जबकि कुछ जहाज समुद्र में ही खड़े रहे।
ईरान ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए बिना अनुमति जहाजों के गुजरने पर रोक लगाने की चेतावनी दी थी। इसके बाद कई देशों की नौसेनाएं सक्रिय हो गई थीं।
भारत के लिए यह स्थिति इसलिए ज्यादा गंभीर थी क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा तेल और गैस आयात करता है, और उसका बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आता है।
शिवालिक जहाज के सुरक्षित निकलने से भारत में गैस आपूर्ति को लेकर चल रही चिंता काफी हद तक कम हो गई है।
पिछले कुछ दिनों से मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और दिल्ली जैसे बड़े शहरों में एलपीजी की सप्लाई को लेकर आशंका जताई जा रही थी।
अगर जहाज लंबे समय तक फंसा रहता तो घरेलू गैस सिलेंडर, औद्योगिक गैस और पेट्रोकेमिकल सेक्टर पर असर पड़ सकता था।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की समय पर की गई कूटनीतिक बातचीत और नौसेना की सक्रियता ने सप्लाई चेन को टूटने से बचा लिया।
इस घटना से यह भी साफ हुआ कि भारत अब अपने ऊर्जा हितों की सुरक्षा के लिए समुद्री स्तर पर भी मजबूत भूमिका निभा रहा है।
सरकारी अधिकारियों ने बताया कि भारत में ईंधन और गैस की पर्याप्त उपलब्धता है और घबराने की जरूरत नहीं है।
ऊर्जा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि
“भारत सरकार लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है। हमारे पास पर्याप्त भंडार है और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक सप्लाई की व्यवस्था भी की जा सकती है।”
नौसेना के सूत्रों ने बताया कि
“भारतीय जहाजों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। जरूरत पड़ने पर आगे भी एस्कॉर्ट ऑपरेशन जारी रहेंगे।”
होर्मुज से भारतीय जहाज का सुरक्षित निकलना सिर्फ एक समुद्री ऑपरेशन नहीं बल्कि रणनीतिक सफलता भी है।
पहला — भारत ने बिना किसी टकराव के कूटनीतिक बातचीत से रास्ता निकाला।
दूसरा — भारतीय नौसेना ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में अपनी मौजूदगी मजबूत दिखाई।
तीसरा — भारत ने यह संदेश दिया कि वह अपने ऊर्जा हितों की रक्षा करने में सक्षम है।
यह घटना यह भी दिखाती है कि आने वाले समय में समुद्री सुरक्षा भारत की विदेश नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनने वाली है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि मध्य पूर्व में तनाव बढ़ता है तो भारत को अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लानी होगी और वैकल्पिक मार्ग तैयार करने होंगे।
होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय एलपीजी टैंकर का सुरक्षित निकलना भारत के लिए बड़ी राहत की खबर है। इससे न सिर्फ देश में गैस आपूर्ति को लेकर चिंता कम हुई है, बल्कि यह भी साबित हुआ है कि भारत अपने नागरिकों और ऊर्जा सुरक्षा के लिए हर स्तर पर सक्रिय है।
कूटनीति, सैन्य सतर्कता और रणनीतिक योजना के कारण भारत ने एक बड़े संकट को टाल दिया है। आने वाले दिनों में बाकी जहाजों को भी सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया जारी रहने की उम्मीद है।
Q1. होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों महत्वपूर्ण है?
यह दुनिया का सबसे व्यस्त तेल और गैस समुद्री मार्ग है, जिससे बड़ी मात्रा में ऊर्जा सप्लाई होती है।
Q2. शिवालिक जहाज में क्या था?
इसमें 40,000 मीट्रिक टन से ज्यादा एलपीजी गैस लदी हुई थी।
Q3. भारतीय नौसेना की क्या भूमिका रही?
नौसेना ने जहाज को एस्कॉर्ट कर सुरक्षित क्षेत्र से बाहर निकाला।
Q4. क्या भारत में गैस की कमी हो सकती थी?
यदि जहाज देर तक फंसा रहता तो सप्लाई प्रभावित हो सकती थी।
Q5. क्या और जहाज भी फंसे हुए हैं?
सूत्रों के अनुसार कई जहाज अभी भी वहां हैं और उन्हें निकालने की प्रक्रिया चल रही है।
होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकला भारतीय LPG टैंकर, नौसेना की निगरानी में भारत की बड़ी रणनीतिक सफलता