अबू धाबी में फंसा जौनपुर का युवक, परिवार ने सरकार से लगाई गुहार – पासपोर्ट रिलीज कराकर भारत लाने की मांग

अबू धाबी में फंसा जौनपुर का युवक, परिवार ने सरकार से लगाई गुहार – पासपोर्ट रिलीज कराकर भारत लाने की मांग
March 13, 2026 at 1:43 pm

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच विदेशों में काम कर रहे भारतीयों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के रहने वाले एक युवक के अबू धाबी में फंसे होने की खबर सामने आई है, जिसके बाद उसके परिवार ने भारत सरकार से मदद की अपील की है। परिजनों का कहना है कि वहां हालात लगातार खराब हो रहे हैं और युवक को बाहर निकलने की अनुमति भी नहीं मिल रही। परिवार ने सरकार से अनुरोध किया है कि उसका पासपोर्ट रिलीज कराकर उसे सुरक्षित भारत वापस लाया जाए।


जौनपुर जिले के जफराबाद क्षेत्र के निवासी प्रदुम पाल करीब आठ महीने पहले नौकरी के सिलसिले में संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी गए थे। परिवार के अनुसार वह वहां एक निजी कंपनी में काम कर रहे हैं। शुरुआत में सब कुछ सामान्य था, लेकिन पिछले कुछ समय से क्षेत्र में बढ़ते तनाव और सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं के कारण स्थिति गंभीर हो गई है।


प्रदुम पाल के भाई जितेंद्र पाल ने बताया कि हाल ही में उनकी फोन पर बात हुई थी, जिसमें प्रदुम ने वहां के हालात को लेकर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि जिस कंपनी में वह काम करते हैं, उसके दफ्तर के पास एक धमाका होने की खबर मिली थी, जिसके बाद से वहां सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है। कर्मचारियों को बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी जा रही और सभी को अंदर ही रहने को कहा गया है।


परिवार का कहना है कि प्रदुम का पासपोर्ट कंपनी के पास जमा है और इसी वजह से वह खुद से वापस नहीं आ पा रहे हैं। परिवार ने प्रशासन और सरकार से मांग की है कि पासपोर्ट रिलीज कराकर उन्हें सुरक्षित भारत लाया जाए।


पिछले कुछ समय से पश्चिम एशिया क्षेत्र में तनाव बढ़ने की खबरें सामने आती रही हैं। इस क्षेत्र में लाखों भारतीय काम करते हैं और किसी भी तरह की अस्थिरता का असर सीधे उन पर पड़ता है। खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और केरल के लोग नौकरी करते हैं।


विदेशों में काम करने वाले कई मजदूर और कर्मचारी अपने परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य होते हैं। ऐसे में जब किसी कारण से वे संकट में फंस जाते हैं तो उनके परिवार की आर्थिक और मानसिक स्थिति दोनों प्रभावित होती है।


पहले भी कई बार युद्ध या तनाव की स्थिति में भारत सरकार को विशेष अभियान चलाकर नागरिकों को वापस लाना पड़ा है। इसलिए इस तरह की घटनाएं सामने आने पर परिवारों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक माना जाता है।


इस घटना का असर सिर्फ एक परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसे कई परिवार हैं जिनके सदस्य विदेशों में काम कर रहे हैं। अगर हालात लंबे समय तक खराब रहते हैं तो भारतीय कामगारों की सुरक्षा, नौकरी और आय पर असर पड़ सकता है।


भारत के कई राज्यों की अर्थव्यवस्था भी विदेशों से आने वाले पैसे पर निर्भर करती है। ऐसे में अगर बड़ी संख्या में लोग वापस लौटते हैं तो इसका आर्थिक प्रभाव भी देखने को मिल सकता है।


साथ ही, विदेशों में फंसे भारतीयों की खबरें सामने आने पर लोगों में डर का माहौल बनता है और सरकार पर दबाव भी बढ़ता है कि वह जल्द से जल्द सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करे।


परिवार के अनुसार उन्होंने स्थानीय प्रशासन से संपर्क किया है और उच्च अधिकारियों तक बात पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। विदेश मंत्रालय की ओर से सामान्य रूप से ऐसे मामलों में कहा जाता है कि विदेश में फंसे भारतीय नागरिकों की मदद के लिए दूतावास लगातार संपर्क में रहते हैं और जरूरत पड़ने पर हर संभव सहायता दी जाती है।


विशेषज्ञों का कहना है कि जिन लोगों का पासपोर्ट कंपनी के पास होता है, उन्हें वापस आने में ज्यादा दिक्कत होती है, इसलिए ऐसे मामलों में दूतावास की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।


यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति के फंसने का नहीं है, बल्कि यह उस व्यवस्था की ओर भी इशारा करता है जिसमें विदेशों में काम करने वाले कई कर्मचारियों के दस्तावेज उनके नियोक्ता के पास रहते हैं। संकट की स्थिति में यही बात सबसे बड़ी परेशानी बन जाती है।


भारत सरकार ने पहले भी कई बार विदेशों में फंसे नागरिकों को निकालने के लिए अभियान चलाए हैं, लेकिन हर बार चुनौती अलग होती है। इस बार भी अगर क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो सरकार को बड़े स्तर पर कदम उठाने पड़ सकते हैं।


विशेषज्ञ मानते हैं कि विदेश जाने से पहले कर्मचारियों को अपने अधिकारों और नियमों की पूरी जानकारी होनी चाहिए ताकि ऐसी स्थिति में उन्हें परेशानी कम हो।


जौनपुर के प्रदुम पाल का मामला उन हजारों भारतीय परिवारों की चिंता को सामने लाता है जिनके सदस्य विदेशों में काम कर रहे हैं। परिवार की मांग है कि सरकार जल्द से जल्द हस्तक्षेप करे और युवक को सुरक्षित भारत वापस लाने की व्यवस्था करे। ऐसे मामलों में समय पर कार्रवाई न सिर्फ एक व्यक्ति बल्कि पूरे परिवार के लिए राहत साबित होती है।


1. प्रदुम पाल कहां फंसे हुए हैं?
वह संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी में काम के सिलसिले में गए थे और वहीं फंसे हुए हैं।


2. परिवार सरकार से क्या मांग कर रहा है?
परिवार चाहता है कि उनका पासपोर्ट रिलीज कराया जाए और उन्हें सुरक्षित भारत वापस लाया जाए।


3. क्या विदेश मंत्रालय मदद कर सकता है?
ऐसे मामलों में भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय जरूरत पड़ने पर सहायता करते हैं।


4. पासपोर्ट कंपनी के पास क्यों होता है?
कई देशों में नौकरी के दौरान कंपनी पासपोर्ट अपने पास रखती है, जिससे कर्मचारी खुद से यात्रा नहीं कर पाते।


5. क्या पहले भी भारतीयों को विदेश से वापस लाया गया है?
हां, संकट के समय भारत सरकार कई बार विशेष अभियान चलाकर नागरिकों को वापस ला चुकी है।