चुनावी राज्यों में आदर्श आचार संहिता लागू, फंड, विज्ञापन और सरकारी सुविधाओं पर लगी रोक

चुनावी राज्यों में आदर्श आचार संहिता लागू, फंड, विज्ञापन और सरकारी सुविधाओं पर लगी रोक
March 16, 2026 at 4:06 pm

भारत निर्वाचन आयोग ने चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा के साथ ही आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) लागू कर दी है। आचार संहिता लागू होते ही सरकारी खर्च, विज्ञापन, विकास योजनाओं की नई घोषणाओं और सरकारी मशीनरी के चुनावी इस्तेमाल पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया गया है। आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक सरकार और राजनीतिक दल किसी भी तरह का ऐसा कदम नहीं उठाएंगे जिससे मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश हो। आयोग ने निगरानी व्यवस्था को भी तुरंत सक्रिय करने का आदेश दिया है।

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने चुनाव कार्यक्रम घोषित करते ही सभी संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों, मुख्य निर्वाचन अधिकारियों और जिला प्रशासन को विस्तृत निर्देश जारी कर दिए। आयोग ने कहा कि आदर्श आचार संहिता लागू होते ही सांसद और विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (MPLADS / MLALADS) के तहत किसी भी नई राशि की स्वीकृति या वितरण नहीं कर सकेंगे।

इसके साथ ही सरकारी वेबसाइटों, सरकारी विज्ञापनों और सार्वजनिक स्थानों पर लगे पोस्टरों से मंत्रियों और राजनीतिक नेताओं की तस्वीरें हटाने का निर्देश दिया गया है। आयोग ने कहा कि सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल किसी भी दल के प्रचार के लिए नहीं किया जा सकता।

निर्वाचन आयोग ने यह भी आदेश दिया कि चुनावी राज्यों में फ्लाइंग स्क्वॉड, वीडियो सर्विलांस टीम, स्टेटिक सर्विलांस टीम और एक्सपेंडिचर मॉनिटरिंग टीम तुरंत सक्रिय की जाएं ताकि शराब, नकदी, सोना या अन्य प्रलोभन सामग्री के अवैध वितरण को रोका जा सके।

जिला स्तर पर 24 घंटे काम करने वाले कंट्रोल रूम बनाने का निर्देश दिया गया है, जहां से चुनाव संबंधी शिकायतों की निगरानी और तुरंत कार्रवाई की जाएगी। इन कंट्रोल रूम की जिम्मेदारी जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) और मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के पास होगी।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि मंत्री अपने सरकारी दौरों को चुनाव प्रचार के साथ नहीं जोड़ सकते। सरकारी गाड़ी, हेलीकॉप्टर, कर्मचारी या सरकारी भवन का उपयोग किसी भी राजनीतिक कार्यक्रम के लिए नहीं किया जा सकता।

आदर्श आचार संहिता भारत में चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने के लिए लागू की जाती है। जैसे ही चुनाव की घोषणा होती है, यह नियम पूरे चुनावी क्षेत्र में प्रभावी हो जाता है।

इस संहिता का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि सत्ताधारी दल सरकारी संसाधनों का उपयोग करके चुनाव में अनुचित लाभ न उठा सके। इसके तहत नई योजनाओं की घोषणा, सरकारी नियुक्तियां, बड़े प्रोजेक्ट की शुरुआत और वित्तीय मंजूरी पर रोक लगा दी जाती है।

आचार संहिता का पालन सभी राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और सरकारी अधिकारियों के लिए अनिवार्य होता है। नियमों का उल्लंघन होने पर निर्वाचन आयोग कार्रवाई कर सकता है, जिसमें नोटिस, प्रतिबंध या एफआईआर तक शामिल हो सकती है।

आचार संहिता लागू होने का सीधा असर सरकारी कामकाज और राजनीतिक गतिविधियों पर पड़ता है।

सरकारें नई योजनाओं की घोषणा नहीं कर पातीं, जिससे विकास कार्यों की गति कुछ समय के लिए धीमी हो जाती है। वहीं दूसरी ओर यह नियम चुनाव को निष्पक्ष बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मतदाताओं को लुभाने के लिए पैसे, शराब या उपहार बांटने जैसी गतिविधियों पर सख्ती बढ़ जाती है। इससे चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनती है।

चुनावी राज्यों में प्रशासनिक मशीनरी भी चुनाव आयोग के नियंत्रण में आ जाती है, जिससे निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित किया जा सके।

निर्वाचन आयोग ने अपने निर्देश में कहा कि
“आदर्श आचार संहिता लागू होते ही चुनाव व्यय की निगरानी और प्रवर्तन से जुड़ी सभी टीमें सक्रिय की जाएं। शराब, नकदी और प्रतिबंधित वस्तुओं के अवैध इस्तेमाल को रोकने के लिए विशेष जांच अभियान चलाया जाएगा। सरकारी मशीनरी का उपयोग किसी भी राजनीतिक दल के हित में नहीं किया जा सकता।”

आयोग ने यह भी कहा कि सभी राज्यों में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में स्क्रीनिंग कमेटी बनाई जाएगी, जो आचार संहिता से जुड़े प्रस्तावों की जांच कर आयोग को भेजेगी।

विशेषज्ञों के अनुसार आदर्श आचार संहिता भारतीय लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण व्यवस्थाओं में से एक है। यह सुनिश्चित करती है कि चुनाव के दौरान सत्ता में बैठी सरकार अपने पद का फायदा न उठा सके।

हाल के वर्षों में चुनाव आयोग ने निगरानी के लिए तकनीक का अधिक इस्तेमाल शुरू किया है। वीडियो मॉनिटरिंग, जीपीएस ट्रैकिंग और ऑनलाइन शिकायत प्रणाली के कारण अब उल्लंघन पकड़ना आसान हो गया है।

हालांकि कई बार राजनीतिक दल आचार संहिता के नियमों को लेकर विवाद भी करते हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में आयोग के फैसलों को अंतिम माना जाता है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर आचार संहिता का कड़ाई से पालन हो तो चुनाव अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी हो सकते हैं।

चुनावी राज्यों में आदर्श आचार संहिता लागू होने के साथ ही राजनीतिक गतिविधियां पूरी तरह चुनाव आयोग के नियमों के दायरे में आ गई हैं। सरकारी खर्च, विज्ञापन और योजनाओं पर लगी रोक से चुनाव में बराबरी का माहौल बनाने की कोशिश की गई है। आयोग ने साफ कर दिया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। आने वाले दिनों में निगरानी और सख्ती और बढ़ने की संभावना है, जिससे चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से पूरी कराई जा सके।

  1. आदर्श आचार संहिता क्या होती है?
    चुनाव की घोषणा के बाद लागू होने वाले नियम, जो निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करते हैं।
  2. आचार संहिता लागू होने पर क्याक्या बंद हो जाता है?
    नई योजनाएं, सरकारी विज्ञापन, फंड जारी करना और सरकारी संसाधनों का चुनावी उपयोग।
  3. आचार संहिता कब तक लागू रहती है?
    चुनाव की घोषणा से लेकर परिणाम आने तक।
  4. उल्लंघन होने पर क्या कार्रवाई होती है?
    नोटिस, एफआईआर, प्रचार पर रोक या उम्मीदवार की शिकायत दर्ज हो सकती है।
  5. आचार संहिता क्यों जरूरी है?
    ताकि सभी दलों को बराबर मौका मिले और चुनाव निष्पक्ष हो।