भारत में खेती को आधुनिक बनाने और ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है, जिसका नाम नमो ड्रोन दीदी योजना है। इस योजना के तहत गांवों की महिलाओं को ड्रोन तकनीक से जोड़कर उन्हें नया रोजगार देने और खेती को स्मार्ट बनाने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन खरीदने के लिए बड़ी आर्थिक मदद दे रही है, जिससे वे किसानों को उर्वरक और कीटनाशक छिड़काव जैसी सेवाएं देकर आय अर्जित कर सकें। यह योजना न केवल कृषि क्षेत्र में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाएगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी।
केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई नमो ड्रोन दीदी योजना के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को ड्रोन पायलट के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) को आधुनिक कृषि सेवाओं से जोड़ना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, इस योजना को 2023-24 से 2025-26 तक लागू करने की मंजूरी दी गई है और इसके लिए सरकार ने 1261 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है।
योजना के तहत महिला समूहों को कृषि ड्रोन उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिनका उपयोग खेतों में उर्वरक और कीटनाशक के छिड़काव के लिए किया जाएगा। इससे खेती में समय की बचत होगी, लागत कम होगी और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी। सरकार ड्रोन खरीदने के लिए कुल लागत का 80 प्रतिशत तक अनुदान देती है, जो अधिकतम 8 लाख रुपये तक हो सकता है।
बाकी राशि महिला स्वयं सहायता समूहों के क्लस्टर स्तर के संघ (CLF) द्वारा राष्ट्रीय कृषि अवसंरचना वित्तपोषण सुविधा (AIF) के तहत लोन लेकर जुटाई जा सकती है। इस लोन पर 3 प्रतिशत तक ब्याज में छूट का प्रावधान भी रखा गया है, जिससे ग्रामीण समूहों पर आर्थिक बोझ कम पड़े।
इस योजना के तहत दिए जाने वाले ड्रोन केवल मशीन नहीं होते, बल्कि पूरा तकनीकी पैकेज होता है। इसमें स्प्रे सिस्टम वाला ड्रोन, अतिरिक्त बैटरियां, चार्जर, नोजल सेट, प्रोपेलर, बैटरी हब और जरूरी उपकरण शामिल होते हैं। साथ ही महिलाओं को 15 दिन का विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसमें ड्रोन उड़ाने, रखरखाव और छोटे-मोटे रिपेयर की जानकारी दी जाती है। इसके अलावा एक साल का बीमा और दो साल का मेंटेनेंस भी योजना में शामिल है।
सरकार के अनुसार, वर्ष 2023-24 में उर्वरक कंपनियों के सहयोग से 500 ड्रोन महिला समूहों को सौंपे जा चुके हैं और इन सभी महिलाओं को डीजीसीए से मान्यता प्राप्त संस्थानों में प्रशिक्षण दिया गया है।
भारत में लंबे समय से खेती पारंपरिक तरीकों से होती रही है, जिससे उत्पादन लागत अधिक और मुनाफा कम रहता है। सरकार पिछले कुछ वर्षों से कृषि क्षेत्र में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है। ड्रोन तकनीक का उपयोग पहले केवल बड़े किसानों या कंपनियों तक सीमित था, लेकिन अब इसे गांवों तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है।
महिला स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करने के लिए सरकार पहले से ही कई योजनाएं चला रही है, जैसे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन। नमो ड्रोन दीदी योजना उसी दिशा में एक नया कदम माना जा रहा है, जिसमें महिलाओं को तकनीक आधारित रोजगार से जोड़ा जा रहा है।
बेंगलुरु स्थित कृषि विकास और ग्रामीण परिवर्तन केंद्र (ADRTC) द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया कि ड्रोन तकनीक अपनाने से महिलाओं की आय बढ़ी है और वे पहले से अधिक कुशल तरीके से काम कर पा रही हैं।
इस योजना का सबसे बड़ा असर ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा। पहले महिलाएं केवल खेतों में मजदूरी तक सीमित थीं, लेकिन अब वे तकनीकी सेवाएं देकर कमाई कर सकेंगी। इससे गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
किसानों को भी इसका सीधा फायदा मिलेगा, क्योंकि ड्रोन से छिड़काव करने में समय कम लगता है और दवा की बचत होती है। इससे उत्पादन बढ़ने की संभावना रहती है।
देश के स्तर पर देखें तो यह योजना भारत में स्मार्ट फार्मिंग को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम है। इससे खेती में आधुनिक तकनीक का उपयोग बढ़ेगा और कृषि क्षेत्र अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेगा।
ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी ने संसद में कहा कि सरकार का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को नई तकनीक से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने बताया कि नमो ड्रोन दीदी योजना के जरिए महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन देकर उन्हें कृषि सेवाएं प्रदान करने का अवसर दिया जा रहा है, जिससे उनकी आय बढ़ेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में इस योजना का विस्तार किया जाएगा और अधिक से अधिक जिलों में महिलाओं को ड्रोन प्रशिक्षण दिया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि नमो ड्रोन दीदी योजना केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत में तकनीकी बदलाव की शुरुआत है। अगर यह योजना सही तरीके से लागू होती है तो इससे खेती की लागत कम होगी और उत्पादन बढ़ेगा।
इसके अलावा यह योजना महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। भारत में बड़ी संख्या में महिलाएं खेती से जुड़ी हैं, लेकिन उनके पास तकनीक और संसाधनों की कमी रहती है। ड्रोन तकनीक से जुड़ने के बाद वे सेवा प्रदाता बन सकती हैं, जिससे उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
हालांकि कुछ चुनौतियां भी हैं, जैसे प्रशिक्षण की गुणवत्ता, ड्रोन के रखरखाव की व्यवस्था और ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी सहायता की उपलब्धता। अगर इन समस्याओं का समाधान किया जाता है तो यह योजना लंबे समय तक सफल रह सकती है।
नमो ड्रोन दीदी योजना ग्रामीण भारत के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है। इससे महिलाओं को रोजगार मिलेगा, किसानों को आधुनिक तकनीक का फायदा मिलेगा और खेती का स्वरूप बदल सकता है। अगर योजना का सही तरीके से विस्तार किया गया तो आने वाले वर्षों में भारत की कृषि व्यवस्था अधिक आधुनिक और मजबूत बन सकती है।
1. नमो ड्रोन दीदी योजना क्या है?
यह केंद्र सरकार की योजना है, जिसके तहत महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन देकर कृषि सेवाओं से जोड़ा जा रहा है।
2. इस योजना में कितनी आर्थिक मदद मिलती है?
सरकार ड्रोन की लागत का 80% तक, अधिकतम 8 लाख रुपये तक की सहायता देती है।
3. ड्रोन का उपयोग किस काम के लिए होगा?
खेतों में उर्वरक और कीटनाशक छिड़काव तथा कृषि सेवाएं देने के लिए।
4. क्या महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाता है?
हाँ, ड्रोन चलाने के लिए 15 दिन का विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है।
5. इस योजना से किसानों को क्या फायदा होगा?
समय की बचत, कम लागत और बेहतर उत्पादन।
नमो ड्रोन दीदी योजना: अब गांव की महिलाएं बनेंगी ड्रोन पायलट, खेती में आएगा तकनीकी बदलाव