ग्रीन फ्यूल को बढ़ावा देने में सबसे बड़ी बाधा पेट्रोलियम लॉबी, बोले नितिन गडकरी

ग्रीन फ्यूल को बढ़ावा देने में सबसे बड़ी बाधा पेट्रोलियम लॉबी, बोले नितिन गडकरी
March 7, 2026 at 10:51 am

देश में वैकल्पिक और हरित ईंधन को बढ़ावा देने के प्रयास तेज हो रहे हैं, लेकिन इस दिशा में कई बड़ी चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि पेट्रोलियम लॉबी के बड़े आर्थिक हित ग्रीन फ्यूल को तेजी से बढ़ावा मिलने में बाधा बन रहे हैं।

पेट्रोलियम लॉबी से मिल रही चुनौती

‘इंडियन फेडरेशन ऑफ ग्रीन एनर्जी’ के एक कार्यक्रम में बोलते हुए गडकरी ने कहा कि जब भी सरकार वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने की कोशिश करती है, तो पेट्रोलियम क्षेत्र से जुड़े प्रभावशाली समूह इसका विरोध करते हैं। उन्होंने बताया कि सरकार पिछले कई वर्षों से सीएनजी, एलएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने की दिशा में काम कर रही है, लेकिन जीवाश्म ईंधन से जुड़े बड़े आर्थिक हित इस बदलाव को धीमा कर देते हैं।

ऊर्जा जरूरतों के लिए आयात पर भारी निर्भरता

गडकरी के अनुसार भारत अभी भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। उन्होंने बताया कि देश अपनी कुल ऊर्जा आवश्यकताओं का लगभग 86 प्रतिशत हिस्सा आयात से पूरा करता है। हर साल करीब 22 लाख करोड़ रुपये जीवाश्म ईंधन के आयात पर खर्च होते हैं, जिससे इस क्षेत्र में कई आर्थिक हित जुड़े हुए हैं।

2030 तक टिकाऊ परिवहन का लक्ष्य

सरकार ने वर्ष 2030 तक देश की परिवहन व्यवस्था को स्मार्ट, सुरक्षित और टिकाऊ बनाने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए स्वच्छ और गैर-प्रदूषणकारी ईंधन को बढ़ावा दिया जा रहा है। गडकरी ने कहा कि ग्रीन फ्यूल के उपयोग से न केवल प्रदूषण कम होगा बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी और विदेशी ईंधन पर निर्भरता घटेगी।

किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को होगा फायदा

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वैकल्पिक और हरित ईंधन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ मिल सकता है। इससे किसानों की आय बढ़ाने के नए अवसर पैदा होंगे और गांवों में रोजगार के मौके भी बढ़ेंगे। उनका मानना है कि आने वाले समय में इस क्षेत्र में हजारों कंपनियां काम कर सकती हैं।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस क्षेत्र में तेजी से विस्तार के लिए तकनीक की विश्वसनीयता, लागत और गुणवत्ता जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान देना होगा। साथ ही पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने यह भी दिखा दिया है कि भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा कितनी महत्वपूर्ण है।