भारत में किडनी रैकेट का काला सच: टॉप-4 बड़े कांड, कैसे चलता है पूरा नेटवर्क?

भारत में किडनी रैकेट का काला सच: टॉप-4 बड़े कांड, कैसे चलता है पूरा नेटवर्क?
April 2, 2026 at 5:31 pm

देश में हाल ही में सामने आए कानपुर किडनी कांड ने एक बार फिर भारत में अवैध अंग व्यापार के गंभीर खतरे को उजागर कर दिया है। यह मामला कोई अकेला उदाहरण नहीं है, बल्कि पिछले दो दशकों में देश के कई हिस्सों में ऐसे बड़े-बड़े किडनी रैकेट पकड़े जा चुके हैं। इन मामलों की जांच में यह बात सामने आई है कि यह कारोबार सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। गरीब और मजबूर लोगों को लालच देकर डोनर बनाया जाता है, जबकि गंभीर मरीजों को जल्दी इलाज का झांसा देकर इस जाल में फंसाया जाता है।

कानपुर में उजागर हुआ किडनी रैकेट फिलहाल देश के सबसे बड़े मामलों में गिना जा रहा है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि यहां बिना उचित रिकॉर्ड के 60 से अधिक अवैध किडनी ट्रांसप्लांट किए गए। इस मामले में कई राज्यों के अस्पतालों और डॉक्टरों के शामिल होने के संकेत मिले हैं। पुलिस ने कुछ आरोपियों को गिरफ्तार किया है, लेकिन जांच अभी जारी है और इसमें और बड़े खुलासे होने की संभावना है।

इससे पहले वर्ष 2008 में गुरुग्राम में सामने आया किडनी कांड देश को हिला देने वाला था। इस मामले में देवेंद्र शर्मा और डॉ. अमित कुमार जैसे आरोपियों ने करीब सात वर्षों तक 750 से अधिक लोगों की किडनी अवैध रूप से निकालकर ट्रांसप्लांट की। यह नेटवर्क इतनी गहराई से फैला था कि हर एक ट्रांसप्लांट से लाखों रुपये कमाए जाते थे।

इसी तरह महाराष्ट्र के चंद्रपुर में हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय किडनी सिंडिकेट का खुलासा हुआ, जिसमें डोनरों को विदेश भेजकर उनकी किडनी निकलवाई जाती थी। डोनरों को कुछ लाख रुपये दिए जाते थे, जबकि उनकी किडनी कई गुना अधिक कीमत पर बेची जाती थी।

इसके अलावा दिल्ली-नोएडा में एक चर्चित मामला सामने आया, जिसमें विदेशी डोनरों को भारत लाकर अवैध ट्रांसप्लांट किए गए। इस मामले में भी कई गिरफ्तारियां हुईं और अस्पतालों की भूमिका पर सवाल उठे।

भारत में किडनी रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अनुमान के अनुसार देश में करोड़ों लोग किसी न किसी रूप में किडनी से जुड़ी बीमारियों से जूझ रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में लंबी प्रतीक्षा सूची, डोनर की कमी और महंगे इलाज के कारण मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

इसी स्थिति का फायदा उठाकर अवैध गिरोह सक्रिय हो जाते हैं। ये लोग उन मरीजों को निशाना बनाते हैं जो लंबे समय से डायलिसिस पर हैं और जल्दी ट्रांसप्लांट चाहते हैं। दूसरी ओर, गरीब और कर्ज में डूबे लोगों को पैसों का लालच देकर डोनर बनने के लिए तैयार किया जाता है।

इस अवैध कारोबार का सबसे बड़ा असर समाज के कमजोर वर्ग पर पड़ता है। गरीब लोग थोड़े पैसों के लिए अपनी सेहत दांव पर लगा देते हैं और बाद में उन्हें गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। वहीं मरीजों के लिए भी यह जोखिम भरा होता है, क्योंकि अवैध ट्रांसप्लांट में सही जांच और देखभाल का अभाव रहता है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यह भारत की छवि को प्रभावित करता है, क्योंकि विदेशी मरीज सस्ते इलाज के लिए यहां आते हैं, लेकिन ऐसे मामलों से मेडिकल सिस्टम पर सवाल खड़े होते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों का कहना है कि अवैध अंग व्यापार को रोकने के लिए सख्त कानून पहले से मौजूद हैं, लेकिन उनका सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रांसप्लांट प्रक्रिया में पारदर्शिता और निगरानी बढ़ाने की जरूरत है। साथ ही, डोनर और रिसीवर की पहचान की सख्त जांच होनी चाहिए।

अगर इस पूरे नेटवर्क का विश्लेषण करें तो साफ होता है कि यह सिर्फ एक डॉक्टर या अस्पताल तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसमें कई स्तरों पर लोग शामिल होते हैं। इसमें दलाल, मेडिकल स्टाफ, अस्पताल प्रबंधन और कभी-कभी विदेशी एजेंट भी शामिल होते हैं।

सबसे बड़ी समस्या यह है कि मांग और आपूर्ति दोनों मौजूद हैं। एक ओर मरीज हैं जो जीवन बचाने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं, वहीं दूसरी ओर गरीब लोग हैं जो आर्थिक मजबूरी में अंग बेचने को तैयार हो जाते हैं। इस गैप को ही रैकेट संचालित करने वाले लोग भरते हैं।

भारत में किडनी रैकेट का मुद्दा सिर्फ कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक असमानता से भी जुड़ा हुआ है। जब तक गरीबों की आर्थिक स्थिति में सुधार नहीं होगा और स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ नहीं बनाया जाएगा, तब तक ऐसे रैकेट पूरी तरह खत्म करना मुश्किल रहेगा। सरकार, अस्पतालों और समाज को मिलकर इस समस्या का समाधान निकालना होगा।

Q1. क्या एक किडनी के साथ सामान्य जीवन संभव है?
हाँ, एक स्वस्थ व्यक्ति एक किडनी के साथ सामान्य जीवन जी सकता है, लेकिन नियमित जांच जरूरी होती है।

Q2. अवैध किडनी ट्रांसप्लांट कितना खतरनाक है?
यह बेहद जोखिम भरा होता है क्योंकि इसमें उचित मेडिकल जांच और देखभाल का अभाव होता है।

Q3. भारत में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए क्या नियम हैं?
भारत में अंग प्रत्यारोपण के लिए सख्त कानून हैं, जिसमें डोनर और रिसीवर के रिश्ते और अनुमति की जांच की जाती है।

Q4. डोनर कहां से लाए जाते हैं?
अक्सर गरीब और जरूरतमंद लोगों को पैसों का लालच देकर डोनर बनाया जाता है।

Q5. इस समस्या का समाधान क्या है?
बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, जागरूकता और सख्त कानून लागू करना इसका समाधान हो सकता है।