लोकसभा में नक्सलवाद और आंतरिक सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर हुई चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने तीखे तेवर दिखाते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि लोकतंत्र में हिंसा और हथियार उठाने वालों के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि वे पूरी तैयारी के साथ आए हैं और देश के सामने हर तथ्य रखेंगे। इसी दिन सदन ने इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (संशोधन) बिल, 2025 को भी पारित कर दिया, जो आर्थिक सुधारों की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
लोकसभा में नक्सलवाद पर चर्चा के दौरान माहौल काफी गरम रहा। विपक्षी नेताओं द्वारा लगातार हस्तक्षेप किए जाने पर गृह मंत्री Amit Shah ने सख्त लहजे में कहा, “मुझे उकसाओ मत, मैं तय करके आया हूं और पूरी बात बताकर ही जाऊंगा।” इसके बाद उन्होंने विस्तार से सरकार की रणनीति, उपलब्धियां और आंकड़े प्रस्तुत किए।
गृह मंत्री ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 406 नए फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा रात के समय ऑपरेशन को प्रभावी बनाने के लिए 68 नाइट लैंडिंग हेलीपैड बनाए गए हैं। जवानों की सुरक्षा के लिए 400 से अधिक बुलेटप्रूफ वाहन तैनात किए गए हैं और घायल सुरक्षाकर्मियों के इलाज के लिए 5 विशेष अस्पताल स्थापित किए गए हैं।
सरकार की कार्रवाई का असर भी सामने आया है। शाह ने बताया कि अब तक 706 नक्सली मारे जा चुके हैं, 2218 गिरफ्तार किए गए हैं और 4839 ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की है ।
उन्होंने नक्सलवाद को केवल विकास की कमी नहीं बल्कि एक विचारधारात्मक समस्या बताया। उनके अनुसार यह एक हिंसक वामपंथी सोच है जो लोकतांत्रिक व्यवस्था को चुनौती देती है। शाह ने कहा कि भारत “सत्यमेव जयते” के सिद्धांत पर चलता है, जबकि नक्सली “बंदूक की नली से सत्ता” की बात करते हैं।
चर्चा के दौरान Kangana Ranaut ने भी सरकार की नीतियों का समर्थन करते हुए कहा कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था ने नक्सलियों की फंडिंग को कमजोर किया है। वहीं Asaduddin Owaisi समेत विपक्ष के अन्य नेताओं ने सरकार के दावों पर सवाल उठाए और अधिक पारदर्शिता की मांग की।
उसी दिन लोकसभा ने इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (संशोधन) बिल, 2025 को वॉयस वोट से पास कर दिया, जिसे Nirmala Sitharaman ने पेश किया था।
भारत में नक्सलवाद की शुरुआत 1960 के दशक में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी आंदोलन से हुई थी। धीरे-धीरे यह विचारधारा छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में फैल गई। इन इलाकों को “रेड कॉरिडोर” कहा जाने लगा।
सरकार का दावा है कि 2014 के बाद से नक्सलवाद के खिलाफ नीति में बड़ा बदलाव आया है, जिसमें सुरक्षा के साथ-साथ विकास को भी प्राथमिकता दी गई। प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में सड़क, बिजली, शिक्षा और डिजिटल कनेक्टिविटी पर जोर दिया गया।
सरकार की रणनीति का असर अब जमीन पर दिखाई देने लगा है। कई इलाकों में जहां पहले चुनाव कराना मुश्किल था, अब वहां मतदान शांतिपूर्ण ढंग से हो रहा है।
नक्सलवाद के कमजोर होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी फायदा मिला है। निवेश बढ़ा है, रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं और आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हुआ है।
हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि पूरी तरह से समस्या खत्म होने का दावा अभी जल्दबाजी हो सकता है, क्योंकि कुछ क्षेत्रों में अब भी सक्रियता बनी हुई है।
गृह मंत्री Amit Shah ने स्पष्ट कहा कि “यह नरेंद्र मोदी सरकार है, जो भी हथियार उठाएगा उसे बख्शा नहीं जाएगा।” उन्होंने यह भी कहा कि अब बस्तर जैसे क्षेत्रों में नक्सलवाद लगभग समाप्त हो चुका है और देश तेजी से “नक्सलमुक्त भारत” की ओर बढ़ रहा है।
वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने IBC संशोधन बिल पर कहा कि इसका उद्देश्य केवल कर्ज वसूली नहीं बल्कि संकटग्रस्त कंपनियों को पुनर्जीवित करना है।
संसद में हुई इस बहस को केवल राजनीतिक बयानबाजी के रूप में नहीं देखा जा सकता। यह देश की आंतरिक सुरक्षा और विकास मॉडल के बीच संतुलन की बहस भी है।
सरकार जहां नक्सलवाद को विचारधारा आधारित हिंसा बताकर कड़ा रुख अपनाने की बात कर रही है, वहीं विपक्ष विकास और सामाजिक न्याय के पहलुओं को भी महत्वपूर्ण मानता है।
वास्तविकता यह है कि नक्सलवाद जैसी समस्या केवल सुरक्षा बलों के जरिए पूरी तरह खत्म नहीं हो सकती। इसके लिए शिक्षा, रोजगार, सामाजिक न्याय और स्थानीय समुदायों के विश्वास को जीतना भी उतना ही जरूरी है।
IBC संशोधन बिल का पारित होना यह दिखाता है कि सरकार आर्थिक सुधारों के जरिए निवेश और व्यापार को बढ़ावा देना चाहती है, जो दीर्घकाल में रोजगार और विकास को गति दे सकता है।
लोकसभा में हुई यह बहस कई मायनों में महत्वपूर्ण रही। एक ओर सरकार ने नक्सलवाद पर अपनी उपलब्धियों और रणनीति को मजबूती से रखा, वहीं विपक्ष ने सवाल उठाकर लोकतांत्रिक विमर्श को जीवंत बनाए रखा।
आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या सरकार का “नक्सलमुक्त भारत” का लक्ष्य पूरी तरह हासिल हो पाता है या इसके लिए और व्यापक सामाजिक-आर्थिक उपायों की जरूरत होगी।
1. नक्सलवाद क्या है?
नक्सलवाद एक वामपंथी उग्रवादी आंदोलन है जो हिंसा के जरिए सत्ता परिवर्तन की बात करता है।
2. सरकार ने नक्सलवाद के खिलाफ क्या कदम उठाए हैं?
सुरक्षा बलों की तैनाती, विकास योजनाएं, आत्मसमर्पण नीति और इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण।
3. क्या नक्सलवाद खत्म हो गया है?
सरकार का दावा है कि यह काफी हद तक कम हुआ है, लेकिन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ।
4. IBC संशोधन बिल का क्या महत्त्व है?
यह कानून दिवालिया कंपनियों के समाधान को तेज और प्रभावी बनाने के लिए लाया गया है।
5. इस बहस का आम जनता पर क्या असर पड़ेगा?
बेहतर सुरक्षा, निवेश में वृद्धि और रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना।
“मुझे उकसाओ मत, पूरी बात बताकर जाऊंगा” — संसद में अमित शाह का नक्सलवाद पर सख्त संदेश