वेदांता ग्रुप के चेयरमैन और संस्थापक अनिल अग्रवाल एक ऐसे उद्योगपति हैं जिनका सफर बिहार के पटना से शुरू होकर वैश्विक बिजनेस के शिखर तक पहुंचा। उन्होंने बिना किसी बड़े संसाधन के शुरुआत करते हुए आज दुनिया भर में फैले खनन, धातु और ऊर्जा उद्योग के एक प्रमुख नेता के रूप में अपनी पहचान बनाई।
अनिल अग्रवाल का जीवन-सफर पटना के एक मध्यम वर्गीय मारवाड़ी परिवार में शुरू हुआ। बचपन में सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई के साथ धातु कारोबार में अनुभव जुटाया और 1970 के दशक में स्क्रैप धातु व्यवसाय से अपने उद्यमी यात्रा की शुरुआत की। बाद में उन्होंने वेदांता समूह की नींव रखी और इसे एक बड़ी वैश्विक कंपनी में तब्दील किया।
उनकी पत्नी किरण अग्रवाल न केवल परिवार के सहयोगी रूप में रही हैं, बल्कि वे सामाजिक और व्यापारिक मामलों में भी सक्रिय भूमिका निभाती हैं। अग्रवाल दंपति की दो संतानें हैं — बेटे अग्निवेश अग्रवाल और बेटी प्रिया अग्रवाल हेब्बर।
हाल ही में अनिल अग्रवाल के परिवार को एक बड़ा दुःख सहना पड़ा जब उनके बेटे अग्निवेश अग्रवाल का अमेरिका में निधन हो गया। अग्निवेश वेदांता समूह की एक इकाई के बोर्ड सदस्य थे और उन्हें कंपनी और समाज दोनों में सक्रिय भूमिका निभाते देखा गया था। न्यूयॉर्क में स्कीइंग के दौरान हुए हादसे के बाद इलाज के दौरान उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। अनिल अग्रवाल ने इसे अपने जीवन का “सबसे दुखद दिन” बताया।
उनकी बेटी प्रिया अग्रवाल हेब्बर वेदांता के बोर्ड में मौजूद हैं और हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की चेयरपर्सन भी हैं। वह समाज सेवा, कॉर्पोरेट गवर्नेंस और पर्यावरण-सतत विकास के क्षेत्रों में भी सक्रिय हैं।
पटना से निकलकर दुनिया भर के उद्यमों में नेतृत्व तक पहुँचने तक अनिल अग्रवाल की यात्रा ने उन्हें न सिर्फ एक सफल उद्योगपति, बल्कि बिहार के लिए एक प्रेरणास्पद उदाहरण भी बनाया है।