अरविंद केजरीवाल की पेशी पर सियासी घमासान, सौरभ भारद्वाज की मांग- विशेषाधिकार समिति की कार्यवाही हो लाइव

अरविंद केजरीवाल की पेशी पर सियासी घमासान, सौरभ भारद्वाज की मांग- विशेषाधिकार समिति की कार्यवाही हो लाइव
March 6, 2026 at 2:16 pm

दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को फांसी घर से जुड़े मामले में पेश होने का समन जारी किया है। इस मुद्दे पर अब सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है।


आम आदमी पार्टी (आप) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने मांग की है कि विशेषाधिकार समिति की पूरी कार्यवाही का लाइव प्रसारण किया जाए, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे और जनता भी सच्चाई देख सके।


केजरीवाल को समिति के सामने क्यों बुलाया गया?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने फांसी घर से जुड़े मामले में अरविंद केजरीवाल को शुक्रवार को समिति के सामने पेश होने के लिए कहा है। इसी को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।


सौरभ भारद्वाज ने कहा कि संसद और सभी राज्य विधानसभाओं में समितियां होना सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन किसी पूर्व मुख्यमंत्री को समिति के सामने बुलाना एक नई परंपरा की शुरुआत हो सकती है।


भाजपा के कदम पर आप का सवाल

सौरभ भारद्वाज ने कहा कि भाजपा सरकार को इस फैसले के राजनीतिक परिणामों को समझना चाहिए। उनका कहना है कि अगर एक पूर्व मुख्यमंत्री को इस तरह समिति के सामने बुलाया जाता है तो इसके दूरगामी राजनीतिक प्रभाव हो सकते हैं।


उन्होंने दिल्ली विधानसभा के स्पीकर विजेंद्र गुप्ता से भी इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की।


लाइव प्रसारण को लेकर क्या बोली आप?

आप नेता ने कहा कि उनकी सरकार के समय कई समितियों की कार्यवाही पारदर्शिता के लिए लाइव दिखाई जाती थी और पत्रकारों को भी कवरेज के लिए बुलाया जाता था।


सौरभ भारद्वाज के मुताबिक,
अगर अरविंद केजरीवाल की पेशी हो रही है तो उसकी लाइव स्ट्रीमिंग में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। इससे किसी भी तरह के भ्रम या आरोप की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।


उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कार्यवाही का लाइव प्रसारण नहीं किया जाता है तो आखिर ऐसी क्या बात है जिसे सार्वजनिक करने से बचा जा रहा है।


आप का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में पारदर्शिता बेहद जरूरी है और जनता को पूरी प्रक्रिया देखने का अधिकार होना चाहिए।