दिल्ली को प्रदूषण और ट्रैफिक की दोहरी मार से निजात दिलाने के लिए रेखा गुप्ता सरकार ने बड़ा ट्रांसपोर्ट प्लान तैयार किया है। सरकार की नई ग्रीन ट्रांसपोर्ट नीति के तहत दिल्ली को दो नए ‘नमो भारत’ रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) कॉरिडोर मिलने जा रहे हैं, जिनके शुरू होते ही राजधानी की सड़कों से करीब 2 लाख वाहन एक झटके में कम हो जाएंगे।
रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली–पानीपत–करनाल और दिल्ली–गुरुग्राम–बावल RRTS कॉरिडोर की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार हो चुकी है। इन हाई-स्पीड रेल कॉरिडोरों का मकसद सिर्फ यात्रा समय घटाना नहीं, बल्कि दिल्ली-NCR में ट्रैफिक जाम और वायु प्रदूषण को भी बड़े पैमाने पर कम करना है।
कैसे घटेगा ट्रैफिक और प्रदूषण?
प्रस्तावित रिपोर्ट के अनुसार, इन दोनों कॉरिडोरों के शुरू होते ही लाखों लोग निजी वाहनों की जगह पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपनाएंगे। इससे दिल्ली की सड़कों पर चलने वाले करीब 2 लाख वाहन कम हो जाएंगे, जो ट्रैफिक जाम और प्रदूषण दोनों में बड़ी राहत देगा।
दिल्ली–गुरुग्राम–बावल RRTS कॉरिडोर गुरुग्राम, मानेसर, MBIR और बावल जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों से होकर गुजरेगा। यह कॉरिडोर न केवल दिल्ली एयरपोर्ट को सीधा जोड़ेगा, बल्कि NCR के औद्योगिक इलाकों की कनेक्टिविटी भी मजबूत करेगा।
वहीं दिल्ली–पानीपत–करनाल कॉरिडोर से यात्री दिल्ली से करनाल महज 90 मिनट में पहुंच सकेंगे। मुरथल जैसे लोकप्रिय स्थलों तक का सफर अब घंटों के बजाय केवल 30 मिनट में पूरा किया जा सकेगा।
पहले से मिल रहा फायदा
दिल्ली–गाजियाबाद–मेरठ RRTS कॉरिडोर का 82 किमी में से 55 किमी हिस्सा पहले ही शुरू हो चुका है। इसके पूर्ण संचालन के बाद पब्लिक ट्रांसपोर्ट उपयोग 37% से बढ़कर 63% तक पहुंचने की उम्मीद है, जिससे हर साल 1 लाख से ज्यादा निजी वाहन कम होंगे और करीब 2.5 लाख टन कार्बन उत्सर्जन घटेगा।
‘नमो भारत’ बनेगा ग्रीन ट्रांसपोर्ट मॉडल
NCR ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) के अधिकारियों के अनुसार, रेल आधारित सिस्टम होने के कारण RRTS की ईंधन खपत सड़क वाहनों की तुलना में केवल एक-पांचवां हिस्सा है। इसी वजह से ‘नमो भारत’ को NCR के लिए एक पर्यावरण-अनुकूल (ग्रीन ट्रांसपोर्ट) विकल्प माना जा रहा है। अधिकांश स्टेशन मेट्रो और रेलवे नेटवर्क से जुड़े होंगे, जिससे यात्रियों को निर्बाध कनेक्टिविटी मिलेगी।
कितनी लंबाई के होंगे कॉरिडोर?
इन इलाकों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा
यह कॉरिडोर सोनीपत एजुकेशन सिटी, कुंडली, बरही इंडस्ट्रियल एरिया, पानीपत, IOCL रिफाइनरी और करनाल जैसे औद्योगिक व शैक्षणिक केंद्रों से होकर गुजरेगा। यहां से रोजाना लाखों लोग NCR की ओर सफर करते हैं, जिससे भारी ट्रैफिक और प्रदूषण होता है। RRTS के शुरू होने से इन क्षेत्रों में तेज, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल यात्रा संभव होगी।
तेज रफ्तार, कम समय
‘नमो भारत’ ट्रेनें औसतन 90 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलेंगी। स्टॉपेज के बावजूद ये ट्रेनें सड़क परिवहन के मुकाबले काफी कम समय में दूरी तय करेंगी। अधिकारियों के अनुसार, यह परियोजना न केवल यात्रा समय घटाएगी बल्कि पूरे NCR क्षेत्र को आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों फायदे देगी।