दिल्ली, गुड़गांव और द्वारका एक्सप्रेसवे के बीच रोजाना सफर करने वाले लाखों लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। ट्रैफिक जाम से परेशान यात्रियों को अब जल्द ही सिग्नल-फ्री सफर का विकल्प मिलने वाला है। गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMDA) ने दक्षिणी गुड़गांव को द्वारका एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए एक नया एलिवेटेड रोड बनाने की योजना को मंजूरी दी है। इस परियोजना पर करीब 755 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और इसे शहर के बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
अधिकारियों के अनुसार यह एलिवेटेड रोड लगभग 4.2 किलोमीटर लंबा होगा और इसे साउदर्न पेरिफेरल रोड (SPR) के साथ बनाया जाएगा। यह सड़क खेरकी दौला टोल प्लाजा के पास नेशनल हाईवे-48 से शुरू होकर वटिका चौक तक जाएगी। इस मार्ग को पूरी तरह सिग्नल-फ्री बनाया जाएगा ताकि वाहनों को बिना रुके तेजी से आगे बढ़ने का रास्ता मिल सके।
इस परियोजना में मुख्य सड़क छह लेन की बनाई जाएगी, जिसमें तीन लेन एक तरफ और तीन लेन दूसरी तरफ होंगी। इसके अलावा दोनों तरफ सर्विस रोड भी तैयार की जाएंगी ताकि लोकल ट्रैफिक को अलग रास्ता मिल सके और मुख्य मार्ग पर भीड़ कम रहे। प्रमुख जंक्शनों पर ऊपर-नीचे आने-जाने के लिए दो लेन के रैंप बनाए जाएंगे, जिससे वाहन आसानी से एलिवेटेड रोड पर चढ़ और उतर सकेंगे।
परियोजना के लिए टेंडर जारी किया जा चुका है और निर्माण कार्य शुरू होने के बाद इसे लगभग 30 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यदि काम तय समय पर पूरा हुआ तो 2028-29 तक यह सड़क चालू हो सकती है।
गुड़गांव पिछले एक दशक में देश के सबसे तेजी से विकसित होने वाले शहरों में शामिल हो गया है। यहां आईटी कंपनियों, कॉरपोरेट ऑफिस, नए रिहायशी सेक्टर और मॉल-कॉम्प्लेक्स की संख्या तेजी से बढ़ी है। इसी वजह से शहर की सड़कों पर वाहनों का दबाव कई गुना बढ़ गया है।
खासकर राजीव चौक, सुभाष चौक, सोहना रोड और दिल्ली-जयपुर हाईवे जैसे इलाके हमेशा ट्रैफिक जाम के लिए जाने जाते हैं। दक्षिणी गुड़गांव के सेक्टर 69 से 75 और आसपास के नए सेक्टरों में रहने वाले लोगों को द्वारका एक्सप्रेसवे या दिल्ली जाने के लिए लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। इसी समस्या को हल करने के लिए एलिवेटेड रोड का प्रस्ताव तैयार किया गया।
साउदर्न पेरिफेरल रोड को पहले ही शहर की महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी लाइन माना जाता है। अब इस पर एलिवेटेड कॉरिडोर बनने से यह रास्ता और ज्यादा उपयोगी हो जाएगा।
इस परियोजना के पूरा होने के बाद सबसे ज्यादा फायदा उन लोगों को होगा जो रोजाना गुड़गांव से दिल्ली या द्वारका एक्सप्रेसवे की तरफ यात्रा करते हैं। अभी पीक आवर्स में जहां 40 से 60 मिनट तक लग जाते हैं, वहीं नए एलिवेटेड रोड के बाद यह सफर 10-15 मिनट में पूरा हो सकता है।
ट्रैफिक कम होने से ईंधन की बचत होगी, जिससे लोगों का खर्च घटेगा और प्रदूषण भी कम होगा। इसके अलावा नए रोड नेटवर्क से आसपास के इलाकों में प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ने की संभावना है। रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर कनेक्टिविटी से सेक्टर 69 से 75 और SPR के आसपास के क्षेत्रों में निवेश तेजी से बढ़ सकता है।
राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो इस तरह की परियोजनाएं बड़े शहरों में स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम विकसित करने की दिशा में जरूरी मानी जा रही हैं। सरकार का फोकस अब ऐसी हाई-कैपेसिटी सड़कों पर है जो भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई जाएं।
GMDA के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पी.सी. मीणा ने कहा कि गुरुग्राम की आबादी और वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में शहर को बेहतर सड़क नेटवर्क की जरूरत है। उन्होंने बताया कि एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट को भविष्य की ट्रैफिक जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है और इससे लंबे समय तक जाम की समस्या कम करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि वटिका चौक पर एक बड़ा इंटरचेंज बनाया जाएगा, जिससे साउदर्न पेरिफेरल रोड को गुड़गांव-सोहना एलिवेटेड कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा। इससे कई दिशाओं में आने-जाने वाले वाहनों को सीधा रास्ता मिलेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार गुड़गांव में ट्रैफिक की समस्या केवल सड़कों की कमी की वजह से नहीं है, बल्कि तेजी से बढ़ते शहरी विस्तार के कारण भी है। नई कॉलोनियों और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स बनने से सड़क नेटवर्क पर दबाव बढ़ जाता है। ऐसे में एलिवेटेड रोड जैसे प्रोजेक्ट अस्थायी राहत के साथ-साथ लंबे समय की योजना का हिस्सा भी होते हैं।
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सड़कें बनाना ही समाधान नहीं है। इसके साथ सार्वजनिक परिवहन को भी मजबूत करना जरूरी है। यदि मेट्रो, बस और अन्य विकल्प बेहतर होंगे तो निजी वाहनों की संख्या कम होगी और ट्रैफिक की समस्या स्थायी रूप से घटेगी।
फिर भी, मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह परियोजना गुड़गांव और दिल्ली के बीच कनेक्टिविटी सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
दिल्ली-गुड़गांव के बीच रोजाना यात्रा करने वाले लोगों के लिए एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट बड़ी राहत लेकर आ सकता है। 755 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह सिग्नल-फ्री सड़क न केवल समय बचाएगी बल्कि ट्रैफिक जाम और प्रदूषण को भी कम करेगी। यदि परियोजना तय समय पर पूरी होती है तो आने वाले वर्षों में गुड़गांव का रोड नेटवर्क पहले से ज्यादा मजबूत और आधुनिक दिखाई देगा।
Q1. एलिवेटेड रोड कहां बनेगा?
यह रोड खेरकी दौला टोल के पास NH-48 से वटिका चौक तक बनेगा।
Q2. इस परियोजना की लागत कितनी है?
लगभग 755 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
Q3. सड़क कितनी लंबी होगी?
करीब 4.2 किलोमीटर लंबा सिग्नल-फ्री एलिवेटेड रोड बनाया जाएगा।
Q4. कब तक पूरा होगा प्रोजेक्ट?
निर्माण शुरू होने के बाद लगभग 30 महीने में पूरा करने का लक्ष्य है।
Q5. किसे सबसे ज्यादा फायदा होगा?
दक्षिणी गुड़गांव, द्वारका एक्सप्रेसवे और दिल्ली जाने वाले यात्रियों को सबसे ज्यादा राहत मिलेगी।
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