महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद उनकी पार्टी एनसीपी में भारी उथल-पुथल शुरू हो गई है। हालात ऐसे बन गए हैं कि पार्टी दो धड़ों में बंटती नजर आ रही है। एक गुट महायुति के साथ बने रहने के पक्ष में है, जबकि दूसरा शरद पवार के साथ दोबारा जुड़ने की तैयारी में दिख रहा है।
सूत्रों के अनुसार, अजित पवार के निधन के बाद उनकी राजनीतिक विरासत को लेकर पार्टी में असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। कई नेता मानते हैं कि अजित पवार के बिना एनसीपी (अजित गुट) को एकजुट रखना मुश्किल होगा। यही वजह है कि अब पार्टी के भीतर खींचतान खुलकर सामने आ रही है।
मर्जर की तैयारी थी, लेकिन बदल गया पूरा समीकरण
बताया जा रहा है कि अजित पवार के जीवित रहते ही एनसीपी के दोनों गुटों के विलय को लेकर बातचीत अंतिम चरण में थी। फरवरी के दूसरे सप्ताह में शरद पवार और अजित पवार गुट के एक होने की औपचारिक घोषणा हो सकती थी। पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनावों में दोनों गुटों का साथ लड़ना इसी दिशा का संकेत माना जा रहा था।
लेकिन 28 जनवरी 2026 को बारामती में हुए प्लेन क्रैश में अजित पवार के निधन के बाद यह पूरा समीकरण बिगड़ गया।
बीजेपी की क्यों बढ़ी टेंशन?
राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी चाहती है कि अजित पवार गुट महायुति में ही बना रहे। पार्टी को आशंका है कि अगर यह गुट शरद पवार के साथ चला गया तो एकनाथ शिंदे की शिवसेना और खुद बीजेपी की राजनीतिक मजबूती प्रभावित हो सकती है।
यही वजह है कि मौजूदा हालात को बीजेपी के लिए बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।
अब कौन संभालेगा अजित पवार की विरासत?
अजित पवार के निधन के बाद एनसीपी (अजित गुट) में नेतृत्व को लेकर असमंजस बना हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार का नाम सबसे आगे चल रहा है।
इसके अलावा प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे भी संभावित दावेदार माने जा रहे हैं।
हालांकि, पार्टी के भीतर अभी तक किसी नाम पर सहमति नहीं बन पाई है। ऐसे में आने वाले दिन तय करेंगे कि अजित पवार की राजनीतिक विरासत कौन संभालेगा और एनसीपी की दिशा क्या होगी।