स्कूल बंद थे, फिर भी खाना दिखाया गया: राजस्थान मिड-डे मील योजना में 2000 करोड़ का कथित घोटाला उजागर

स्कूल बंद थे, फिर भी खाना दिखाया गया: राजस्थान मिड-डे मील योजना में 2000 करोड़ का कथित घोटाला उजागर
January 9, 2026 at 2:51 pm

राजस्थान की एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने मिड-डे मील योजना में करीब 2000 करोड़ रुपये के बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि कोरोना महामारी के दौरान जब राज्य के स्कूल पूरी तरह बंद थे, उस समय भी बच्चों को भोजन वितरित किए जाने के नाम पर सरकारी धन का भुगतान कर दिया गया।

एसीबी ने इस मामले में राजस्थान राज्य सहकारी उपभोक्ता संघ लिमिटेड (कॉन्फेड), केंद्रीय भंडार और कई निजी कंपनियों से जुड़े कुल 21 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि बिना किसी वास्तविक आपूर्ति के फर्जी और बढ़ा-चढ़ाकर बिल तैयार किए गए, जिनके आधार पर भुगतान कराया गया।

सूत्रों के अनुसार, इस घोटाले में राजनीतिक संबंध भी सामने आए हैं। पूर्व मंत्री और वर्तमान में भाजपा नेता राजेंद्र यादव के बेटे मधुर यादव और त्रिभुवन यादव सहित उनके कुछ रिश्तेदारों के नाम भी एफआईआर में दर्ज किए गए हैं। इन पर निजी कंपनियों के संचालन और वित्तीय लेन-देन में भूमिका निभाने का आरोप है।

क्या है पूरा मामला?

कोरोना काल के दौरान तत्कालीन सरकार ने कॉन्फेड के माध्यम से स्कूली बच्चों को दाल, तेल, मसाले और अन्य जरूरी खाद्य सामग्री वाले ‘कॉम्बो पैक’ उपलब्ध कराने की योजना बनाई थी। दावा किया गया कि ये पैकेट बच्चों के घर-घर पहुंचाए गए ताकि स्कूल बंद होने की स्थिति में भी पोषण सुनिश्चित किया जा सके।

हालांकि, एसीबी की जांच में सामने आया कि कई मामलों में न तो कोई सामान खरीदा गया और न ही वितरण हुआ। इसके बावजूद कागजों में सप्लाई दिखाकर भुगतान जारी कर दिया गया। कई बिल पूरी तरह फर्जी पाए गए, जबकि कुछ में रकम को वास्तविक खर्च से कहीं अधिक दर्शाया गया।

एसीबी अधिकारियों का कहना है कि इस जालसाजी के चलते सरकारी खजाने को लगभग 2000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क की विस्तृत जांच कर रही है और आने वाले दिनों में और भी खुलासे होने की संभावना है।