मध्य पूर्व में अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब खाड़ी देशों तक पहुंच गया है। इसी तनाव के बीच अबू धाबी में फंसे अयोध्या के दशरथ महल के पीठाधीश्वर स्वामी देवेन्द्र प्रसादाचार्य आखिरकार सुरक्षित भारत लौट आए हैं। अयोध्या पहुंचने के बाद उन्होंने वहां के हालात का आंखों देखा हाल बताया।
स्वामी देवेन्द्र प्रसादाचार्य 27 फरवरी को धार्मिक यात्रा के लिए अबू धाबी गए थे। उनका उद्देश्य वहां स्थित स्वामीनारायण मंदिर में दर्शन-पूजन करना था। लेकिन इसी दौरान मध्य पूर्व में अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच तनाव बढ़ गया और कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दी गईं। इसके कारण वे और उनके साथ गए अन्य लोग अबू धाबी में ही फंस गए।
पास ही था अमेरिकी एयरबेस, सुनाई देते थे धमाके
अयोध्या पहुंचने के बाद उन्होंने बताया कि जहां वे ठहरे हुए थे, वहां से करीब 5 किलोमीटर की दूरी पर अमेरिका का एयरबेस था। इसी एयरबेस को निशाना बनाकर ईरान की ओर से मिसाइल हमले किए जा रहे थे।
उन्होंने बताया कि मिसाइल हमलों की आवाजें इतनी तेज होती थीं कि आसपास के इलाकों में साफ सुनाई देती थीं। कई बार धमाके की आवाजें दिवाली के पटाखों जैसी लगती थीं, जिससे वहां मौजूद लोगों में डर का माहौल बन जाता था।
हर धमाके के बाद बढ़ जाता था डर
स्वामी देवेन्द्र प्रसादाचार्य के अनुसार, जब भी मिसाइल हमला होता था तो कुछ समय के लिए लोग घबरा जाते थे। हालांकि कुछ घंटों बाद हालात सामान्य हो जाते थे, लेकिन लगातार हमलों की खबरों से सभी चिंतित थे।
उन्होंने बताया कि उस दौरान भारत सरकार और गृह मंत्रालय से भी संपर्क किया गया था। सरकार की ओर से भरोसा दिलाया गया था कि वहां फंसे भारतीयों को सुरक्षित भारत वापस लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
फ्लाइट कैंसिल होने से बढ़ी परेशानी
उन्होंने बताया कि उनकी वापसी की फ्लाइट भी एक बार रद्द हो गई थी। इस कारण उनकी वापसी में देरी हुई। हालांकि बाद में स्थिति सामान्य होने पर वे सुरक्षित अयोध्या लौट आए।
“धमाके के बीच हम करते थे सीताराम का जाप”
स्वामी देवेन्द्र प्रसादाचार्य ने बताया कि जब भी धमाकों की आवाज आती थी, तब वे और उनके साथ मौजूद लोग सीताराम का जाप करते थे। उन्होंने कहा कि उन्हें भगवान राम की कृपा पर पूरा विश्वास था और उसी भरोसे से वे इस कठिन स्थिति में भी शांत रहे।
उन्होंने कहा कि अब वे सकुशल अयोध्या पहुंच चुके हैं और भगवान राम की कृपा से पूरी यात्रा सुरक्षित रही।
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