उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में सिटी मजिस्ट्रेट रहे अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफा और उसके तुरंत बाद हुआ निलंबन अब एक बड़े प्रशासनिक विवाद का रूप ले चुका है। इस मामले ने न सिर्फ सरकारी गलियारों में हलचल मचा दी है, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं को भी तेज कर दिया है।
माघ मेले के दौरान लगातार नौवें दिन अनशन पर बैठे ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे “बेहद दुर्भाग्यपूर्ण” बताया। उन्होंने कहा कि किसी अधिकारी का इस तरह आहत होकर पद छोड़ना यह दर्शाता है कि उसके साथ मानसिक दबाव बनाया गया।
✦क्या है पूरा मामला?
सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने हाल ही में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफे के साथ उन्होंने जिला प्रशासन और जिलाधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि उन्हें जबरन रोका गया, मानसिक दबाव डाला गया और आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया गया।
हालांकि, जिला प्रशासन ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि यह एक सामान्य प्रशासनिक बातचीत थी और किसी प्रकार का दबाव नहीं बनाया गया।
✦इस्तीफे के बाद क्यों हुआ निलंबन?
इस्तीफे के कुछ ही घंटों बाद राज्य सरकार ने अलंकार अग्निहोत्री को निलंबित कर दिया। शासन का कहना है कि—
इन्हीं कारणों से प्रथम दृष्टया उन्हें दोषी मानते हुए विभागीय जांच के आदेश दिए गए।
उठ रहे हैं बड़े सवाल
इस कार्रवाई के बाद कई अहम सवाल खड़े हो गए हैं:
कुछ वर्ग इसे अधिकारियों की आवाज दबाने की कोशिश बता रहे हैं, जबकि सरकार का कहना है कि अनुशासन सर्वोपरि है, चाहे अधिकारी किसी भी पद पर क्यों न हो।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल
इस पूरे घटनाक्रम ने यूपी प्रशासन में हलचल मचा दी है। विपक्षी दलों ने सरकार पर सवाल उठाए हैं, वहीं कई पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों ने भी इस पर चिंता जताई है।
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि विभागीय जांच में क्या निष्कर्ष निकलता है और क्या अलंकार अग्निहोत्री को न्याय मिलेगा या नहीं।