गाजियाबाद में साइबर अपराधियों के खिलाफ पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। ऑनलाइन ठगी और फर्जी ऐप्स के बढ़ते मामलों को देखते हुए गाजियाबाद पुलिस ने 8000 से ज्यादा मोबाइल नंबर और 5000 मोबाइल फोन के IMEI नंबर ब्लॉक कर दिए हैं। इसके साथ ही 200 से अधिक फर्जी मोबाइल ऐप्स और 30 वेबसाइटों को भी बंद कराया गया है।
एडीसीपी क्राइम पीयूष सिंह ने बताया कि यह कार्रवाई वर्ष 2025 से लगातार की जा रही है। साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे मोबाइल नंबर, ऐप्स और वेबसाइटों की लगातार निगरानी की जा रही है, ताकि आम नागरिकों को ठगी से बचाया जा सके।
कैसे रचा जाता है साइबर ठगी का जाल?
साइबर ठग लोगों को फंसाने के लिए फर्जी लिंक, इन्वेस्टमेंट स्कीम और सोशल मीडिया विज्ञापनों का सहारा लेते हैं।
अक्सर यूजर्स को:
एक बार APK इंस्टॉल होते ही मोबाइल का कंट्रोल ठगों के हाथ में चला जाता है, जिससे OTP, पासवर्ड और बैंक डाटा आसानी से चोरी हो जाता है।
साइबर पुलिस की सख्त निगरानी
गाजियाबाद साइबर सेल की टीम लगातार ऐसे नेटवर्क की पहचान कर रही है जो ठगी में शामिल हैं।
अब तक:
पुलिस का कहना है कि यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।
साइबर ठगी से कैसे बचें?
गाजियाबाद पुलिस ने आम लोगों के लिए कुछ जरूरी सलाह जारी की है:
✔ अनजान लिंक पर क्लिक न करें
✔ व्हाट्सएप या SMS से आई APK फाइल डाउनलोड न करें
✔ ऐप केवल Google Play Store या ऑफिशियल प्लेटफॉर्म से ही इंस्टॉल करें
✔ निवेश से पहले कंपनी की जांच जरूर करें
✔ ज्यादा मुनाफे का लालच देने वाली स्कीम से बचें
ठगी होने पर क्या करें?
अगर आप साइबर ठगी का शिकार हो जाते हैं तो बिना देर किए:
साइबर क्राइम हेल्पलाइन– 1930
या नजदीकी साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराएं
समय पर की गई शिकायत से न केवल पैसा वापस मिलने की संभावना बढ़ती है, बल्कि अपराधियों तक पहुंचना भी आसान हो जाता है।