गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। मंगलवार देर रात सामने आई इस दर्दनाक घटना के बाद से हर किसी के मन में एक ही सवाल है—आख़िर ऐसा क्या हुआ कि तीन मासूम बच्चियों ने एक साथ मौत को गले लगा लिया?
शुरुआत में इस घटना को लेकर कई तरह के कयास लगाए गए। कहीं इसे ऑनलाइन गेम से जोड़ा गया तो कहीं किसी साजिश की आशंका जताई गई। हालांकि, पुलिस जांच आगे बढ़ने के साथ-साथ अब तस्वीर धीरे-धीरे साफ़ होती जा रही है।
क्या है पूरा मामला?
गाजियाबाद के ट्रांस हिंडन क्षेत्र स्थित एक हाउसिंग सोसाइटी में मंगलवार देर रात तीन नाबालिग बहनों ने नौवीं मंज़िल के फ्लैट की बालकनी से छलांग लगा दी। गंभीर हालत में तीनों को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें बच्चियों ने अपने माता-पिता से माफी मांगते हुए लिखा है कि वे जिस दुनिया और कल्चर से जुड़ी थीं, उससे उन्हें जबरन दूर किया जा रहा था।
मोबाइल और डिजिटल कंटेंट की लत
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि तीनों बच्चियां मोबाइल फोन और डिजिटल कंटेंट की आदी हो चुकी थीं। वे कोरियन म्यूजिक, मूवीज़, कार्टून, यूट्यूब वीडियोज़ और ऑनलाइन गेम्स से बेहद प्रभावित थीं।
परिवार के लोगों ने जब मोबाइल का इस्तेमाल सीमित किया और फोन उनसे ले लिया गया, तो बच्चियों के व्यवहार में बदलाव आने लगा। पुलिस के अनुसार, मोबाइल से दूरी ही इस कदम की एक बड़ी वजह बन सकती है।
पारिवारिक पृष्ठ भूमि
मृत बच्चियों के पिता की दो शादियां हुई हैं और पूरा परिवार एक ही घर में रहता था। घर में कुल पांच बच्चे थे, जिनमें एक मूक-बधिर भी शामिल है। जानकारी के मुताबिक, तीनों बच्चियां पिछले दो-तीन सालों से स्कूल भी नहीं जा रही थीं।
पुलिस ने सभी मोबाइल फोन जब्त कर लिए हैं और उनकी फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है ताकि यह साफ़ हो सके कि बच्चियां किन ऐप्स और कंटेंट से जुड़ी थीं।
सुसाइड नोट में क्या लिखा?
सुसाइड नोट में बच्चियों ने लिखा कि वे कोरियन कल्चर से बेहद जुड़ाव महसूस करती थीं और परिवार उन्हें इससे अलग करने की कोशिश कर रहा था। नोट में यह भी कहा गया कि अब उनके माता-पिता को समझ आएगा कि वे उस दुनिया से कितना प्यार करती थीं।
हालांकि पुलिस ने साफ किया है कि अब तक किसी भी टास्क-बेस्ड या खतरनाक ऑनलाइन गेम का ठोस सबूत नहीं मिला है।
पुलिस जांच कहां तक पहुंची?
डीसीपी ट्रांस हिंडन के मुताबिक, यह मामला पूरी तरह से आत्महत्या का है। फिलहाल ऑनलाइन गेमिंग, मोबाइल एडिक्शन, पारिवारिक माहौल और आर्थिक स्थिति—सभी पहलुओं से जांच की जा रही है। पुलिस किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले हर एंगल की पड़ताल कर रही है।
एक्सपर्ट की राय
क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट का मानना है कि यह घटना डिजिटल लत को लेकर एक गंभीर चेतावनी है। बच्चों में चिड़चिड़ापन, अकेले रहने की आदत, पढ़ाई से दूरी और भावनात्मक बदलाव जैसे संकेतों को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। ज़रूरत सख़्ती की नहीं, बल्कि संवाद और समझ की है।
प्रत्यक्ष दर्शियों ने क्या देखा?
घटना के वक्त सोसाइटी में मौजूद लोगों ने बताया कि उन्होंने बालकनी में हलचल देखी और शोर मचाया, लेकिन कुछ ही पलों में तीनों बच्चियां नीचे गिर गईं। यह मंजर इतना भयावह था कि देखने वालों की रूह कांप उठी।
निष्कर्ष
गाजियाबाद की यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि समाज के लिए चेतावनी है। बच्चों की डिजिटल दुनिया, मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक संवाद पर गंभीरता से सोचने की ज़रूरत है, ताकि भविष्य में ऐसी कोई और मासूम ज़िंदगी न खोए।
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