90 घंटे बाद गिरफ्त में लैंबॉर्गिनी हादसे का आरोपी, शिवम मिश्रा आज कोर्ट में होगा पेश

90 घंटे बाद गिरफ्त में लैंबॉर्गिनी हादसे का आरोपी, शिवम मिश्रा आज कोर्ट में होगा पेश
February 12, 2026 at 1:58 pm

आजकल कानपुर का लैंबॉर्गिनी हिट एंड रन मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। हर दिन इस केस से जुड़े नए खुलासे सामने आ रहे हैं। शुरुआत में दावा किया गया कि हादसे के वक्त कार कोई और चला रहा था, लेकिन सामने आए वीडियो ने पूरी कहानी बदल दी। वीडियो में साफ दिखा कि लैंबॉर्गिनी की स्टेयरिंग खुद शिवम मिश्रा के हाथ में थी।

90 घंटे बाद पुलिस की बड़ी कार्रवाई

तेज रफ्तार लैंबॉर्गिनी से छह लोगों को कुचलने वाला आरोपी शिवम मिश्रा आखिरकार पुलिस की पकड़ में आ गया है। सूत्रों के मुताबिक, करीब 90 घंटे की तलाश के बाद कानपुर पुलिस कमिश्नर के निर्देशन में गठित स्पेशल टीम ने उसे गिरफ्तार किया। मेडिकल जांच के बाद आरोपी को कुछ ही देर में अदालत में पेश किया जाएगा।

क्या है पूरा मामला?

यह दर्दनाक हादसा रविवार रात 8 फरवरी को हुआ। बताया जा रहा है कि तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा का बेटा शिवम मिश्रा अपनी महंगी लैंबॉर्गिनी कार से शहर की वीआईपी रोड पर तेज रफ्तार में जा रहा था। इसी दौरान कार बेकाबू हो गई और राह चलते लोगों को टक्कर मारती चली गई।


हादसे में छह लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पहले कार ने एक ऑटो-रिक्शा को टक्कर मारी, फिर सड़क किनारे खड़ी मोटरसाइकिल से जा भिड़ी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक सवार करीब 10 फीट तक उछल गया।

ड्राइवर ने किया था सरेंडर का प्रयास

इस हाई-प्रोफाइल केस में एक नया मोड़ तब आया, जब ड्राइवर मोहन ने खुद को वाहन चालक बताते हुए कोर्ट में सरेंडर किया। उसका दावा था कि तकनीकी खराबी के कारण हादसा हुआ। हालांकि पुलिस रिकॉर्ड में उसका नाम न होने के चलते अदालत ने आत्मसमर्पण स्वीकार करने से इनकार कर दिया और याचिका खारिज कर दी।

अदालत ने साथ ही कार को रिलीज करने की अर्जी पर पुलिस से तकनीकी जांच रिपोर्ट भी तलब की है।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे हाई-प्रोफाइल केस

भारत में यह पहला मामला नहीं है जब रसूखदारों से जुड़े सड़क हादसों ने देशभर में बहस छेड़ी हो।

  • सलमान खान हिट एंड रन केस (2002) में भी ड्राइवर को दोषी ठहराने की दलील दी गई थी।
  • बीएमडब्ल्यू केस (1999) में दिल्ली में छह लोगों की मौत के बाद लंबी कानूनी लड़ाई चली।
  • पुणे पोर्श कांड (2024) में नाबालिग आरोपी को बचाने की कोशिशों ने सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े किए।


आगे क्या?

अब सबकी नजरें अदालत की कार्यवाही पर टिकी हैं। देखना होगा कि कानपुर के इस चर्चित हिट एंड रन केस में कानून कितना सख्त रुख अपनाता है और पीड़ितों को कब न्याय मिलता है।