प्रयागराज में ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का गंगा स्नान को लेकर अनशन दूसरे दिन भी जारी है। मौनी अमावस्या पर संगम में प्रोटोकॉल के तहत स्नान की मांग को लेकर शुरू हुआ विवाद अब साधु-संतों और प्रशासन के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
शंकराचार्य रविवार दोपहर से माघ मेला क्षेत्र स्थित अपने शिविर में अनशन पर बैठे हैं। उनकी मांग है कि उन्हें पूरे सम्मान और परंपरागत प्रोटोकॉल के साथ संगम नोज तक ले जाकर स्नान कराया जाए। सोमवार को दोपहर 12 बजे वे इस मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी बात रखेंगे।
दरअसल, मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य अपने शिष्यों और पालकी के साथ संगम स्नान के लिए निकले थे, लेकिन भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने उन्हें सीमित संख्या में पैदल जाकर स्नान करने का सुझाव दिया। इस पर वे सहमत नहीं हुए। इसी दौरान शिष्यों और पुलिस के बीच हल्की धक्का-मुक्की भी हुई।
प्रशासन का कहना है कि संगम नोज पर उस दिन करीब 4.52 करोड़ श्रद्धालुओं ने स्नान किया, ऐसे में सुरक्षा और व्यवस्था सर्वोपरि थी। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सभी संतों और श्रद्धालुओं का सम्मान किया जाता है, लेकिन भीड़ के बीच किसी को विशेष प्रोटोकॉल देना संभव नहीं था।
घटना के बाद शंकराचार्य को संगम से वापस लौटा दिया गया, जिसके बाद से वे माघ मेला क्षेत्र के सेक्टर-4, त्रिवेणी रोड स्थित शिविर में अनशन पर हैं।
इस पूरे मामले पर कई संतों ने भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि यह कुंभ नहीं है, जहां अमृत स्नान जैसी विशेष व्यवस्थाएं दी जाएं। इतनी भारी भीड़ में किसी एक व्यक्ति के लिए विशेष सुविधा मांगना उचित नहीं है।
प्रशासन ने दोहराया है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और शांति व्यवस्था सर्वोपरि है और किसी को भी नियमों से ऊपर नहीं रखा जा सकता।