उत्तर प्रदेश में जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े पर लगाम लगाने के लिए योगी सरकार ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। अब राज्य में जमीन की रजिस्ट्री कराना पहले जैसा आसान नहीं होगा। फरवरी 2026 से रजिस्ट्री प्रक्रिया में आधार वेरिफिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है।
राज्य सरकार के इस फैसले के बाद अब बिना आधार प्रमाणीकरण के न तो जमीन खरीदी जा सकेगी और न ही बेची जा सकेगी। स्टांप एवं पंजीकरण विभाग ने इसकी तैयारियां पूरी कर ली हैं और सभी जिलों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
क्यों लिया गया यह फैसला?
बीते कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश में फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन हड़पने, बोगस रजिस्ट्रियों और बेनामी सौदों के कई मामले सामने आए हैं। इन्हीं गड़बड़ियों पर रोक लगाने के लिए सरकार ने आधार आधारित पहचान प्रणाली को अनिवार्य किया है।
क्या होगा नया बदलाव?
सरकार का कहना
स्टांप एवं पंजीकरण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, यह व्यवस्था पारदर्शिता बढ़ाने और आम लोगों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए लागू की जा रही है। इससे भूमाफिया और फर्जी रजिस्ट्रेशन नेटवर्क पर प्रभावी रोक लगेगी।
आम जनता को क्या फायदा?
कब से लागू होगा नियम?
फरवरी 2026 से पूरे उत्तर प्रदेश में लागू होगा नया नियम।