ढोल-नगाड़ों से हुआ स्वागत, मिठाई बंटी, लेकिन जांच में खुला सच — बुलंदशहर की शिखा का UPSC में 113वीं रैंक का दावा निकला गलत

ढोल-नगाड़ों से हुआ स्वागत, मिठाई बंटी, लेकिन जांच में खुला सच — बुलंदशहर की शिखा का UPSC में 113वीं रैंक का दावा निकला गलत
March 13, 2026 at 1:43 pm

देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में शामिल संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा को पास करना लाखों युवाओं का सपना होता है। इस परीक्षा में सफलता पाने वाले उम्मीदवार समाज के लिए प्रेरणा बन जाते हैं और उनकी कहानी तेजी से सुर्खियों में छा जाती है। लेकिन उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से सामने आए एक मामले ने सभी को चौंका दिया, जहां एक युवती के UPSC में 113वीं रैंक लाने का दावा जांच में गलत साबित हुआ। शुरुआत में जिस सफलता का जश्न ढोल-नगाड़ों और मिठाई बांटकर मनाया गया, वही बाद में प्रशासनिक जांच के बाद विवाद में बदल गया।


उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले की रहने वाली शिखा गौतम ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 113वीं रैंक हासिल करने का दावा किया था। रिजल्ट आने के बाद यह खबर स्थानीय स्तर पर तेजी से फैल गई और देखते ही देखते सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गई। कई स्थानीय लोगों ने उन्हें बधाई दी, शहर में मिठाइयां बांटी गईं और उनका ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत किया गया।


मामला तब पलटा जब दिल्ली की रहने वाली एक अन्य शिखा ने दावा किया कि UPSC में 113वीं रैंक उसी की है। इसके बाद यह मामला सीधे UPSC तक पहुंच गया। बताया जाता है कि दिल्ली की शिखा ने आयोग को ईमेल भेजकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की।


UPSC के निर्देश के बाद बुलंदशहर जिला प्रशासन को जांच करने के लिए कहा गया। जिलाधिकारी ने इस मामले की जांच ADM प्रशासन को सौंपी और फिर तहसील स्तर पर जांच कराई गई। प्रशासनिक टीम शिखा गौतम के घर पहुंची और उनसे रैंक से संबंधित दस्तावेज मांगे गए, लेकिन परिवार कोई ठोस प्रमाण नहीं दे सका।


जांच में सामने आया कि बुलंदशहर की शिखा UPSC की मुख्य परीक्षा (Mains) ही पास नहीं कर पाई थीं। जब कोई उम्मीदवार मुख्य परीक्षा पास नहीं करता, तो उसे इंटरव्यू के लिए बुलाया ही नहीं जाता। ऐसे में 113वीं रैंक लाने का दावा पूरी तरह गलत पाया गया।


जांच के दौरान यह भी सामने आया कि दस्तावेजों में नाम शिखा गौतम की जगह शिखा रानी लिखा हुआ था, जिससे शक और गहरा हो गया। बाद में परिवार ने भी प्रशासन के सामने स्वीकार किया कि उनसे गलती हुई और असली रैंक दिल्ली की शिखा की ही है।


UPSC सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिनी जाती है। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन अंतिम चयन बहुत कम लोगों का होता है। ऐसे में जब किसी छोटे शहर या साधारण परिवार से कोई उम्मीदवार सफलता हासिल करता है, तो उसकी कहानी तेजी से वायरल हो जाती है।


बुलंदशहर की शिखा को लेकर भी यही हुआ। कई जगह खबर चली कि वह एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की बेटी हैं और उन्होंने कठिन परिस्थितियों में पढ़ाई करके UPSC पास किया। इस भावनात्मक कहानी ने लोगों को प्रभावित किया और बिना पूरी पुष्टि के कई जगह इसे सच मान लिया गया।


इससे पहले भी देश के अलग-अलग राज्यों में UPSC को लेकर झूठे दावे सामने आ चुके हैं। बिहार में भी एक युवती ने गलत रैंक बताकर सुर्खियां बटोरी थीं, जिसे बाद में आयोग ने गलत बताया था।


इस तरह के मामलों का असर सिर्फ एक परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि समाज में गलत संदेश जाता है।

  • असली चयनित उम्मीदवार की मेहनत पर सवाल खड़े हो जाते हैं
  • लोगों का भरोसा मीडिया खबरों पर कम होता है
  • प्रशासन पर दबाव बनता है
  • प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर असर पड़ता है


विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया के दौर में बिना सत्यापन के खबर फैलना आसान हो गया है, जिससे ऐसे विवाद तेजी से बढ़ते हैं।


प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार जांच में कोई प्रमाण नहीं मिला कि बुलंदशहर की शिखा ने UPSC में 113वीं रैंक हासिल की हो।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि


जांच में यह पाया गया कि संबंधित युवती मुख्य परीक्षा पास नहीं कर पाई थी, इसलिए रैंक का दावा गलत है।


सूत्रों के मुताबिक, असली 113वीं रैंक दिल्ली की रहने वाली शिखा को मिली है, जो पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत हैं।


यह मामला कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है।
पहला — क्या मीडिया को खबर चलाने से पहले पूरी पुष्टि करनी चाहिए?
दूसरा — क्या सोशल मीडिया पर वायरल खबरों की जांच जरूरी है?
तीसरा — क्या प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी जानकारी को आधिकारिक वेबसाइट से ही सत्यापित करना चाहिए?


विशेषज्ञ मानते हैं कि UPSC जैसे संवेदनशील मामलों में छोटी गलती भी बड़ी विवाद की वजह बन सकती है।
इस घटना से यह भी साफ हुआ कि भावनात्मक कहानियां जल्दी वायरल होती हैं, लेकिन सत्य सामने आने में देर नहीं लगती।


बुलंदशहर की शिखा के UPSC रैंक के दावे का गलत साबित होना एक बड़ा सबक है कि किसी भी सफलता की खबर को बिना पुष्टि के सच नहीं मानना चाहिए। प्रशासनिक जांच ने पूरे मामले को साफ कर दिया और असली उम्मीदवार को न्याय मिला।

यह घटना बताती है कि प्रतिष्ठित परीक्षाओं से जुड़ी खबरों में सावधानी और सत्यापन बेहद जरूरी है, ताकि समाज में भ्रम की स्थिति न बने।


Q1. क्या बुलंदशहर की शिखा ने सच में UPSC पास किया था?
नहीं, जांच में सामने आया कि वह मुख्य परीक्षा भी पास नहीं कर पाई थीं।


Q2. UPSC में 113वीं रैंक किसे मिली?
रिपोर्ट के अनुसार 113वीं रैंक दिल्ली की शिखा को मिली है।


Q3. मामले की जांच किसने कराई?
UPSC के निर्देश पर जिला प्रशासन ने जांच कराई।


Q4. झूठा दावा कैसे सामने आया?
दिल्ली की शिखा ने आयोग को ईमेल भेजकर शिकायत की थी।


Q5. पहले भी ऐसे मामले सामने आए हैं?
हाँ, बिहार में भी एक युवती का गलत रैंक दावा सामने आया था।