उत्तराखंड में कैबिनेट विस्तार की तैयारी तेज, चुनाव से पहले धामी सरकार का बड़ा सियासी दांव

उत्तराखंड में कैबिनेट विस्तार की तैयारी तेज, चुनाव से पहले धामी सरकार का बड़ा सियासी दांव
March 20, 2026 at 4:10 pm

उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। राज्य में शुक्रवार को कैबिनेट विस्तार होने की संभावना जताई जा रही है और राजभवन में नए मंत्रियों के शपथ ग्रहण की तैयारियां भी पूरी कर ली गई हैं। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले इस विस्तार को सत्तारूढ़ भाजपा की बड़ी रणनीतिक चाल माना जा रहा है। लंबे समय से मंत्री पद की उम्मीद लगाए बैठे विधायकों की धड़कनें तेज हो गई हैं और पार्टी संगठन में भी बड़े पैमाने पर फेरबदल की चर्चा है। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी चुनावी साल से पहले सरकार और संगठन दोनों को मजबूत करने के लिए बड़ा फैसला ले सकते हैं।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक शुक्रवार सुबह करीब दस बजे राजभवन में नए मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के दिल्ली दौरे से लौटने के बाद से ही कैबिनेट विस्तार की चर्चा और तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि पार्टी हाईकमान से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही शपथ ग्रहण का कार्यक्रम तय किया गया है।

उत्तराखंड विधानसभा में मुख्यमंत्री सहित अधिकतम 12 मंत्री बनाए जा सकते हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 7 मंत्री ही कार्यरत हैं और पांच पद लंबे समय से खाली हैं। ऐसे में कैबिनेट विस्तार के जरिए इन खाली पदों को भरा जाना लगभग तय माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में जिन विधायकों के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं, उनमें राजपुर से विधायक खजानदास, नैनीताल से सरिता आर्य, रुड़की से प्रदीप बत्रा, देवप्रयाग से विनोद कंडारी और रामनगर से दीवान सिंह बिष्ट का नाम प्रमुख रूप से लिया जा रहा है।

सूत्रों का यह भी कहना है कि केवल मंत्री पद ही नहीं बल्कि राज्य मंत्री स्तर और संगठन में भी कई नेताओं को जिम्मेदारी दी जा सकती है। पार्टी संगठन में करीब दो दर्जन से अधिक नेताओं को दायित्वधारी बनाए जाने की संभावना है, जिससे कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

साल 2022 में विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार का गठन हुआ था। उस समय सीमित संख्या में मंत्रियों को शामिल किया गया था और कई पद खाली छोड़ दिए गए थे। तब से ही कैबिनेट विस्तार की चर्चा लगातार होती रही, लेकिन किसी न किसी कारण से फैसला टलता रहा।

अब स्थिति यह है कि सरकार के चार साल पूरे होने वाले हैं और अगले विधानसभा चुनाव में एक साल से भी कम समय बचा है। ऐसे समय में राजनीतिक संतुलन बनाना, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व देना और नाराज नेताओं को साधना सरकार के लिए जरूरी हो गया है। यही कारण है कि चुनाव से पहले कैबिनेट विस्तार को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

उत्तराखंड की राजनीति में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन का खास महत्व रहता है। पहाड़ और मैदान दोनों क्षेत्रों के नेताओं को प्रतिनिधित्व देना पार्टी के लिए जरूरी होता है। माना जा रहा है कि इस विस्तार में इसी संतुलन को ध्यान में रखा जाएगा।

कैबिनेट विस्तार का असर सिर्फ सरकार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा प्रभाव आगामी विधानसभा चुनाव पर भी पड़ सकता है। मंत्री बनने वाले विधायकों के क्षेत्रों में विकास कार्यों की रफ्तार तेज हो सकती है, जिससे स्थानीय स्तर पर पार्टी को फायदा मिलने की उम्मीद है।

संगठन में नई नियुक्तियां होने से कार्यकर्ताओं में जोश बढ़ेगा और चुनावी तैयारी को गति मिलेगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा इस कदम के जरिए नाराज नेताओं को संतुष्ट करने और विपक्ष को संदेश देने की कोशिश कर रही है कि पार्टी पूरी तरह चुनावी मोड में आ चुकी है।

इसके अलावा, कैबिनेट विस्तार से प्रशासनिक फैसलों में तेजी आने की संभावना भी है, क्योंकि लंबे समय से खाली पड़े विभागों को स्थायी मंत्री मिल जाएंगे।

हालांकि सरकार की ओर से आधिकारिक रूप से कैबिनेट विस्तार की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने संकेत दिए हैं कि संगठन और सरकार में बदलाव होना तय है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि चुनाव से पहले सरकार और संगठन को मजबूत करना जरूरी है और इसी दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी हाल ही में कहा था कि सरकार जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए लगातार फैसले ले रही है और आगे भी आवश्यक बदलाव किए जाएंगे।

राजनीतिक दृष्टि से देखा जाए तो यह कैबिनेट विस्तार केवल प्रशासनिक फैसला नहीं बल्कि पूरी तरह चुनावी रणनीति का हिस्सा है। भाजपा चाहती है कि चुनाव से पहले किसी भी तरह की नाराजगी को खत्म किया जाए और हर क्षेत्र को प्रतिनिधित्व दिया जाए।

इसके अलावा, विपक्ष लगातार सरकार पर निष्क्रियता का आरोप लगा रहा है। ऐसे में नए मंत्रियों को शामिल कर सरकार यह संदेश देना चाहती है कि वह सक्रिय है और चुनाव से पहले बड़े फैसले लेने को तैयार है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विस्तार संतुलित तरीके से हुआ तो भाजपा को चुनाव में फायदा मिल सकता है, लेकिन यदि किसी बड़े नेता की अनदेखी हुई तो इसका उल्टा असर भी हो सकता है।

कुल मिलाकर उत्तराखंड में होने वाला संभावित कैबिनेट विस्तार केवल मंत्रियों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी का अहम हिस्सा है। सरकार इस कदम के जरिए संगठन को मजबूत करने, नेताओं को संतुष्ट करने और जनता को सक्रिय शासन का संदेश देने की कोशिश कर रही है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि आखिर किन विधायकों को मंत्री पद मिलता है और यह फैसला चुनावी राजनीति को किस दिशा में ले जाता है।

  1. उत्तराखंड में कैबिनेट विस्तार कब हो सकता है?
    शुक्रवार को राजभवन में शपथ ग्रहण की संभावना जताई जा रही है, हालांकि आधिकारिक घोषणा बाकी है।
  2. कैबिनेट में कितने मंत्री हो सकते हैं?
    संविधान के अनुसार मुख्यमंत्री सहित अधिकतम 12 मंत्री हो सकते हैं।
  3. अभी कितने मंत्री हैं?
    वर्तमान में 7 मंत्री हैं और 5 पद खाली हैं।
  4. किन विधायकों के नाम चर्चा में हैं?
    खजानदास, सरिता आर्य, प्रदीप बत्रा, विनोद कंडारी और दीवान सिंह बिष्ट के नाम प्रमुख बताए जा रहे हैं।
  5. चुनाव से पहले विस्तार क्यों जरूरी माना जा रहा है?
    राजनीतिक संतुलन बनाने, नाराज नेताओं को मनाने और चुनावी तैयारी मजबूत करने के लिए यह कदम अहम माना जा रहा है।