आईटी सेक्टर में एक बार फिर बड़े पैमाने पर छंटनी की खबर ने चिंता बढ़ा दी है। अमेरिकी टेक दिग्गज Oracle Corporation ने भारत सहित कई देशों में अचानक कर्मचारियों को नौकरी से निकालना शुरू कर दिया है। खास बात यह रही कि कर्मचारियों को बिना किसी पूर्व चेतावनी के सुबह ईमेल भेजकर बताया गया कि वही दिन उनका आखिरी कार्यदिवस होगा। इस घटनाक्रम ने न केवल कर्मचारियों को झटका दिया है, बल्कि पूरे टेक उद्योग में असुरक्षा का माहौल भी पैदा कर दिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ओरेकल ने अपने वैश्विक पुनर्गठन (री-स्ट्रक्चरिंग) के तहत कई विभागों में बड़े स्तर पर कर्मचारियों की छंटनी की है। भारत में इसका सबसे अधिक असर कंपनी के नेटसूट (NetSuite) इंडिया डेवलपमेंट सेंटर (IDC) पर देखने को मिला है, जहां प्रोडक्ट मैनेजर, सॉफ्टवेयर इंजीनियर और मिड-लेवल मैनेजमेंट के कर्मचारियों को प्रभावित किया गया है।
कर्मचारियों को सुबह करीब 6 बजे (ईस्टर्न टाइम के अनुसार) एक आधिकारिक ईमेल भेजा गया, जिसमें बताया गया कि कंपनी के संगठनात्मक बदलाव के चलते उनकी भूमिका समाप्त की जा रही है। इस ईमेल के तुरंत बाद कर्मचारियों की कंपनी सिस्टम तक पहुंच भी बंद कर दी गई, जिससे उन्हें यह स्पष्ट हो गया कि निर्णय तत्काल प्रभाव से लागू हो चुका है।
बताया जा रहा है कि RHS (Revenue and Health Sciences) और SVOS (SaaS and Virtual Operations Services) जैसे विभागों में लगभग 30% तक वर्कफोर्स कम की गई है। कई टीमों में एक साथ 10 से 15 इंजीनियरों को बाहर कर दिया गया, जिससे टीम स्ट्रक्चर पूरी तरह बदल गया है।
कंपनी ने कर्मचारियों को सेवरेंस पैकेज देने की बात कही है, जो भारत में N+2 फॉर्मूले पर आधारित होगा। इसका मतलब है कि कर्मचारी जितने साल कंपनी में रहा है, उसे उतने महीनों की सैलरी के साथ अतिरिक्त 2 महीने का भुगतान मिलेगा। हालांकि, अनवेस्टेड स्टॉक (RSUs) को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा, जो कर्मचारियों के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है।
Oracle Corporation दुनिया की प्रमुख क्लाउड और एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर कंपनियों में से एक है। पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने क्लाउड कंप्यूटिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बड़े निवेश किए हैं।
हाल ही में कंपनी ने अपने AI इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए भारी कर्ज लिया है और डेटा सेंटर विस्तार पर अरबों डॉलर खर्च करने की योजना बनाई है। इसी रणनीति के तहत लागत कम करने और संसाधनों को नए क्षेत्रों में लगाने के लिए छंटनी को एक उपाय के रूप में देखा जा रहा है।
टेक इंडस्ट्री में यह पहली बार नहीं है जब बड़े पैमाने पर छंटनी हुई हो। इससे पहले भी कई वैश्विक कंपनियां जैसे गूगल, मेटा और अमेज़न कर्मचारियों की संख्या कम कर चुकी हैं, खासकर तब जब ऑटोमेशन और AI का उपयोग बढ़ रहा है।
इस छंटनी का सबसे बड़ा असर भारत के आईटी पेशेवरों पर पड़ा है। भारत में बड़ी संख्या में युवा इंजीनियर और टेक प्रोफेशनल्स बहुराष्ट्रीय कंपनियों में काम करते हैं। अचानक नौकरी जाने से उनके करियर और वित्तीय स्थिरता पर सीधा असर पड़ा है।
इसके अलावा, इस तरह की घटनाएं आईटी सेक्टर में अस्थिरता को बढ़ाती हैं, जिससे नए जॉब सीकर्स के लिए भी चुनौती बढ़ जाती है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कंपनियां कम कर्मचारियों के साथ अधिक काम करने की दिशा में बढ़ेंगी, जहां AI और ऑटोमेशन बड़ी भूमिका निभाएंगे।
वैश्विक स्तर पर भी इसका असर देखा जा सकता है, क्योंकि इससे टेक सेक्टर में नौकरी की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कंपनी की ओर से जारी आधिकारिक संचार में कहा गया है कि यह निर्णय “संगठनात्मक बदलाव और बिजनेस प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए” लिया गया है। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रभावित कर्मचारियों को उचित सेवरेंस पैकेज और ट्रांजिशन सपोर्ट दिया जाएगा।
हालांकि, कर्मचारियों का कहना है कि प्रक्रिया बेहद अचानक और असंवेदनशील थी, क्योंकि न तो कोई पूर्व सूचना दी गई और न ही व्यक्तिगत बातचीत का अवसर मिला।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह छंटनी केवल लागत कम करने का कदम नहीं है, बल्कि टेक इंडस्ट्री के बदलते स्वरूप का संकेत भी है। AI और ऑटोमेशन के तेजी से बढ़ते उपयोग के कारण कंपनियां अब पारंपरिक भूमिकाओं को कम कर रही हैं और नई तकनीकी क्षमताओं में निवेश बढ़ा रही हैं।
ओरेकल का यह कदम दर्शाता है कि कंपनियां अब “कम लोगों में ज्यादा काम” की रणनीति अपना रही हैं। इससे एक ओर कंपनी की लागत कम होगी, वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों के लिए प्रतिस्पर्धा और भी कठिन हो जाएगी।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि कंपनियां अब स्किल-आधारित हायरिंग पर ज्यादा ध्यान दे रही हैं, जहां AI, डेटा साइंस और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखने वालों की मांग बढ़ेगी।
ओरेकल की यह छंटनी आईटी सेक्टर के लिए एक बड़ा संकेत है कि आने वाला समय बदलावों से भरा होगा। जहां एक ओर कंपनियां नई तकनीकों में निवेश कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों को भी अपने कौशल को अपडेट करना होगा।
यह घटना इस बात को भी उजागर करती है कि नौकरी की सुरक्षा अब पहले जैसी नहीं रही और प्रोफेशनल्स को लगातार बदलते माहौल के अनुसार खुद को ढालना होगा।
1. ओरेकल ने छंटनी क्यों की?
कंपनी ने लागत कम करने और AI व डेटा सेंटर विस्तार में निवेश के लिए यह कदम उठाया है।
2. कितने कर्मचारियों की नौकरी जा सकती है?
अनुमान है कि 20,000 से 30,000 कर्मचारियों तक प्रभावित हो सकते हैं।
3. भारत पर इसका क्या असर पड़ा है?
भारत में कई टेक प्रोफेशनल्स की नौकरी गई है, खासकर नेटसूट और अन्य विभागों में।
4. कर्मचारियों को क्या मुआवज़ा मिलेगा?
भारत में N+2 फॉर्मूले के तहत सेवरेंस पैकेज दिया जाएगा।
5. क्या आगे और छंटनी हो सकती है?
विशेषज्ञों का मानना है कि टेक सेक्टर में आगे भी ऐसी घटनाएं देखने को मिल सकती हैं।
सुबह 6 बजे ईमेल, “आज ही आखिरी दिन”: ओरेकल की अचानक छंटनी से आईटी सेक्टर में हलचल