हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा प्रणाली में बड़ा सुधार करते हुए परीक्षा के ढांचे को पूरी तरह बदल दिया है। नए नियमों के तहत अब मुख्य परीक्षा (मेंस) से वैकल्पिक विषय (Optional Subject) की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। आयोग का मानना है कि इससे सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर मिलेगा और मूल्यांकन अधिक पारदर्शी होगा।
अब उम्मीदवारों की सफलता मुख्य रूप से सामान्य अध्ययन और भाषा कौशल पर निर्भर करेगी। वर्ष 2026 की हरियाणा सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए यह बदलाव रणनीति बदलने वाला साबित हो सकता है। आयोग ने प्रारंभिक परीक्षा से लेकर इंटरव्यू तक की चयन प्रक्रिया में अहम संशोधन किए हैं।
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) का नया स्वरूप
संशोधित व्यवस्था के अनुसार, हरियाणा सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा अब कुल 400 अंकों की होगी। इसमें दो वस्तुनिष्ठ प्रश्नपत्र शामिल होंगे—
सीसैट पेपर केवल क्वालिफाइंग होगा, जिसमें कम से कम 33% अंक प्राप्त करना अनिवार्य होगा। मुख्य परीक्षा के लिए चयन सिर्फ सामान्य अध्ययन पेपर में प्राप्त अंकों के आधार पर किया जाएगा। गलत उत्तर पर 0.25 अंक की नेगेटिव मार्किंग पहले की तरह लागू रहेगी।
मुख्य परीक्षा(Mains) में बड़ा बदलाव
2026 से हरियाणा सिविल सेवा मुख्य परीक्षा का ढांचा पूरी तरह बदल दिया गया है। अब मेंस परीक्षा कुल 600 अंकों की होगी और सभी पेपर अनिवार्य तथा वर्णनात्मक होंगे।
इस नई प्रणाली से वैकल्पिक विषयों के कारण होने वाली “स्केलिंग” जैसी समस्याओं पर रोक लगेगी। प्रत्येक पेपर की अवधि 3 घंटे निर्धारित की गई है।
सामान्य अध्ययन पर बढ़ा जोर
चार सामान्य अध्ययन पेपरों को शामिल करने से सिलेबस का दायरा व्यापक हो गया है। अब परीक्षा में भारतीय विरासत, आधुनिक इतिहास, विश्व भूगोल, शासन व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय संबंध, आर्थिक विकास, पर्यावरण, नैतिकता के साथ-साथ हरियाणा की अर्थव्यवस्था, संस्कृति और सामाजिक ढांचे से जुड़े प्रश्नों को अधिक महत्व दिया जाएगा।
इंटरव्यू और मेरिट प्रक्रिया
लिखित परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को 75 अंकों केसाक्षात्कार के लिए बुलाया जाएगा। अंतिम मेरिट सूची मुख्य परीक्षा के 600 अंक और इंटरव्यू के 75 अंक जोड़कर तैयार होगी, यानी कुल 675 अंक के आधार पर चयन होगा।
मेंस परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए सभी अनिवार्य पेपरों में मिलाकर कम से कम 45% अंक प्राप्त करना आवश्यक होगा। साथ ही हिंदी और अंग्रेजी के पेपर में न्यूनतम 33% अंक अनिवार्य किए गए हैं।
इस नए पैटर्न से हरियाणा सिविल सेवा परीक्षा अधिक संतुलित और प्रतिस्पर्धी बन जाएगी, जिससे अभ्यर्थियों को विषय चयन की बजाय समग्र तैयारी पर ध्यान देना होगा।