ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो ने एक बार फिर अपनी प्लेटफॉर्म फीस में बढ़ोतरी कर दी है, जिससे ग्राहकों को हर ऑर्डर पर पहले से अधिक भुगतान करना पड़ेगा। नई दर लागू होने के बाद कई शहरों में प्लेटफॉर्म फीस लगभग 14.90 रुपये तक पहुंच गई है। हालांकि कंपनी की ओर से इस फैसले पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि बढ़ते खर्च, प्रतिस्पर्धा और मुनाफे के दबाव के कारण यह कदम उठाया गया है। इस फैसले का असर केवल ग्राहकों पर ही नहीं बल्कि डिलीवरी पार्टनर्स और रेस्टोरेंट्स पर भी पड़ सकता है।
फूड डिलीवरी ऐप जोमैटो ने हाल ही में अपनी प्लेटफॉर्म फीस को बढ़ाकर लगभग 14.90 रुपये कर दिया है, जबकि पहले यह फीस करीब 12.50 रुपये के आसपास थी। यानी हर ऑर्डर पर ग्राहकों को लगभग 2 से 3 रुपये ज्यादा देने पड़ेंगे। यह बढ़ोतरी भले ही छोटी लग रही हो, लेकिन जो लोग नियमित रूप से ऑनलाइन खाना मंगाते हैं, उनके लिए महीने के अंत में यह रकम काफी बढ़ सकती है।
कई यूजर्स को इस बदलाव की जानकारी तब हुई जब उन्होंने ऐप पर ऑर्डर करते समय बिल में बढ़ी हुई प्लेटफॉर्म फीस देखी। सोशल मीडिया पर भी कुछ लोगों ने इस बढ़ोतरी को लेकर सवाल उठाए हैं और कहा है कि पहले से ही फूड डिलीवरी काफी महंगी हो चुकी है।
इस मामले में जब ग्राउंड पर काम कर रहे डिलीवरी पार्टनर्स से बात की गई तो उन्होंने बताया कि प्लेटफॉर्म फीस बढ़ने से उन्हें सीधे तौर पर कोई खास फायदा नहीं मिल रहा है। डिलीवरी पार्टनर रिशभ, जो पिछले करीब दो साल से जोमैटो के साथ काम कर रहे हैं, ने बताया कि उनकी कमाई ऑर्डर और दूरी के आधार पर तय होती है, इसलिए प्लेटफॉर्म फीस बढ़ने से उनकी आय पर तुरंत असर नहीं पड़ता।
पिछले कुछ सालों में ऑनलाइन फूड डिलीवरी का चलन भारत में तेजी से बढ़ा है। कोरोना महामारी के बाद लोगों की आदतों में बड़ा बदलाव आया और घर बैठे खाना मंगाना आम बात हो गई। इसी बढ़ती मांग के कारण जोमैटो और अन्य फूड डिलीवरी कंपनियों ने अपने बिजनेस मॉडल में कई बदलाव किए हैं।
पहले जहां केवल डिलीवरी चार्ज लिया जाता था, वहीं अब प्लेटफॉर्म फीस, पैकेजिंग चार्ज, टैक्स और टिप जैसी कई अतिरिक्त लागतें भी जुड़ गई हैं। कंपनियां लगातार घाटे से निकलने और मुनाफा बढ़ाने के लिए अलग-अलग तरीकों से शुल्क बढ़ा रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि फूड डिलीवरी कंपनियों को टेक्नोलॉजी, लॉजिस्टिक्स, कस्टमर सपोर्ट और मार्केटिंग पर भारी खर्च करना पड़ता है, जिसके कारण समय-समय पर फीस में बदलाव किया जाता है।
प्लेटफॉर्म फीस बढ़ने का सीधा असर ग्राहकों की जेब पर पड़ सकता है। जो लोग रोजाना या सप्ताह में कई बार ऑनलाइन खाना मंगाते हैं, उनके लिए यह खर्च काफी बढ़ सकता है। इससे कुछ ग्राहक ऑर्डर कम कर सकते हैं या बाहर खाना पसंद कर सकते हैं।
डिलीवरी पार्टनर्स के लिए भी यह स्थिति चिंता वाली हो सकती है, क्योंकि अगर ऑर्डर कम हुए तो उनकी कमाई भी घट सकती है। कई डिलीवरी बॉय का कहना है कि कंपनी फीस बढ़ाती है, लेकिन उसका पूरा फायदा उन्हें नहीं मिलता।
रेस्टोरेंट मालिकों पर भी इसका असर पड़ सकता है, क्योंकि अगर ग्राहक कम ऑर्डर करेंगे तो उनकी बिक्री घट सकती है। छोटे रेस्टोरेंट्स के लिए यह स्थिति ज्यादा मुश्किल हो सकती है।
फिलहाल जोमैटो की ओर से प्लेटफॉर्म फीस बढ़ाने को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रेस रिलीज जारी नहीं की गई है। हालांकि कंपनी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बढ़ती ऑपरेशनल लागत और बिजनेस को संतुलित रखने के लिए समय-समय पर शुल्क में बदलाव करना जरूरी हो जाता है।
कंपनी का यह भी मानना है कि छोटे-छोटे शुल्क के जरिए ही डिलीवरी नेटवर्क को सुचारू रूप से चलाया जा सकता है और ग्राहकों को तेज सेवा दी जा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि फूड डिलीवरी सेक्टर अब उस दौर में पहुंच चुका है जहां कंपनियों को केवल यूजर बढ़ाने के बजाय मुनाफा कमाने पर ध्यान देना पड़ रहा है। पहले कंपनियां भारी छूट देकर ग्राहकों को जोड़ती थीं, लेकिन अब निवेशकों का दबाव है कि कारोबार लाभ में आए।
प्लेटफॉर्म फीस बढ़ाना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि यह भी सच है कि अगर फीस ज्यादा बढ़ती है तो ग्राहक विकल्प तलाश सकते हैं, जिससे कंपनियों को नुकसान भी हो सकता है।
डिलीवरी पार्टनर्स के नजरिए से देखें तो उनकी कमाई का सीधा संबंध ऑर्डर से है, इसलिए फीस बढ़ने के बाद ऑर्डर कम होना उनके लिए सबसे बड़ी चिंता है। आने वाले समय में कंपनियों को ग्राहकों, रेस्टोरेंट्स और डिलीवरी पार्टनर्स के बीच संतुलन बनाना होगा।
जोमैटो द्वारा प्लेटफॉर्म फीस बढ़ाने का फैसला भले ही कंपनी के लिए आर्थिक रूप से जरूरी हो, लेकिन इसका असर ग्राहकों, डिलीवरी पार्टनर्स और रेस्टोरेंट्स तीनों पर पड़ सकता है। अगर भविष्य में भी इसी तरह शुल्क बढ़ते रहे तो फूड डिलीवरी का इस्तेमाल कम हो सकता है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि क्या कंपनी आगे भी फीस बढ़ाती है या ग्राहकों को राहत देने के लिए कोई नई योजना लाती है।
1. जोमैटो की नई प्लेटफॉर्म फीस कितनी हो गई है?
अब कई जगहों पर प्लेटफॉर्म फीस लगभग 14.90 रुपये तक हो गई है।
2. पहले प्लेटफॉर्म फीस कितनी थी?
पहले यह करीब 12 से 12.50 रुपये के आसपास थी।
3. क्या फीस बढ़ने से डिलीवरी बॉय की कमाई बढ़ेगी?
डिलीवरी पार्टनर्स के अनुसार उनकी कमाई दूरी और ऑर्डर पर निर्भर करती है, फीस बढ़ने से सीधे फायदा नहीं मिलता।
4. क्या ग्राहक कम ऑर्डर कर सकते हैं?
संभावना है कि खर्च बढ़ने से कुछ ग्राहक ऑर्डर कम कर दें।
5. कंपनी ने फीस क्यों बढ़ाई?
माना जा रहा है कि बढ़ते खर्च और मुनाफा संतुलित करने के लिए यह फैसला लिया गया है।
जोमैटो ने बढ़ाई प्लेटफॉर्म फीस, ग्राहकों पर बढ़ा बोझ, डिलीवरी पार्टनर्स बोले– कमाई पर अभी साफ असर नहीं