अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने दुनिया की सबसे अहम समुद्री तेल लाइफलाइन होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से वैश्विक चिंता का केंद्र बना दिया है। ईरान का दावा है कि होर्मुज पूरी तरह खुला है और उसने इसे बंद नहीं किया, लेकिन इसके बावजूद तेल टैंकर और कार्गो जहाज सामान्य रूप से नहीं चल पा रहे हैं। असली वजह युद्ध का खतरा, बीमा कंपनियों का पीछे हटना और सुरक्षा नियमों का कड़ा होना बताया जा रहा है। इस संकट का असर केवल मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
मध्य-पूर्व में अमेरिका-ईरान टकराव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। अमेरिका ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही बाधित हुई तो ईरान के रणनीतिक ठिकानों पर हमला किया जा सकता है। दूसरी ओर ईरान ने साफ किया है कि उसने रास्ता बंद नहीं किया है, लेकिन सुरक्षा कारणों से नए नियम लागू किए गए हैं।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि होर्मुज पूरी तरह खुला है, लेकिन युद्ध जैसी स्थिति में कोई भी देश अपनी सुरक्षा के नियम सख्त कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जहाजों की आवाजाही कम होने की वजह ईरान नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय बीमा कंपनियों का फैसला है, जो इस क्षेत्र को जोखिम भरा मान रही हैं।
ईरान के अनुसार, जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को अब पहले से अधिक जानकारी देनी होगी और सुरक्षा निर्देशों का पालन करना होगा। जिन देशों को ईरान अपने खिलाफ मानता है, उनके जहाजों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। फारस की खाड़ी से निकलने वाला लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई और ईरान जैसे बड़े तेल उत्पादक देश इसी मार्ग पर निर्भर हैं।
अमेरिका-ईरान तनाव कोई नया नहीं है, लेकिन हाल के महीनों में स्थिति ज्यादा गंभीर हो गई है। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले के बाद ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। इसके बाद से होर्मुज क्षेत्र में बारूदी सुरंगों, ड्रोन हमलों और जहाजों को रोकने की खबरें सामने आईं।
युद्ध जैसे माहौल के कारण अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठनों ने इस इलाके को हाई-रिस्क जोन घोषित कर दिया है। इसी वजह से जहाजों की आवाजाही कम हो गई है, भले ही आधिकारिक रूप से रास्ता बंद नहीं किया गया हो।
इस संकट का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। तेल की कीमतों में हलचल शुरू हो चुकी है और अगर स्थिति लंबी चली तो पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं।
भारत पर इसका असर सबसे ज्यादा हो सकता है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा मध्य-पूर्व से तेल खरीदता है। अगर होर्मुज से सप्लाई बाधित होती है तो भारत को महंगा तेल खरीदना पड़ेगा, जिससे महंगाई बढ़ सकती है।
जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोपीय देशों ने भी चिंता जताई है क्योंकि उनकी ऊर्जा जरूरत का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है। कई देशों ने ईरान और अमेरिका से बातचीत कर हालात सामान्य करने की अपील की है।
समुद्री व्यापार प्रभावित होने से केवल तेल ही नहीं बल्कि गैस, केमिकल और अन्य सामान की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि
“होर्मुज जलडमरूमध्य बंद नहीं है, लेकिन मौजूदा हालात असामान्य हैं। सुरक्षा नियमों का पालन जरूरी है। जहाजों के नहीं आने की वजह बीमा कंपनियों का फैसला है।”
अमेरिका की ओर से कहा गया कि
“अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों को खुला रखना जरूरी है। अगर कोई देश इसे बाधित करेगा तो जवाब दिया जाएगा।”
कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने भी बयान जारी कर कहा है कि जब तक बीमा कवर सामान्य नहीं होगा, तब तक जहाजों को इस क्षेत्र में भेजना जोखिम भरा है।
इस पूरे संकट की सबसे बड़ी वजह सीधे युद्ध से ज्यादा आर्थिक और सुरक्षा जोखिम है।
समुद्री जहाज बिना बीमा के नहीं चलते। अगर जहाज पर हमला हो जाए या वह डूब जाए तो अरबों डॉलर का नुकसान होता है। ऐसे में बीमा कंपनियां किसी भी युद्ध क्षेत्र में कवर देने से बचती हैं।
जब किसी इलाके को वार जोन घोषित कर दिया जाता है तो बीमा प्रीमियम कई गुना बढ़ जाता है। कई बार जहाज मालिक इतना महंगा बीमा लेने से मना कर देते हैं, जिससे जहाज चलना बंद हो जाते हैं।
ईरान का कहना है कि उसने रास्ता बंद नहीं किया, लेकिन सख्त नियम लागू करना भी एक तरह का दबाव माना जा रहा है। दूसरी तरफ अमेरिका चाहता है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार बिना रुकावट चलता रहे।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह तनाव लंबा चला तो तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ेगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य औपचारिक रूप से खुला होने के बावजूद व्यवहार में लगभग बंद जैसा हो गया है। युद्ध का खतरा, कड़े सुरक्षा नियम और बीमा कंपनियों की हिचकिचाहट ने जहाजों की आवाजाही रोक दी है।
अगर अमेरिका-ईरान तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो इसका असर केवल मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत सहित पूरी दुनिया में महंगाई और आर्थिक संकट बढ़ सकता है। इसलिए वैश्विक स्तर पर कूटनीतिक समाधान की जरूरत पहले से ज्यादा महसूस की जा रही है।
1. होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों महत्वपूर्ण है?
क्योंकि दुनिया का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है।
2. क्या होर्मुज पूरी तरह बंद है?
नहीं, आधिकारिक रूप से बंद नहीं है, लेकिन सुरक्षा कारणों से आवाजाही कम हो गई है।
3. जहाज क्यों नहीं चल रहे?
मुख्य वजह बीमा कंपनियों का कवर न देना और युद्ध का खतरा है।
4. भारत पर क्या असर होगा?
तेल महंगा हो सकता है और महंगाई बढ़ सकती है।
5. क्या युद्ध का खतरा बढ़ गया है?
तनाव बढ़ा है, लेकिन कूटनीतिक बातचीत भी जारी है।
होर्मुज जलडमरूमध्य खुला होने के बावजूद क्यों नहीं चल रहे जहाज? युद्ध, बीमा और डर ने रोकी दुनिया की तेल सप्लाई