मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के टकराव ने अब समुद्री व्यापार मार्गों को भी खतरे में डाल दिया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव के बाद अब ईरान की नजर दुनिया के दूसरे सबसे अहम समुद्री रास्ते बाब अल-मंदेब पर बताई जा रही है। यदि यह जलमार्ग भी प्रभावित होता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति, गैस व्यापार और यूरोप की ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति सिर्फ क्षेत्रीय संघर्ष नहीं बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करने वाला संकट बन सकती है।
अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने अब समुद्र में नई रणनीतिक चुनौती पैदा कर दी है। मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद ईरान ने संकेत दिया है कि वह केवल हवाई या जमीनी लड़ाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समुद्री व्यापार मार्गों पर दबाव बनाकर अपने विरोधियों को झुकाने की कोशिश करेगा।
ईरानी सैन्य अधिकारियों के हालिया बयान में यह संकेत दिया गया कि अगर अमेरिका या उसके सहयोगी देशों की ओर से कोई बड़ा कदम उठाया जाता है, तो ईरान अपने समुद्री अभियान को दूसरे अहम जलमार्ग की ओर मोड़ सकता है। माना जा रहा है कि यह संकेत बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य की ओर है, जो लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ता है।
यह जलमार्ग यमन और जिबूती के बीच स्थित है और वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। दुनिया के लाखों बैरल तेल और बड़ी मात्रा में गैस रोजाना इसी रास्ते से गुजरती है। यदि यह मार्ग बाधित होता है, तो फारस की खाड़ी से यूरोप और एशिया जाने वाला प्रमुख रास्ता प्रभावित हो सकता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पहले से ही दुनिया का सबसे संवेदनशील तेल मार्ग माना जाता है। खाड़ी देशों का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से तेल निर्यात करता है। हाल के तनाव के बाद इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही कम हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा गया है।
बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य को लंबे समय से “दूसरा होर्मुज” कहा जाता है। यह रास्ता स्वेज नहर से जुड़ता है और यूरोप के लिए सबसे छोटा समुद्री मार्ग माना जाता है। हर साल हजारों जहाज इस रास्ते से गुजरते हैं और बड़ी मात्रा में ऊर्जा संसाधन इसी मार्ग से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह मार्ग बंद होता है, तो जहाजों को अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप के रास्ते लंबा चक्कर लगाकर जाना पड़ेगा, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ेंगे।
यदि बाब अल-मंदेब पर भी संकट गहराता है, तो इसका असर सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा।
भारत पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा तेल आयात करता है। यदि सप्लाई बाधित होती है, तो पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं और महंगाई पर दबाव आ सकता है।
ईरान के सैन्य सूत्रों ने संकेत दिया है कि देश के पास अभी भी कई रणनीतिक विकल्प मौजूद हैं और यदि जरूरत पड़ी तो वह समुद्री मार्गों पर नियंत्रण की अपनी क्षमता का उपयोग करेगा।
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों ने कहा है कि लाल सागर क्षेत्र में पहले भी हमले हो चुके हैं और यमन के हूती विद्रोही जहाजों को निशाना बनाने की क्षमता रखते हैं। कुछ देशों ने अपने जहाजों को वैकल्पिक रास्तों से भेजना शुरू भी कर दिया है।
ऊर्जा बाजार से जुड़े विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि दोनों प्रमुख मार्गों पर एक साथ संकट आता है, तो दुनिया के पास तुरंत आपूर्ति बढ़ाने का कोई आसान विकल्प नहीं होगा।
मौजूदा स्थिति को केवल युद्ध की रणनीति नहीं बल्कि आर्थिक दबाव की रणनीति माना जा रहा है। ईरान जानता है कि सीधे सैन्य टकराव में उसे भारी नुकसान हो सकता है, लेकिन समुद्री व्यापार मार्गों पर दबाव बनाकर वह अमेरिका और उसके सहयोगियों पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा सकता है।
बाब अल-मंदेब क्षेत्र में ईरान का प्रभाव सीधे नहीं बल्कि उसके सहयोगी समूहों के जरिए माना जाता है। इसलिए बिना खुला युद्ध घोषित किए भी वहां अस्थिरता पैदा की जा सकती है।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह संकट लंबा चला तो दुनिया में 1970 के दशक जैसी तेल संकट की स्थिति बन सकती है। उस समय तेल की कीमतों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला दिया था।
अमेरिका-ईरान तनाव अब केवल क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रह गया है। होर्मुज के बाद बाब अल-मंदेब पर खतरा बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा संकट मंडरा रहा है। यदि समुद्री रास्तों पर अस्थिरता बढ़ती है, तो इसका असर तेल, गैस, व्यापार और आम लोगों की जिंदगी तक पहुंचेगा।
दुनिया की बड़ी ताकतें स्थिति को संभालने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे, यह काफी हद तक मध्य पूर्व की रणनीति पर निर्भर करेगा।
1. बाब अल-मंदेब क्या है?
यह लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण समुद्री जलमार्ग है।
2. यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
दुनिया के तेल और गैस का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।
3. अगर यह बंद हो जाए तो क्या होगा?
तेल महंगा होगा, सप्लाई कम होगी और वैश्विक अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी।
4. भारत पर क्या असर पड़ेगा?
तेल महंगा हो सकता है और महंगाई बढ़ सकती है।
5. क्या युद्ध बढ़ सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति बिगड़ी तो बड़ा क्षेत्रीय संघर्ष हो सकता है।
होर्मुज के बाद बाब अल-मंदेब पर नजर! ईरान की नई समुद्री रणनीति से बढ़ा वैश्विक तेल संकट का खतरा