दक्षिण कोरिया का स्वदेशी लड़ाकू जेट KAI KF-21 Boramae: F-15 और F-35 के बीच ताकत और रेंज

दक्षिण कोरिया का स्वदेशी लड़ाकू जेट KAI KF-21 Boramae: F-15 और F-35 के बीच ताकत और रेंज
January 5, 2026 at 1:05 pm

दक्षिण कोरिया ने अपनी सैन्य ताकत को बढ़ाने के लिए स्वदेशी लड़ाकू विमान KAI KF-21 Boramae का विकास किया है, जो दुनिया भर के उन्नत विमानों जैसे F-15 और F-35 के बीच क्षमता दिखाता है। इस विमान को पूरी तरह से कोरियाई तकनीक के साथ विकसित किया जा रहा है और यह 2026 तक दक्षिण कोरियाई वायु सेना में शामिल होने की योजना है।

तकनीकी क्षमता

KAI KF-21 एक 4.5-पीढ़ी का मल्टीरोल फाइटर जेट है, जिसमें दो शक्तिशाली जेनरल इलेक्ट्रिक F414 इंजन लगे हैं। इसकी अधिकतम रफ्तार Mach 1.8 (लगभग 2200 कि.मी./घंटा) तक पहुंच सकती है और इसकी अनुमानित रेंज लगभग 2900 किलोमीटर तक है।

यह विमान दुनिया के प्रमुख 5वीं पीढ़ी के जेट्स जैसा दिखता है, लेकिन पूरी तरह से स्टील्थत कनीक वाला विमान नहीं है। इसे 4.5-जनरेशन के रूप में डिज़ाइन किया गया है, ताकि यह F-35 की तुलना में सस्ता और जल्दी उपलब्ध हो सके, जबकि इसकी क्षमता F-15 की तुलना में अधिक आधुनिक है।

अग्रिम फीचर्स और हथियार

KAI KF-21 में AESA रडार, आधुनिक एवियोनिक्स और बहु-भूमिका वाली मिसाइल सिस्टम को शामिल किया गया है। यह विमान हवा-से-हवा और हवा-से-जमीन दोनों मिशनों को अंजाम दे सकता है। शुरुआती ब्लॉक में इसके हथियार ज्यादातर बाहरी पायलेट्स पर लटकते हैं, लेकिन भविष्य के वेरिएंट KF-21EX में आंतरिक हथियार भंडारण की सुविधा भी दी जाएगी।

F-15 औरF-35 के साथ तुलना

  • F-15 से तुलना में KAI KF-21 की उड़ान क्षमता और गति आधुनिक है, लेकिन यह 5वीं पीढ़ी के विमान की तरह पूर्ण स्टील्थ नहीं है।
  • F-35 जैसे विमान की तुलना में KAI KF-21 की आलोचना होती है कि यह तकनीकी रूप से थोड़ा पीछे है, लेकिन यह एक सस्ता और भरोसेमंद विकल्प माना जाता है।


भविष्य की योजना

2026 तक KAI KF-21 की संख्या दक्षिण कोरियाई वायु सेना में शामिल होने की उम्मीद है। भविष्य में इसके और उन्नत रूपों को विकसित करने के लिए भी योजनाएँ चल रही हैं, जिससे यह और अधिक गुज़रने वाली मिशनों के लिए तैयार होगा।

इस प्रकार KAI KF-21 Boramae दक्षिण कोरिया द्वारा विकसित एक महत्वपूर्ण विमान है, जो देश की रक्षा क्षमता में नया आयाम जोड़ सकता है और आने वाले समय में वैश्विक बाज़ार में भी इसकी मांग बढ़ सकती है।