मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ईरान के खिलाफ नई रणनीति पर विचार कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान के भीतर सक्रिय कुर्द लड़ाके इस संघर्ष में अहम भूमिका निभा सकते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA ईरान में कुर्द समूहों को हथियार देकर वहां सरकार के खिलाफ विद्रोह भड़काने की योजना पर काम कर रही है।
ट्रंप ने रॉयटर्स को दिए इंटरव्यू में कहा कि अगर कुर्द लड़ाके ईरान के खिलाफ कार्रवाई करना चाहते हैं तो यह “शानदार” होगा और वह इसका समर्थन करेंगे। हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि अमेरिका उन्हें सैन्य या हवाई सहायता देगा या नहीं।
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कुर्द कौन हैं और अमेरिका उन्हें ईरान के खिलाफ संभावित ‘ट्रंप कार्ड’ क्यों मान रहा है।
कौन हैं कुर्द?
कुर्द मध्य पूर्व का एक बड़ा जातीय समुदाय है, जिसकी आबादी करीब 3 से 4 करोड़ के बीच मानी जाती है। ये मुख्य रूप से तुर्की, ईरान, इराक, सीरिया और आर्मेनिया में रहते हैं। इतनी बड़ी आबादी होने के बावजूद कुर्दों का अपना कोई स्वतंत्र देश नहीं है। इसी वजह से उन्हें दुनिया का सबसे बड़ा ‘स्टेटलेस’ यानी बिना राष्ट्र वाला जातीय समूह माना जाता है।
ओटोमन साम्राज्य के पतन के बाद बंट गए कुर्द
पहले विश्व युद्ध के बाद ओटोमन साम्राज्य के टूटने पर पश्चिमी देशों ने मध्य पूर्व के इलाकों को अलग-अलग देशों में बांट दिया। उस समय कुर्दों के लिए अलग देश बनाने का प्रस्ताव भी सामने आया था, लेकिन तुर्की की नई सरकार ने अनातोलिया क्षेत्र पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया। इसके बाद कुर्द आबादी तुर्की, ईरान, इराक और सीरिया में बंट गई।
इस बंटवारे के बाद से ही कुर्द समुदाय अलग पहचान और अधिकारों के लिए संघर्ष करता रहा है।
ईरान में कुर्दों की स्थिति
ईरान की कुल आबादी का लगभग 8 से 17 प्रतिशत हिस्सा कुर्द समुदाय का माना जाता है। पश्चिमी ईरान के कुर्द इलाके लंबे समय से अधिक अधिकार, स्वायत्तता या स्वतंत्रता की मांग करते रहे हैं।
1946 में कुर्दों ने ‘रिपब्लिक ऑफ महाबाद’ नाम से एक छोटा स्वतंत्र राज्य भी बनाया था, लेकिन ईरानी सेना ने एक साल के भीतर ही इसे खत्म कर दिया। इसके बाद से कई कुर्द संगठन ईरान सरकार के खिलाफ सक्रिय रहे हैं।
पेश मर्गा: कुर्दों की लड़ाकू ताकत
कुर्द लड़ाकों की सबसे प्रसिद्ध सैन्य ताकत पेशमर्गा मानी जाती है। स्थानीय भाषा में पेशमर्गा का मतलब होता है “मौत का सामना करने वाले”। मुख्य रूप से इराक में सक्रिय इस बल में करीब दो लाख लड़ाके शामिल हैं. ये लंबे समय से कुर्द समुदाय की रक्षा के लिए लड़ते रहे हैं।
कुर्द संगठनों का नेटवर्क
कुर्द आंदोलन कई संगठनों के जरिए चलाया जाता है। इनमें कुर्दिस्तान डेमोक्रेटिक पार्टी (PDKI), कुर्दिस्तान फ्रीडम पार्टी (PAK), कुर्दिस्तान फ्री लाइफ पार्टी (PJAK) और कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (PKK) जैसे संगठन शामिल हैं। इसके अलावा खबात और कोमाला जैसे संगठन भी सक्रिय हैं, जिनका झुकाव वामपंथी विचारधारा की ओर माना जाता है।
महसा अमिनी की मौत के बाद बढ़ा गुस्सा
2022 में ईरान में महसा अमिनी की हिरासत में मौत के बाद देशभर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। अमिनी कुर्द मूल की थीं, इसलिए इस घटना ने कुर्द इलाकों में सरकार के खिलाफ गुस्से को और बढ़ा दिया। इसके बाद से समय-समय पर कुर्द क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं।
अमेरिका क्यों देख रहा है कुर्दों को ‘ट्रंप कार्ड’ के रूप में?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कुर्द समूह ईरान के खिलाफ सक्रिय होते हैं तो इससे ईरान की सेना को कई मोर्चों पर लड़ना पड़ेगा। इससे ईरानी सरकार के संसाधन बंट सकते हैं और देश के भीतर असंतोष भी बढ़ सकता है।
अमेरिकी रणनीति के पीछे मुख्य उद्देश्य ईरान के अंदर दबाव बढ़ाना और उसकी सैन्य क्षमता को कमजोर करना माना जा रहा है।
तुर्की के साथ बढ़ सकता है विवाद
हालांकि कुर्दों को समर्थन देने से अमेरिका के सामने एक नई चुनौती भी खड़ी हो सकती है। तुर्की लंबे समय से कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (PKK) को आतंकी संगठन मानता है और उसके खिलाफ कार्रवाई करता रहा है। ऐसे में अगर अमेरिका कुर्द समूहों को खुला समर्थन देता है तो तुर्की के साथ तनाव बढ़ सकता है।
क्या सफल होगी अमेरिका की रणनीति?
फिलहाल यह साफ नहीं है कि CIA की यह योजना वास्तव में लागू होगी या नहीं। क्षेत्रीय राजनीति, कुर्द संगठनों के आपसी मतभेद और तुर्की की प्रतिक्रिया जैसे कई कारक इस रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं। लेकिन इतना तय है कि अगर कुर्द समूह ईरान के खिलाफ सक्रिय होते हैं तो मध्य पूर्व की राजनीति और भी जटिल हो सकती है।
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