मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। सऊदी अरब में अमेरिकी दूतावास के पास धमाके की खबर सामने आने के बाद तनाव और बढ़ गया है। इस बीच कुवैत में हुए हमले में छह अमेरिकी सैनिकों की मौत की पुष्टि हुई है।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए ईरान को चेतावनी दी है कि वह जवाब के लिए तैयार रहे।
सऊदी अरब में दूतावास के पास धमाका
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक सऊदी अरब में अमेरिकी दूतावास के पास विस्फोट की आवाज सुनी गई और इलाके में धुआं उठता देखा गया। एक सऊदी अधिकारी ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने अपनी एयर डिफेंस क्षमता का बड़ा हिस्सा इजरायल की सुरक्षा में लगा दिया, जिससे खाड़ी देशों की सुरक्षा कमजोर हो गई।
इस घटना के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।
कुवैत में अमेरिकी सैनिकों पर बड़ा हमला
संघर्ष के दौरान पहली बार अमेरिकी सैनिकों की बड़ी संख्या में मौत की पुष्टि हुई है। कुवैत के शुआइबा पोर्ट स्थित एक अस्थायी ऑपरेशन सेंटर पर ईरानी हमले में छह अमेरिकी सैनिक मारे गए।
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने बताया कि एक प्रोजेक्टाइल एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देकर अंदर पहुंच गया, जिससे यह बड़ा नुकसान हुआ। शुरुआती रिपोर्ट में इसे ड्रोन हमला बताया गया था।
तीन अमेरिकी F-15 जेट क्रैश
तनाव के बीच एक और चौंकाने वाली घटना सामने आई। कुवैत की एयर डिफेंस प्रणाली ने गलती से तीन अमेरिकी F-15 लड़ाकू विमानों को मार गिराया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इसे ‘फ्रेंडली फायर’ की घटना बताया है।
हालांकि राहत की बात यह रही कि सभी छह क्रू मेंबर सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में एक जलता हुआ विमान गिरता और पायलट को पैराशूट से उतरते देखा गया।
ईरान के शीर्ष नेतृत्व पर भी हमला
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी हमले के दौरान ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई अपने सलाहकारों के साथ बैठक कर रहे थे। कहा जा रहा है कि उन्होंने सुरक्षित बंकर में जाने से इनकार कर दिया और कहा कि छिपने से बेहतर शहीद होना है।
हमले के बाद ईरानी मीडिया ने यह भी दावा किया कि उनकी पत्नी मंसूरे खोजस्ते का निधन हो गया। बताया गया कि वह हमले के बाद कोमा में थीं।
अमेरिका में घट रहा समर्थन
रॉयटर्स और इप्सोस के सर्वे के अनुसार, केवल चार में से एक अमेरिकी नागरिक ही ईरान पर सैन्य कार्रवाई का समर्थन कर रहा है। लगातार बढ़ती सैनिकों की मौत से घरेलू समर्थन और कमजोर पड़ सकता है।
खुद ट्रंप ने भी संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं।
जंग का दायरा बढ़ा
मिसाइल, ड्रोन, एयर डिफेंस सिस्टम और अब ‘फ्रेंडली फायर’ जैसी घटनाएं दिखा रही हैं कि यह संघर्ष अब सीमित नहीं रहा। सऊदी अरब, कुवैत और पूरे खाड़ी क्षेत्र में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द कूटनीतिक प्रयास नहीं हुए तो यह टकराव पूरे क्षेत्र को बड़े युद्ध की ओर धकेल सकता है।
सऊदी अरब में अमेरिकी दूतावास के पास धमाका, 6 सैनिकों की मौत; ट्रंप ने ईरान को दी चेतावनी