ईरान संकट पर अचानक नरम पड़े डोनाल्ड ट्रंप, क्या रूस-चीन के दबाव ने बदल दिया खेल?

ईरान संकट पर अचानक नरम पड़े डोनाल्ड ट्रंप, क्या रूस-चीन के दबाव ने बदल दिया खेल?
April 8, 2026 at 3:51 pm

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच दुनिया उस वक्त चौंक गई, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतिम समय में सैन्य कार्रवाई रोकने का ऐलान कर दिया। कुछ घंटे पहले तक “अभूतपूर्व विनाश” की चेतावनी देने वाले ट्रंप का यह यू-टर्न सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है। इस घटनाक्रम के पीछे पाकिस्तान का नाम जरूर सामने आया, लेकिन जानकारों का मानना है कि असली भूमिका रूस और चीन की रही।

मंगलवार रात तक स्थिति बेहद तनावपूर्ण थी। अमेरिका और ईरान के बीच टकराव चरम पर पहुंच चुका था। वैश्विक स्तर पर यह आशंका जताई जा रही थी कि कभी भी बड़े सैन्य संघर्ष की शुरुआत हो सकती है। इसी बीच, निर्धारित समयसीमा समाप्त होने से ठीक पहले ट्रंप ने दो हफ्तों के लिए सैन्य कार्रवाई रोकने का निर्णय लिया।

ट्रंप ने अपने आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर कहा कि यह निर्णय पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर से बातचीत के बाद लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सुरक्षित बनाए रखने का भरोसा दिया है।

हालांकि, ईरान की ओर से भी नरम रुख दिखा। ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया कि यदि उन पर हमला नहीं किया गया तो वे भी सैन्य गतिविधियों को रोकने के लिए तैयार हैं। यह बयान संकेत देता है कि दोनों पक्ष तनाव कम करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कोई नई बात नहीं है। पिछले कई वर्षों से दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव और सैन्य गतिविधियों को लेकर विवाद रहा है। हाल ही में स्थिति तब बिगड़ी जब अमेरिका और उसके सहयोगियों ने ईरान पर कुछ रणनीतिक हमले किए, जिसके जवाब में ईरान ने भी आक्रामक रुख अपनाया।

इस बीच, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव लाया गया, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने के लिए सैन्य हस्तक्षेप की बात कही गई थी। लेकिन इस प्रस्ताव को रूस और चीन ने वीटो कर दिया। यह वीटो इस पूरे घटनाक्रम में निर्णायक साबित हुआ।

इस घटनाक्रम का असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत जैसे देशों पर भी सीधा प्रभाव पड़ता है।

भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बेहद अहम है। अगर यह मार्ग बाधित होता, तो कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आता, जिससे पेट्रोल-डीजल महंगे हो जाते और महंगाई बढ़ती।

वैश्विक स्तर पर भी तेल बाजार में अस्थिरता देखी गई। निवेशकों में डर का माहौल था और शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव बढ़ गया। इस सीजफायर ने फिलहाल राहत दी है, लेकिन अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है।

रूस के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत वासिली नेबेंजिया ने कहा कि प्रस्ताव “खतरनाक और असंतुलित” था क्योंकि इसमें ईरान पर हुए हमलों का उल्लेख नहीं था। वहीं चीन के प्रतिनिधि फू कोंग ने इसे “अपूर्ण और पक्षपातपूर्ण” बताया।

ट्रंप ने अपने बयान में दावा किया कि अमेरिका ने अपने सैन्य लक्ष्य हासिल कर लिए हैं और अब कूटनीतिक समाधान का समय है। हालांकि, विशेषज्ञ इस दावे को पूरी तरह सही नहीं मानते।

विश्लेषकों के अनुसार, ट्रंप का यह फैसला कई कारकों का परिणाम है। सबसे बड़ा कारण रूस और चीन का कूटनीतिक दबाव माना जा रहा है। इन दोनों देशों ने न केवल संयुक्त राष्ट्र में वीटो किया, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका को यह संदेश भी दिया कि संघर्ष बढ़ने पर वैश्विक ऊर्जा बाजार बुरी तरह प्रभावित होगा।

दूसरा कारण ईरान की सैन्य प्रतिक्रिया है। अमेरिका को उम्मीद से ज्यादा प्रतिरोध का सामना करना पड़ा, जिससे संघर्ष लंबा खिंच सकता था। तीसरा महत्वपूर्ण पहलू घरेलू राजनीति है—अमेरिका में भी युद्ध के खिलाफ आवाजें उठ रही थीं।

इसके अलावा, चीन और रूस ने इस संकट का उपयोग रणनीतिक रूप से किया। उन्होंने अमेरिका का ध्यान अन्य संवेदनशील क्षेत्रों जैसे ताइवान और दक्षिण चीन सागर से हटाने की कोशिश की।

ईरान पर संभावित हमले रोकने का ट्रंप का फैसला केवल एक तात्कालिक रणनीतिक कदम नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन का संकेत है। रूस और चीन की सक्रिय भूमिका ने यह साबित किया कि अब अंतरराष्ट्रीय राजनीति बहुध्रुवीय हो चुकी है।

दो हफ्तों का यह सीजफायर आगे क्या रूप लेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। लेकिन इतना जरूर है कि इसने दुनिया को एक बड़े युद्ध से फिलहाल बचा लिया है। आने वाले समय में यह तय होगा कि यह शांति स्थायी बनती है या सिर्फ एक अस्थायी विराम साबित होती है।

1. ट्रंप ने अचानक हमला क्यों रोका?
रूस-चीन के दबाव, वैश्विक तेल संकट और ईरान के प्रतिरोध के कारण।

2. क्या पाकिस्तान की भूमिका महत्वपूर्ण थी?
आधिकारिक तौर पर हां, लेकिन विशेषज्ञ इसे सीमित मानते हैं।

3. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्यों अहम है?
यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है।

4. भारत पर इसका क्या असर होगा?
तेल कीमतों में स्थिरता से महंगाई नियंत्रित रह सकती है।

5. क्या यह स्थायी शांति है?
अभी यह कहना जल्दबाजी होगी, फिलहाल यह अस्थायी सीजफायर है।